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असम बाढ़ 2026: 75 लोगों की मौत, कई गांव जलमग्न, राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी

TV 24 Network July 29, 2026 0
असम में बाढ़ प्रभावित गांव में नाव से लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाती बचाव टीम
असम बाढ़ 2026: राहत और बचाव अभियान

असम में लगातार हो रही भारी बारिश और ब्रह्मपुत्र सहित अन्य नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य के कई जिले बाढ़ से प्रभावित हैं और जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, बाढ़ से मरने वालों की संख्या 75 तक पहुँच गई है। हजारों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं, जबकि कई गांव अब भी पूरी तरह पानी में डूबे हुए हैं।

 

प्रभावित जिलों में जनजीवन ठप

बाढ़ का सबसे अधिक असर निचले इलाकों में देखने को मिल रहा है। सड़कें, पुल, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र जलमग्न होने से लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। कई स्थानों पर बिजली और संचार सेवाएं भी बाधित हुई हैं। पानी भर जाने के कारण दैनिक जीवन से जुड़ी गतिविधियाँ लगभग ठप हो गई हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

 

राहत और बचाव अभियान तेज

राज्य सरकार, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और स्थानीय प्रशासन मिलकर राहत एवं बचाव कार्य चला रहे हैं। नावों और अन्य बचाव उपकरणों की मदद से फँसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया जा रहा है। कई राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, जहाँ प्रभावित परिवारों को भोजन, पीने का स्वच्छ पानी, कपड़े, दवाइयाँ और अन्य आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।

 

किसानों और पशुपालकों को भारी नुकसान

बाढ़ का सबसे अधिक असर कृषि क्षेत्र पर पड़ा है। हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि पानी में डूब गई है, जिससे धान और अन्य फसलों को भारी नुकसान पहुँचा है। पशुपालकों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि कई पशु बाढ़ की चपेट में आ गए हैं और चारे की कमी उत्पन्न हो गई है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है।

 

स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ

बाढ़ के बाद जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने राहत शिविरों में चिकित्सा शिविर लगाए हैं। डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी कर रही हैं। स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने और संक्रमण रोकने के लिए विशेष अभियान भी चलाया जा रहा है।

 

मौसम विभाग की चेतावनी

भारतीय मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की संभावना जताई है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने, नदी किनारे के क्षेत्रों से दूर रहने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। संभावित खतरे वाले क्षेत्रों में पहले से ही एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।

 

स्थायी समाधान की आवश्यकता

विशेषज्ञों का मानना है कि असम में हर वर्ष आने वाली बाढ़ एक दीर्घकालिक चुनौती बन चुकी है। इसके समाधान के लिए तटबंधों को मजबूत करना, नदी प्रबंधन में सुधार, जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाना और आपदा प्रबंधन तंत्र को और प्रभावी बनाना आवश्यक है। साथ ही, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए दीर्घकालिक पुनर्वास योजनाओं को प्राथमिकता देने की जरूरत है।

 

असम में बाढ़ की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है और राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। सरकार, प्रशासन और स्वयंसेवी संगठन मिलकर प्रभावित लोगों तक हर संभव सहायता पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं। मौसम में सुधार और प्रभावी राहत कार्यों के माध्यम से जल्द ही हालात सामान्य होने की उम्मीद की जा रही है।

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अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, फाइटर जेट में उड़ान भरने वाली दूसरी महिला राष्ट्रपति

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Shahrukh Khan ने मनाया 60वां जन्मदिन, विदेशों से भी जुटे फैंस

