Lucknow Desk: सात साल बाद पीएम मोदी चीन पहुंचे हैं। इस दौरान वह चीन राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय बैठक किए। इस बैठक में पीएम मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सीमा विवाद, व्यापार सहयोग, आतंकवाद और क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा की। इसी बीच समाजवादी पार्टी के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बीजेपी को पांच साल पुराना बयान याद दिलाया है। इसके साथ ही उन्होंने बीजेपी चीनी चाल की क्रोनोलॉजी का जिक्र करते हुए सोशल मीडिया एक्स पर 10 प्वॉइंट्स में समझाया है।
सपा प्रमुख ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर की है, जिसमें उन्होंने लिखा- ये है तथाकथित आत्मनिर्भर, स्वदेशी और चीनी सामान के बहिष्कार के भाजपाई जुमलों का चिंताजनक सच!
चीन से आनेवाले सामानों पर जिस तरह भारत की निर्भरता बढ़ती जा रही है, उसका बुरा असर हमारे उद्योगों, कारख़ानों और दुकानों के लगातार घटते जा रहे काम-कारोबार पर पड़ा है। इससे बेरोज़गारी भी बेतहाशा बढ़ रही है।
भाजपा चीनी चाल की क्रोनोलॉजी समझे:
- पहले चीन अपना माल भारत के बाज़ारों में भर देगा …
- इससे चीन पर निर्भरता इतनी बढ़ जाएगी कि उनकी हर ग़लत हरकत को नज़रअंदाज़ करने के लिए भाजपाई मजबूर हो जाएंगे …
- उसके बाद चीन हमारे उत्पादों और उद्योगों को धीरे-धीरे बंद करवाने के कगार तक ले जाएगा …
- उसके बाद मनमाने दाम पर हर चीज़ सप्लाई करेगा …
- उसके बाद महंगाई-बेरोज़गारी बढ़ाएगा …
- उसके बाद जब महंगाई-बेरोज़गारी ज़्यादा होगी तो सरकार के ख़िलाफ़ आक्रोश भी कई गुना बढ़ जाएगा…
- उसके बाद दूसरों के सहारे पर चल रही, बिना बहुमत की भाजपा की सरकार और भी कमज़ोर होकर लड़खड़ा जाएगी…
- उसके बाद ख़ुद ही लड़खड़ाती भाजपा की सरकार चीन के अतिक्रमण को चुनौती नहीं दे पायेगी …
- उसके बाद हमारी भूमि पर चीन अपना क़ब्ज़ा और बढ़ाएगा …
- उसके बाद भाजपा दोहराएगी कि “न कोई…, न कोई…”
अगर ये बात ‘ड्रोनवालों’ को समझ नहीं आ रही है तो उप्र में विराजमान ‘बुलडोज़र’ वाले प्रवासी जी ही ये सच्चाई समझकर जवाब दे दें कि चीन द्वारा हमारी कितनी ज़मीन हड़प ली गयी है, क्योंकि उनका मूल निवास स्थान भी तो चीनी क़ब्ज़े का शिकार हुआ है।
भाजपाई बस देश का क्षेत्रफल बता दें मतलब ये बता दें कि भाजपा सरकार के आने के समय देश की कुल भूमि जितनी थी, अब भी उतनी ही है या अब चीनी क़ब्ज़े के बाद घट गयी है। दिल्लीवाले न सही तो लखनऊवाले ‘पलायन स्पेशलिस्ट’ ही बता दें कि हमारी कितनी भूमि का पलायन हो गया है, वैसे जनता ये बख़ूबी समझती है कि भूमि का पलायन थोड़े ना होता है, जो वो चलकर कहीं चली गयी होगी।