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CJP ने दोबारा आंदोलन शुरू करने की दी चेतावनी, FIR वापसी और छात्रों की रिहाई की मांग

TV 24 Network July 28, 2026 0
CJP ने FIR वापसी और छात्रों की रिहाई के लिए दोबारा आंदोलन की चेतावनी दी
CJP ने दोबारा आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी

कॉकरेच जनता पार्टी यानी CJP ने केंद्र सरकार पर आंदोलन के दौरान किए गए समझौते का पालन नहीं करने का आरोप लगाते हुए दोबारा प्रदर्शन शुरू करने की चेतावनी दी है। संगठन का कहना है कि यदि गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए छात्रों को रिहा नहीं किया गया तथा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए गए, तो उसे फिर से देशव्यापी आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

 

यह चेतावनी 27 जुलाई 2026 को CJP के प्रतिनिधियों द्वारा आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी गई। संगठन ने आरोप लगाया कि 25 जुलाई को सरकार के साथ बातचीत के बाद आंदोलन को स्थगित किया गया था, लेकिन समझौते में किए गए कई वादों को अभी तक लिखित रूप नहीं दिया गया। CJP के अनुसार, अलग-अलग राज्यों में आंदोलन से जुड़े छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई जारी रहने की खबरें भी सामने आईं।

 

CJP ने सरकार पर लगाया वादा तोड़ने का आरोप

CJP के प्रवक्ताओं ने कहा कि बातचीत के दौरान सरकार ने कथित तौर पर आश्वासन दिया था कि शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल छात्रों और आयोजकों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसके अलावा आंदोलन के दौरान दर्ज FIR वापस लेने और हिरासत में लिए गए लोगों को छोड़ने पर भी सहमति बनने का दावा किया गया था।

 

संगठन का आरोप है कि इन आश्वासनों के बावजूद बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और दिल्ली सहित कई स्थानों से छात्रों को हिरासत में लेने या उनके खिलाफ कार्रवाई किए जाने की सूचनाएं मिलीं। CJP ने इसे सरकार और आंदोलनकारियों के बीच हुए समझौते का उल्लंघन बताया।

 

FIR वापस लेने की प्रमुख मांग

CJP की सबसे बड़ी मांग आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के खिलाफ दर्ज सभी मुकदमों को वापस लेने की है। संगठन ने कहा कि केवल मौखिक आश्वासन पर्याप्त नहीं है और सरकार को इस संबंध में स्पष्ट लिखित आदेश जारी करना चाहिए।

 

CJP ने सभी हिरासत में लिए गए छात्रों की तत्काल रिहाई, भविष्य में किसी प्रकार की पुलिस कार्रवाई नहीं किए जाने और आंदोलन से जुड़ी शिकायतों के समाधान की मांग भी रखी। संगठन ने सरकार को तय समय के भीतर कार्रवाई करने की चेतावनी दी थी।

 

हालांकि, कानूनी जानकारों के अनुसार FIR वापस लेने के लिए निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया का पालन करना पड़ सकता है। पुलिस अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर सकती है या संबंधित व्यक्ति हाई कोर्ट में FIR रद्द कराने के लिए याचिका दे सकता है।

 

दोबारा सड़कों पर उतरने की चेतावनी

CJP ने साफ कहा कि यदि सरकार लिखित समझौता जारी नहीं करती और हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा नहीं किया जाता, तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जा सकता है। संगठन ने कहा कि उसका उद्देश्य छात्रों की सुरक्षा और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

 

चेतावनी के बाद दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ाए जाने की खबर भी सामने आई। पुलिस प्रशासन कथित नए प्रदर्शन की संभावना को देखते हुए सतर्क रहा।

 

28 जुलाई को सामने आया नया अपडेट

28 जुलाई 2026 को CJP ने दावा किया कि सरकार के प्रतिनिधियों ने FIR वापस लेने, हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को रिहा करने और आगे की पुलिस कार्रवाई से सुरक्षा देने से जुड़े मसौदा आदेश साझा किए हैं। हालांकि, इन दावों की अंतिम स्थिति आधिकारिक आदेश जारी होने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।

 

फिलहाल CJP ने आंदोलन दोबारा शुरू करने का अंतिम फैसला रोक रखा है। संगठन सरकार की ओर से लिखित और आधिकारिक कार्रवाई का इंतजार कर रहा है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि दोनों पक्षों के बीच सहमति बनी रहती है या छात्र आंदोलन एक बार फिर तेज होता है।

