Lucknow Desk: हिंदू धर्म में पितृपक्ष (महालया) का विशेष महत्व होता है। इस बार पितृपक्ष 29 सितंबर दिन शुक्रवार से आरंभ हो रहा है। इस दौरान बिहार के गया में आज गुरुवार 28 सितंबर से विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला शुभारंभ हो जाएगा। बिहार के राजस्व मंत्री आलोक मेहता पितृपक्ष मेले का उद्घाटन करेंगे। इस बार गया आने वाले पिंडदानी एवं तीर्थयात्रियों को पीने के लिए पहली बार गंगाजल की व्यवस्था की गई है। बिहार के सीएम नीतीश कुमार के महत्वाकांक्षी योजना 'गंगाजल' आपूर्ति योजना के तहत अब यहां आए पिंडदानियों को भी पीने के लिए गंगाजल उपलब्ध होगा। जिला प्रशासन की ओर से पहली बार यह सुविधा तीर्थयात्रियों को देने जा रही है।
यहां करे पिंडदान
बता दे कि बिहार के गया जिला के जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम ने बताया कि तीर्थयात्रियों को पेयजल के लिए गंगाजल पीने का अवसर मिलेगा। इसके लिए पिंडदान स्थल देवघाट, सीताकुंड, विष्णुपद मंदिर प्रवेश द्वार के बाहर के साथ-साथ गांधी मैदान में आवासन के लिए बनाए गए टेंट सिटी में भी गंगाजल की आपूर्ति की जाएगी। इसके लिए प्याऊ बनाया गया है।
पितृपक्ष मेले की अवधि में शहर के 55 पिंड वेदियों पर तीर्थयात्री अपने पूर्वजों को मोक्ष दिलाने के लिए पिंडदान एवं कर्मकांडों को कर सकेंगे। साफ-सफाई, लाइट, सुरक्षा आदि की व्यवस्था पूरी कर ली गई है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से पूरे मेला क्षेत्र को 43 जोन में बांटकर पुलिस पदाधिकारियों की तैनाती की गई है। 67 पुलिस शिविर बनाए गए हैं। छह हजार अतिरिक्त पुलिस बलों की तैनाती की गई है। तीर्थयात्रियों के लिए 158 रिंग बसों का परिचालन किया जाएगा। इसके लिए विभिन्न स्थलों पर सुविधा दी गई है।
तीर्थयात्रियों के ठहरने के लिए टेंट सिटी
राज्य सरकार की ओर से गांधी मैदान में टेंट सिटी बनाया गया है जहां तीर्थयात्री निःशुल्क ठहर सकेंगे। कुल 2500 आवासन की क्षमता का निर्माण कराया गया है। सामान रखने के लिए लॉकर, सीसीटीवी कैमरा, शुद्ध पेयजल, चेंजिंग रूम, यात्रियों के लिए गंगा जल आपूर्ति, डिलक्स शौचालय, 24 घंटे निर्बाध बिजली की सुविधा के साथ-साथ पूरे मेला अवधि में भजन-कीर्तन के साथ रामलीला की भी व्यवस्था की गई है।
कब से आरंभ है पितृपक्ष
पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि 28 की शाम 6:18 बजे से आरंभ होकर 29 को दिन में 4:02 बजे तक है। 29 को ही पूर्णिमा और नान्दी मातामह का श्राद्ध होगा। अगले दिन 30 को (शनिवार) प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध ( दोपहर 1.58 बजे तक) है। रविवार एक अक्टूबर को द्वितीया एवं तृतीया (दोनों तिथि) का श्राद्ध है।