Lucknow Desk: आज 02 नवंबर 2025 को बॉलीवुड के बादशाह Shahrukh Khan ने अपने 60वें जन्मदिन का जश्न मनाया। इस मौके पर उन्होंने अपने परिवार, करीबियों और फिल्म इंडस्ट्री के दोस्तों के साथ खुशियाँ बाँटी। उन्होंने अपने आलीशान घर के बजाय इस बार सार्वजनिक रूप से Mannat से बाहर नहीं दिखने का फैसला किया क्योंकि वहाँ फिलहाल निर्माण का काम चल रहा है। वहीँ, जश्न के लिए उन्होंने Alibaug में स्थित निजी स्थान चुना। एक विशेष फैन-मीट कार्यक्रम Balgandharva Rangmandir, बांद्रा में आयोजित किया गया था, जहाँ सीमित प्रवेश पास के माध्यम से प्रशंसक सीधे शामिल हुए। सोशल मीडिया पर सितारों ने बधाइयाँ दीं। जिसमें Farah Khan ने लिखा, “Happy birthday KING … rule for another 100 years”। बता दें कि Shahrukh Khan के जन्मदिन के मौके पर सिर्फ भारत भर से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी फैंस जुटे। शाहरुख खान के फैन क्लबों ने जन्मदिन सप्ताह के रूप में मनाया, चैरिटी ड्राइव, विशेष बैनर आदि के माध्यम से ख़ास अंदाज़ से जश्न मनाया।

UPSSSC PET परीक्षा के कारण उत्तर प्रदेश के 60 जिलों में स्कूल बंद
यूपी के 60 जिलों में PET परीक्षा के चलते स्कूल बंद, कक्षा 12 तक के छात्रों को राहत

उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) की प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (PET) 2026 को देखते हुए प्रदेश के लगभग 60 जिलों में स्कूलों को बंद रखने की व्यवस्था की गई है। 30 अक्टूबर को आयोजित परीक्षा के मद्देनजर कक्षा 12 तक के स्कूलों में अवकाश रखने का निर्णय लिया गया है। इसका उद्देश्य परीक्षा केंद्रों पर व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखना और परीक्षार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी से बचाना है।   प्रदेश में PET परीक्षा को लेकर प्रशासन और शिक्षा विभाग की ओर से आवश्यक तैयारियां की गई हैं। परीक्षा केंद्रों के आसपास यातायात व्यवस्था, सुरक्षा और अन्य जरूरी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के परीक्षा में शामिल होने के कारण कई जिलों में स्कूलों को बंद रखने की व्यवस्था की गई है, ताकि सड़कों पर भीड़ और यातायात का दबाव कम किया जा सके।   दो पालियों में आयोजित हो रही परीक्षा UPSSSC PET परीक्षा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अलग-अलग पालियों में आयोजित की जा रही है। परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों को निर्धारित समय से पहले पहुंचने की सलाह दी गई है। पहली पाली और दूसरी पाली के लिए अलग-अलग समय निर्धारित किया गया है। अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र में दिए गए परीक्षा केंद्र, समय और जरूरी दिशा-निर्देशों को ध्यान से पढ़ने के लिए कहा गया है।   परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को अपना एडमिट कार्ड और निर्धारित पहचान पत्र साथ रखना अनिवार्य है। परीक्षा केंद्र पर प्रवेश से पहले अभ्यर्थियों की जांच की जाएगी। परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल को रोकने के लिए भी जरूरी इंतजाम किए गए हैं।   स्कूलों को बंद रखने के पीछे क्या है वजह? PET परीक्षा के दौरान बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के एक जिले से दूसरे जिले में पहुंचने की संभावना रहती है। ऐसे में परीक्षा केंद्रों के आसपास यातायात का दबाव बढ़ सकता है। स्कूलों की छुट्टी रखने से बच्चों की आवाजाही कम होगी और परीक्षा से जुड़े इंतजामों को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिलेगी।   अभ्यर्थियों को इन बातों का रखना होगा ध्यान परीक्षार्थियों को सलाह दी गई है कि वे परीक्षा केंद्र पर समय से पहुंचें और एडमिट कार्ड पर दिए गए निर्देशों का पालन करें। मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच और अन्य प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण परीक्षा केंद्र के अंदर ले जाने की अनुमति नहीं होती है।   वहीं, अभिभावकों और विद्यार्थियों को अपने जिले के शिक्षा विभाग या जिला प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक आदेश की जानकारी अवश्य लेनी चाहिए। स्कूलों में अवकाश संबंधी निर्देश जिले के अनुसार अलग हो सकते हैं।