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संसद की पब्लिक अकाउंट्स कमिटी यानी PAC ने रक्षा मंत्रालय से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। PAC की 49वीं रिपोर्ट में ऑर्डनेंस फैक्ट्री बड़माल द्वारा सेना को दिए गए खराब गोला-बारूद के कारण हुए करीब 62.10 करोड़ रुपये के नुकसान का मामला सामने आया है। समिति ने इसके साथ ही तोपों की खरीद में लंबे समय से हो रही देरी और स्वदेशी धनुष तोप परियोजना की उत्पादन संबंधी समस्याओं पर भी चिंता जताई है।   खराब गोला-बारूद से 62.10 करोड़ रुपये का नुकसान रिपोर्ट के मुताबिक, ऑर्डनेंस फैक्ट्री बड़माल द्वारा सप्लाई किए गए कुछ गोला-बारूद में खामियां सामने आई थीं। इन खराब गोला-बारूद को बदलकर नया माल उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में करीब 62.10 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। PAC ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि ऐसी खामियां केवल सरकारी पैसे के नुकसान का कारण नहीं बनतीं, बल्कि सेना के पास मौजूद गोला-बारूद की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करती हैं।   समिति ने रक्षा मंत्रालय से सप्लाई चेन को मजबूत करने, सख्त स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर लागू करने और तय समयसीमा के अंदर समस्याओं को दूर करने की व्यवस्था बनाने की सिफारिश की है।   तोपों की खरीद में दो दशक की देरी PAC ने भारतीय सेना के लिए आधुनिक आर्टिलरी गन की खरीद में हुई लंबी देरी पर भी सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, नई तोप प्रणाली को खरीदने और सेना में शामिल करने की प्रक्रिया में करीब दो दशक लग गए। इससे सेना को लंबे समय तक पुरानी तोपों पर निर्भर रहना पड़ा, जिनकी फायरपावर आधुनिक हथियारों के मुकाबले सीमित है।   समिति ने सुझाव दिया है कि रक्षा मंत्रालय को सेना के हथियारों और गोला-बारूद के स्टॉक की नियमित समीक्षा करनी चाहिए और भविष्य की सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए समय पर खरीद प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।   धनुष तोप प्रोजेक्ट की देरी पर चिंता PAC ने स्वदेशी 155mm/45 कैलिबर धनुष तोप परियोजना की तारीफ तो की है, लेकिन इसके उत्पादन में हुई देरी पर नाराजगी भी जताई है। रिपोर्ट में कहा गया कि इस तरह की एडवांस तोप भारत में पहले नहीं बनाई गई थी, जिससे उत्पादन प्रक्रिया धीरे-धीरे विकसित हुई। मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर भी परियोजना की जरूरतों के अनुसार पूरी तरह तैयार नहीं था। बैलिस्टिक विशेषज्ञता, गन इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस्ड साइटिंग सिस्टम जैसी तकनीकी क्षमताओं की कमी भी प्रोजेक्ट में देरी का कारण बनी।   मार्च 2027 तक प्रोजेक्ट पूरा करने पर जोर PAC ने बताया कि धनुष प्रोजेक्ट की निगरानी उच्च स्तर पर होने के बावजूद कई डेडलाइन पूरी नहीं हो सकीं। समिति ने मार्च 2027 तक बढ़ाई गई समयसीमा के अंदर प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए अतिरिक्त और प्रभावी कदम उठाने की जरूरत बताई है।   PAC ने दी पांच बड़ी सिफारिशें समिति ने रक्षा परियोजनाओं को बेहतर बनाने के लिए स्टॉक की नियमित समीक्षा, घरेलू क्षमताओं का पहले आकलन, कर्मचारियों की स्किल बढ़ाने, सप्लाई चेन और निर्णय प्रक्रिया में सुधार तथा प्रोजेक्ट की मजबूत निगरानी की सिफारिश की है।   PAC की रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि रक्षा क्षेत्र में देरी और गुणवत्ता से जुड़ी समस्याएं केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं रहतीं। इनका सीधा असर सेना की तैयारियों और राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। ऐसे में समय पर उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता नियंत्रण और स्पष्ट जवाबदेही बेहद जरूरी है।

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दिल्ली में संसद मार्च के दौरान बवाल, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोका; 70 लोग हिरासत में

दिल्ली में संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने आगे बढ़ने से रोक दिया। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग संसद की ओर जाने की कोशिश कर रहे थे, जिसके बाद पुलिस ने कई जगह बैरिकेडिंग लगाकर रास्ता बंद कर दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई।   रिपोर्टों के अनुसार, हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने 70 लोगों को हिरासत में लिया। झड़प और धक्का-मुक्की के दौरान पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के घायल होने की भी खबर सामने आई है। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई।   प्रदर्शन के कारण बढ़ा तनाव प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर संसद की ओर मार्च करना चाहते थे। बड़ी संख्या में लोगों के एक साथ आगे बढ़ने के कारण पुलिस ने उन्हें निर्धारित क्षेत्र से आगे जाने की अनुमति नहीं दी। जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश की, तब पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई।   कुछ समय के लिए माहौल काफी तनावपूर्ण रहा। पुलिस ने भीड़ को पीछे हटाने और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया। इसके बाद कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।   70 लोगों को हिरासत में लिया गया मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान 70 लोगों को हिरासत में लिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संसद क्षेत्र की सुरक्षा को देखते हुए यह कार्रवाई की गई।   संसद और उसके आसपास का इलाका सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। इसी कारण बिना अनुमति बड़ी संख्या में लोगों को संसद की ओर बढ़ने से रोक दिया गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील भी की।   पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी हुए घायल प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प में कई पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के घायल होने की सूचना है। हालांकि घायलों की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग दावे सामने आए हैं।   घायल लोगों को इलाज के लिए अस्पताल और नजदीकी चिकित्सा केंद्रों में भेजा गया। घटना के बाद पुलिस ने प्रदर्शन स्थल और आसपास के क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी। किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों को भी तैनात किया गया।   दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था की गई मजबूत संसद मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस पहले से ही सतर्क थी। प्रमुख सड़कों, सरकारी इमारतों और संसद की ओर जाने वाले रास्तों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। कई जगह बैरिकेडिंग और पुलिस की अतिरिक्त तैनाती की गई।   प्रदर्शन के कारण कुछ मार्गों पर यातायात भी प्रभावित हुआ। पुलिस ने लोगों से वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करने और भीड़ वाले क्षेत्रों से बचने की सलाह दी।   घटना के बाद जांच और निगरानी जारी प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प और कथित हिंसा से जुड़े वीडियो और अन्य सबूतों की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि तनाव किस वजह से बढ़ा और किन लोगों की भूमिका रही।   दिल्ली में संसद मार्च की इस घटना ने एक बार फिर विरोध प्रदर्शन, कानून-व्यवस्था और शांतिपूर्ण आंदोलन के अधिकार को लेकर बहस तेज कर दी है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि लोग अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रख सकें और साथ ही राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था भी बनी रहे।

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