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यूरोप में जंगल की आग का संकट: फ्रांस और स्पेन में हालात गंभीर, हजारों लोग सुरक्षित स्थानों पर भेजे गए

TV 24 Network July 28, 2026 0
फ्रांस और स्पेन के जंगलों में लगी भीषण आग और उठता हुआ धुआं
यूरोप में जंगल की आग का संकट 2026

यूरोप के कई देश इस समय भीषण गर्मी और जंगलों में लगी आग के गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। फ्रांस और स्पेन में आग ने सबसे अधिक तबाही मचाई है। तेज हवा, लंबे समय से जारी सूखा और अत्यधिक तापमान के कारण आग तेजी से नए क्षेत्रों में फैल रही है। हालात को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित इलाकों से लाखों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है।

 

फ्रांस में स्थिति गंभीर

फ्रांस के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से, विशेष रूप से गिरोंद और बोर्डो के आसपास के क्षेत्र, जंगल की आग से बुरी तरह प्रभावित हैं। कई स्थानों पर आग ने जंगलों के साथ-साथ घरों, खेतों और स्थानीय संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचाया है। रिपोर्टों के अनुसार, फ्रांस में एक लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि आग की चपेट में आ चुकी है। बड़ी संख्या में दमकलकर्मी, सैनिक और बचाव दल आग को नियंत्रित करने में जुटे हैं।

 

आग से उठने वाले घने धुएं के कारण आसपास के क्षेत्रों की वायु गुणवत्ता भी खराब हो गई है। स्थानीय प्रशासन ने बच्चों, बुजुर्गों और सांस से जुड़ी बीमारी वाले लोगों को घरों में रहने तथा मास्क पहनने की सलाह दी है। कई सड़कें बंद कर दी गई हैं और लोगों को प्रभावित जंगलों के पास न जाने को कहा गया है।

 

स्पेन में भी बड़े स्तर पर निकासी

स्पेन में मैड्रिड, आविला और अन्य क्षेत्रों के पास जंगल की आग ने हजारों लोगों को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया है। आपातकालीन सेवाओं के साथ सेना की विशेष इकाइयों को भी राहत और बचाव कार्यों में लगाया गया है। प्रशासन का कहना है कि बढ़ता तापमान और बदलती हवा आग बुझाने के अभियान को कठिन बना रही है।

 

फ्रांस और स्पेन को मिलाकर तीन लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए जाने की खबर है। कई परिवार अस्थायी राहत शिविरों में रह रहे हैं। आग के कारण पर्यटन, सड़क परिवहन, खेती और स्थानीय कारोबार भी प्रभावित हुए हैं।

 

नई गर्मी की लहर का खतरा

मौसम विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यूरोप के कुछ हिस्सों में तापमान दोबारा 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच सकता है। इससे सूखी घास और पेड़ों में आग फैलने का खतरा और बढ़ जाएगा। दमकल विभाग के लिए आने वाले दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

 

यूरोपीय संघ ने प्रभावित देशों की सहायता के लिए विमान, हेलीकॉप्टर और दमकल दल उपलब्ध कराए हैं। पुर्तगाल, स्वीडन और अन्य देशों से भी मदद भेजी गई है।

 

जलवायु परिवर्तन से बढ़ रही चुनौती

विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार बढ़ता तापमान, कम बारिश और लंबे सूखे से जंगल की आग अधिक खतरनाक हो रही है। हालांकि हर आग का कारण सीधे जलवायु परिवर्तन नहीं होता, लेकिन गर्म और शुष्क परिस्थितियां आग को तेजी से फैलने में मदद करती हैं।

 

यूरोप का यह संकट बताता है कि जंगलों की सुरक्षा, समय पर चेतावनी व्यवस्था, पर्याप्त दमकल संसाधन और जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए ठोस कदम उठाना बेहद आवश्यक हो गया है।

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Brijbhushan Sharan Singh के हेलीकॉप्टर की खेत में इमरजेंसी लैंडिंग! इस वजह से बिगड़ा संतुलन