TV 24 Network October 30, 2026 0
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चक्रवात के अलर्ट के बीच रेलवे स्टेशन पर खड़ी यात्री ट्रेन
चक्रवात के चलते 8 ट्रेनें रद्द, 2 के रूट बदले; यात्रा से पहले देखें पूरी जानकारी

बंगाल की खाड़ी में चक्रवात की आशंका के बीच भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा और परिचालन व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कुछ ट्रेनों के संचालन में बदलाव किया है। 26 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, चक्रवात अर्नब के प्रभाव को देखते हुए आठ ट्रेनें रद्द की गई हैं, जबकि दो अन्य ट्रेनों के मार्ग बदलने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा कुछ सेवाओं के शुरुआती और अंतिम स्टेशन में भी बदलाव किए गए हैं।   चक्रवात से रेल सेवाओं पर असर बंगाल की खाड़ी में मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण पूर्वी तटीय क्षेत्रों में रेल परिचालन प्रभावित होने की आशंका है। तेज हवाओं, भारी बारिश और जलभराव जैसी परिस्थितियों में रेलवे को ट्रेनों की गति नियंत्रित करने, सेवाएं रद्द करने या वैकल्पिक मार्गों से चलाने की जरूरत पड़ सकती है।   रेलवे का उद्देश्य यात्रियों को संभावित जोखिम से बचाना और रेल सेवाओं का सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करना है। हालांकि, किन ट्रेनों को रद्द किया गया है और किनके मार्ग बदले गए हैं, इसकी पूरी जानकारी यात्रियों को संबंधित रेलवे जोन की आधिकारिक सूचना से जांचनी चाहिए।   यात्रियों को हो सकती है परेशानी ट्रेनों के रद्द होने या मार्ग बदलने से यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में देरी हो सकती है। जिन लोगों ने पहले से टिकट बुक करा रखे हैं, उन्हें यात्रा शुरू करने से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति की जानकारी लेनी चाहिए।   विशेष रूप से लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को यह जांचना चाहिए कि उनकी ट्रेन निर्धारित समय पर चल रही है या नहीं। मार्ग परिवर्तन होने पर कुछ स्टेशनों पर ट्रेन का ठहराव भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए केवल पुराने समय-सारणी के आधार पर स्टेशन पहुंचने का निर्णय लेना उचित नहीं होगा।   यात्रा से पहले ऐसे चेक करें ट्रेन का स्टेटस यात्री भारतीय रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट, NTES (National Train Enquiry System) और रेलवे की अधिकृत पूछताछ सेवाओं के माध्यम से अपनी ट्रेन की स्थिति देख सकते हैं। इसके लिए ट्रेन नंबर या ट्रेन का नाम दर्ज करके रद्द होने, देरी और मार्ग परिवर्तन से संबंधित जानकारी प्राप्त की जा सकती है।   यदि ट्रेन रद्द हो जाती है, तो टिकट के प्रकार और रेलवे के लागू नियमों के अनुसार रिफंड की प्रक्रिया की जानकारी लें। जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक ट्रेन या यात्रा के दूसरे साधन पर भी विचार किया जा सकता है।   रेलवे की सलाह पर दें ध्यान चक्रवात के दौरान मौसम तेजी से बदल सकता है। ऐसे में यात्रियों को रेलवे की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखनी चाहिए और बिना पुष्टि के सोशल मीडिया पर प्रसारित ट्रेन संबंधी सूचनाओं पर भरोसा नहीं करना चाहिए।   यात्रियों के लिए सबसे जरूरी है कि वे यात्रा से पहले ट्रेन का ताजा स्टेटस जांचें, पर्याप्त समय लेकर स्टेशन पहुंचें और किसी भी बदलाव के लिए तैयार रहें।

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राजस्थान में सूखे से प्रभावित खेत और सूखाग्रस्त तहसीलों की खबर
राजस्थान के 14 जिलों की 80 तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित, 69 में गंभीर सूखे की स्थिति