Lucknow Desk: कैसरगंज के बीजेपी नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के हेलीकॉप्टर को धान के खेत में अचानक उतारना पड़ा। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि तकनीकी खराबी आने के बाद पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतारा, जहां हेलीकॉप्टर देखने के लिए ग्रामीण भी जुट गए। मिली जानकारी के मुताबिक, बृजभूषण शरण सिंह एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। उड़ान के कुछ ही मिनट बाद हेलीकॉप्टर में तकनीकी दिक्कत आने लगी। स्थिति को समझते हुए पायलट ने तुरंत इमरजेंसी लैंडिंग का फैसला लिया और नज़दीकी धान के खेत में हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतार दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। हेलीकॉप्टर की जांच के लिए टेक्निकल टीम बुलाई गई है। फिलहाल राहत की बात यह है कि बृजभूषण शरण सिंह और हेलीकॉप्टर में मौजूद सभी लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं। जांच के बाद ही तकनीकी खराबी की असली वजह पता चल पाएगी। इसी बीच पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर संदेश दिया। उन्होंने कहा, आज मेरा बिहार प्रदेश के अंदर संदेश व दिनारा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सभा का कार्यक्रम था। संदेश विधानसभा का कार्यक्रम करके मैं दिनारा विधानसभा के लिए हेलीकाप्टर से निकला था। अचानक मौसम खराब होने के कारण हेलीकाप्टर की सुरक्षित लैंडिंग एक खेत में करानी पड़ी। पायलट ने बड़ी सूझबूझ से लैंडिंग कराई। मैं, इस समय गाड़ी से पटना जा रहा हूं। किसी अफवाह में आने की जरूरत नहीं है। किसी प्रकार की कोई हानि नहीं हुई है। हम सभी पूर्णतया सुरक्षित हैं। हेलीकाप्टर की सुरक्षा का प्रबंध कर दिया गया है। प्रशासन व जनता का बहुत सहयोग रहा...धन्यवाद

Shahrukh Khan ने मनाया 60वां जन्मदिन, विदेशों से भी जुटे फैंस

Lucknow Desk: आज 02 नवंबर 2025 को बॉलीवुड के बादशाह Shahrukh Khan ने अपने 60वें जन्मदिन का जश्न मनाया। इस मौके पर उन्होंने अपने परिवार, करीबियों और फिल्म इंडस्ट्री के दोस्तों के साथ खुशियाँ बाँटी। उन्होंने अपने आलीशान घर के बजाय इस बार सार्वजनिक रूप से Mannat से बाहर नहीं दिखने का फैसला किया क्योंकि वहाँ फिलहाल निर्माण का काम चल रहा है। वहीँ, जश्न के लिए उन्होंने Alibaug में स्थित निजी स्थान चुना। एक विशेष फैन-मीट कार्यक्रम Balgandharva Rangmandir, बांद्रा में आयोजित किया गया था, जहाँ सीमित प्रवेश पास के माध्यम से प्रशंसक सीधे शामिल हुए। सोशल मीडिया पर सितारों ने बधाइयाँ दीं। जिसमें Farah Khan ने लिखा, “Happy birthday KING … rule for another 100 years”। बता दें कि Shahrukh Khan के जन्मदिन के मौके पर सिर्फ भारत भर से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी फैंस जुटे। शाहरुख खान के फैन क्लबों ने जन्मदिन सप्ताह के रूप में मनाया, चैरिटी ड्राइव, विशेष बैनर आदि के माध्यम से ख़ास अंदाज़ से जश्न मनाया।

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भारत की इंडो-पैसिफिक कूटनीति को दर्शाता सांकेतिक चित्र, जिसमें भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया के झंडे दिखाई दे रहे हैं।
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भारत ने बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच अपनी विदेश नीति को नई दिशा देते हुए इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी है। जापान, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया जैसे देशों के साथ बढ़ते रणनीतिक संबंधों को भारत की दीर्घकालिक कूटनीतिक रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि इन साझेदारियों से क्षेत्रीय संतुलन मजबूत हो सकता है और चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत की भूमिका और महत्वपूर्ण बन सकती है।   इंडो-पैसिफिक पर भारत का बढ़ता फोकस हिंद-प्रशांत क्षेत्र आज वैश्विक व्यापार, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का प्रमुख केंद्र बन चुका है। भारत लगातार "मुक्त, खुला और समावेशी इंडो-पैसिफिक" की वकालत कर रहा है। इसका उद्देश्य समुद्री मार्गों की सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान और सभी देशों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना है।   जापान, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया से बढ़ा सहयोग भारत ने हाल के समय में जापान, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया के साथ रक्षा, समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा, निवेश और महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals) जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया है। इन साझेदारियों का उद्देश्य केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि सुरक्षित और मजबूत सप्लाई चेन तैयार करना भी है।   'G Minus Two' रणनीति पर चर्चा हाल के दिनों में "G Minus Two" रणनीति की चर्चा तेज हुई है। इस अवधारणा के तहत भारत उन देशों के साथ सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहा है जो बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था और स्वतंत्र इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का समर्थन करते हैं। इसे अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के दौर में भारत की संतुलित कूटनीतिक नीति के रूप में देखा जा रहा है।   महत्वपूर्ण खनिजों पर भी विशेष ध्यान सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा तकनीक और स्वच्छ ऊर्जा के लिए जरूरी रेयर अर्थ और क्रिटिकल मिनरल्स की वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है। भारत इन संसाधनों की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कई देशों के साथ समझौते और सहयोग बढ़ा रहा है ताकि किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता कम की जा सके।   भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका पिछले कुछ वर्षों में भारत ने G20, क्वाड और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर सक्रिय भागीदारी निभाई है। विदेश नीति में संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए भारत एक साथ कई देशों के साथ रणनीतिक संबंध मजबूत कर रहा है। इससे वैश्विक मंच पर भारत की विश्वसनीयता और प्रभाव दोनों में वृद्धि देखने को मिल रही है।   भारत की नई कूटनीतिक रणनीति का केंद्र सहयोग, क्षेत्रीय स्थिरता और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में मजबूत साझेदारियां भारत को आर्थिक, सामरिक और कूटनीतिक रूप से अधिक सक्षम बना सकती हैं। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय संबंध लगातार बदलते रहते हैं और भारत तथा चीन दोनों अपने-अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार नीतियां बनाते रहते हैं।

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होर्मुज से भारत के लिए बड़ी राहत: यूरिया और डीएपी से लदे 15 जहाज पहुंचे, किसानों को मिलेगी समय पर खाद

भारत के कृषि क्षेत्र के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से यूरिया, डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) और सल्फर लेकर आ रहे 15 मालवाहक जहाज सुरक्षित रूप से भारत की ओर बढ़ चुके हैं। यह जानकारी केंद्र सरकार ने दी है। हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और समुद्री मार्गों पर सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण इन जहाजों की आवाजाही को लेकर आशंका बनी हुई थी। अब इन जहाजों के सुरक्षित आगे बढ़ने से देश में उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर राहत मिली है।   किसानों के लिए राहत की खबर यूरिया और डीएपी खरीफ फसलों के लिए सबसे महत्वपूर्ण उर्वरकों में गिने जाते हैं। ऐसे समय में जब कई राज्यों में खेती का कार्य तेज़ी से चल रहा है, इन जहाजों के भारत पहुंचने से किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। सरकार का कहना है कि इससे उर्वरकों की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी और बाजार में किसी प्रकार की कमी की आशंका भी कम होगी।   घरेलू उत्पादन भी लक्ष्य से अधिक सरकार ने यह भी बताया है कि अप्रैल से जून 2026 के दौरान देश में यूरिया का घरेलू उत्पादन निर्धारित लक्ष्य से अधिक रहा है। इस अवधि में लगभग 71.6 लाख टन यूरिया का उत्पादन हुआ, जबकि लक्ष्य 67.9 लाख टन था। लगातार तीन महीनों तक लक्ष्य से अधिक उत्पादन होने से देश की उर्वरक उपलब्धता और मजबूत हुई है।   वैश्विक तनाव के बीच मजबूत तैयारी पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे माहौल में भारत सरकार ने आयात के साथ-साथ घरेलू उत्पादन पर भी विशेष ध्यान दिया, जिससे संभावित संकट का असर किसानों तक न पहुंचे।   जल्द भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचेगा माल सरकार के अनुसार, ये जहाज भारत के विभिन्न बंदरगाहों पर पहुंचने के बाद यूरिया, डीएपी और सल्फर की खेप उतारेंगे। इसके बाद संबंधित राज्यों में उर्वरकों की आपूर्ति तेज़ी से की जाएगी। इससे खरीफ सीजन में किसानों की जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिलेगी और कृषि कार्य प्रभावित नहीं होंगे। होर्मुज जलडमरूमध्य से 15 उर्वरक जहाजों का सुरक्षित भारत की ओर बढ़ना देश के कृषि क्षेत्र के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है। एक ओर घरेलू उत्पादन लक्ष्य से अधिक रहा है, वहीं दूसरी ओर आयातित उर्वरकों की नियमित आपूर्ति से देश में खाद की उपलब्धता मजबूत बनी रहेगी। सरकार का कहना है कि किसानों को समय पर आवश्यक उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे खेती और खाद्य सुरक्षा पर किसी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

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