राजस्थान में मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश और खरीफ की फसलों को हुए नुकसान के बाद राज्य सरकार ने 14 जिलों की 80 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। सरकार के इस फैसले से प्रभावित क्षेत्रों में किसानों, पशुपालकों और स्थानीय प्रशासन को राहत मिलने की उम्मीद है। जारी अधिसूचनाओं के अनुसार, इन तहसीलों में सूखे की स्थिति को गंभीर और मध्यम, दो श्रेणियों में बांटा गया है।   69 तहसीलों में गंभीर सूखे की स्थिति राज्य सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, कुल 80 तहसीलों में से 69 को गंभीर सूखा प्रभावित और 11 को मध्यम सूखा प्रभावित श्रेणी में रखा गया है। आपदा प्रबंधन, राहत एवं नागरिक सुरक्षा विभाग ने 24 और 25 अक्टूबर को इस संबंध में अधिसूचनाएं जारी कीं। यह घोषणा 2026 के खरीफ सीजन के लिए की गई है और अधिसूचना के प्रकाशन से छह महीने तक प्रभावी रहेगी।   पहली अधिसूचना में 13 जिलों की 53 तहसीलों को शामिल किया गया था। इसके बाद दूसरी अधिसूचना के जरिए 27 और तहसीलों को सूची में जोड़ा गया। बीकानेर इस प्रक्रिया में शामिल होने वाला नया जिला बना, जिससे सूखा प्रभावित जिलों की कुल संख्या 14 हो गई।   जोधपुर, जालोर और बाड़मेर सबसे अधिक प्रभावित सूखा प्रभावित तहसीलों की संख्या के मामले में जोधपुर सबसे आगे है। यहां 12 तहसीलों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है। जालोर और बाड़मेर में 10-10 तहसीलें, बालोतरा में नौ और पाली में आठ तहसीलें शामिल हैं। इसके अलावा डूंगरपुर, जैसलमेर और फलोदी की सात-सात तहसीलों को सूची में रखा गया है।   बांसवाड़ा की तीन तहसीलें, चूरू और ब्यावर की दो-दो तहसीलें तथा बीकानेर, नागौर और सिरोही की एक-एक तहसील भी इस घोषणा के दायरे में आती हैं। इन क्षेत्रों में बारिश की कमी और जल उपलब्धता में गिरावट के कारण कृषि गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।   कम बारिश और फसलों को नुकसान बना प्रमुख कारण सूखे का आकलन करते समय सरकार ने कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार किया। इनमें सामान्य से कम वर्षा, सतही जल और भूजल की उपलब्धता, खड़ी फसलों की स्थिति तथा केंद्र सरकार के सूखा निगरानी पोर्टल से प्राप्त जानकारी शामिल है। आकलन केंद्र के सूखा प्रबंधन मैनुअल, 2016 के दिशा-निर्देशों के अनुसार किया गया।   राज्य में बारिश की कमी के कारण कई इलाकों में खेतों की नमी प्रभावित हुई है। इससे खरीफ की फसलों के उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ी है। कृषि पर निर्भर परिवारों के लिए यह स्थिति आर्थिक चुनौती बन सकती है।   किसानों और पशुपालकों को राहत की उम्मीद सूखाग्रस्त घोषित होने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक स्तर पर राहत संबंधी कदम उठाए जाने की संभावना है। विधानसभा के मुख्य सचेतक योगेश्वर गर्ग ने प्रभावित क्षेत्रों में चारा डिपो स्थापित करने और किसानों तथा पशुपालकों को हरसंभव सहायता देने की बात कही है।   हालांकि, किसानों को मिलने वाली सहायता, पात्रता और वितरण की प्रक्रिया संबंधित सरकारी नियमों एवं आदेशों पर निर्भर करेगी। ऐसे में प्रभावित किसानों के लिए जिला प्रशासन की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखना जरूरी है।   राजस्थान सरकार के इस फैसले से सूखे की समस्या से जूझ रहे क्षेत्रों में राहत कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। अब प्रभावित इलाकों के किसानों और पशुपालकों की नजर सरकार की ओर से किए जाने वाले अगले कदमों पर है।

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