एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच दक्षिण कोरिया और ताइवान से दो महत्वपूर्ण खबरें सामने आई हैं। दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री ने अनुमान जताया है कि उत्तर कोरिया के पास 80 से 120 तक परमाणु हथियार हो सकते हैं। दूसरी ओर, ताइवान सरकार ने वर्ष 2027 के रक्षा बजट में 18 प्रतिशत बढ़ोतरी करने का प्रस्ताव रखा है। इन दोनों घटनाक्रमों को क्षेत्र में बदलते सुरक्षा समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है।
उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों पर बड़ा अनुमान
दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री आन ग्यू-बैक के अनुसार, उत्तर कोरिया के पास लगभग 80 से 120 परमाणु हथियार हो सकते हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अनुमान निजी अनुसंधान संस्थाओं के आंकड़ों पर आधारित है। दक्षिण कोरियाई सेना के पास उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों की सटीक संख्या की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करने की क्षमता नहीं है।
दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया को आधिकारिक रूप से परमाणु हथियार संपन्न देश मानने से भी इनकार किया है। सियोल का कहना है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका की विस्तारित परमाणु सुरक्षा व्यवस्था पर निर्भर रहेगा। दक्षिण कोरिया ने अपने देश में अमेरिकी सामरिक परमाणु हथियारों की तैनाती का भी समर्थन नहीं किया है।
उत्तर कोरिया पिछले कई वर्षों से अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम का लगातार विस्तार कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और कूटनीतिक दबाव के बावजूद प्योंगयांग ने कई मिसाइल परीक्षण किए हैं। इससे दक्षिण कोरिया, जापान और अमेरिका सहित अनेक देशों की चिंता बढ़ी हुई है।
ताइवान का रक्षा बजट रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचेगा
इस बीच ताइवान सरकार ने वर्ष 2027 के रक्षा बजट में 18 प्रतिशत बढ़ोतरी करने का औपचारिक प्रस्ताव रखा है। प्रस्तावित बजट लगभग 1.1225 ट्रिलियन ताइवानी डॉलर यानी करीब 31.41 अरब अमेरिकी डॉलर होगा। पहली बार ताइवान का रक्षा बजट एक ट्रिलियन ताइवानी डॉलर से ऊपर पहुंच सकता है। यह राशि ताइवान के सकल घरेलू उत्पाद के तीन प्रतिशत से अधिक होगी।
इस बजट का उपयोग ड्रोन, मिसाइल, स्वदेशी पनडुब्बियों तथा अन्य आधुनिक सैन्य उपकरणों पर किए जाने की संभावना है। ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने बढ़ते रक्षा खर्च को शांति और राष्ट्रीय सुरक्षा में किया गया निवेश बताया है।
ताइवान ने यह कदम ऐसे समय उठाया है, जब चीन की ओर से उस पर सैन्य और राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। चीन ताइवान को अपना क्षेत्र मानता है और आवश्यकता पड़ने पर बल प्रयोग की संभावना से इनकार नहीं करता। वहीं, ताइवान का कहना है कि उसके भविष्य का निर्णय केवल वहां की जनता को करना चाहिए।
एशिया में बढ़ती हथियारों की प्रतिस्पर्धा
उत्तर कोरिया के संभावित परमाणु हथियारों और ताइवान के रिकॉर्ड रक्षा बजट से संकेत मिलता है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सैन्य प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है। उत्तर कोरिया की परमाणु क्षमता कोरियाई प्रायद्वीप के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है, जबकि चीन और ताइवान के बीच तनाव पूरे क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।
दोनों घटनाक्रम 20 अगस्त 2026 को सामने आए हैं। आने वाले समय में अमेरिका, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया की नीतियां इस क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
Lucknow Desk: बिहार के मोकामा से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ चुनाव प्रचार के दौरान हमला किया गया। इस घटना में जानी-मानी हस्ती दुलारचंद यादव की हत्या हो गई है और आरोप लगाया गया है कि इस घटना में पूर्व विधायक अनंत सिंह के समर्थकों की भूमिका है। यह घटना आगामी विधानसभा चुनाव के बीच हुई है, जिससे राज्य में कानून-व्यवस्था और चुनावी हिंसा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अनंत सिंह समेत 5 नामजद मोकामा में दुलारचंद यादव की हत्या मामले में JDU प्रत्याशी बाहुबली अनंत सिंह समेत पांच लोगों पर केस दर्ज कर ली गई है। मृत दुलारचंद यादव के पोते के दिए गए बयान पर अनंत सिंह, दो भतीजों रणवीर सिंह, कर्मवीर सिंह, करीबी छोटन सिंह और कंजय सिंह पर नामजद और कई अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। यानी दुलारचंद यादव के परिजनों और जन सुराज पार्टी के समर्थकों ने सीधे तौर पर JDU उम्मीदवार और बाहुबली नेता अनंत सिंह के समर्थकों पर हत्या का आरोप लगाया है। अनंत सिंह ने आरोपों को किया खारिज वहीं इस बयान पर JDU उम्मीदवार अनंत सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे RJD उम्मीदवार वीणा देवी के पति बाहुबली सूरजभान सिंह की साजिश बताया है। अनंत सिंह ने कहा कि उनके काफिले पर विरोधियों ने हमला किया और यह सारा खेल सूरजभान सिंह करवा रहे हैं। कौन थे दुलारचंद यादव ? मोकामा के रहने वाले दुलारचंद यादव को ‘टाल का बादशाह’ कहा जाता था। दुलारचंद पहलवानी के साथ-साथ गाना गाने के भी शौकीन थे। उन्होंने जन सुराज के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के लिए एक गाना भी रिकॉर्ड करवाया था। माना जा रहा है कि मोकामा की चुनावी जंग अब व्यक्तिगत रंजिश और हिंसक टकराव की तरफ मुड़ गई है।
बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन एक बार फिर दादा होने का गर्व महसूस कर रहे हैं। दरअसल, उनके नाती अगस्त्य नंदा की अपकमिंग फिल्म ‘इक्कीस’ का ट्रेलर हाल ही में रिलीज़ हुआ है। ट्रेलर देखकर बिग बी इतने इमोशनल हो गए कि उन्होंने सोशल मीडिया पर एक दिल छू लेने वाला पोस्ट शेयर किया। अमिताभ ने अपने पोस्ट में लिखा, “ये तो बस शुरुआत है... गर्व है तुम्हारे इस सफर पर, मेरे बच्चे।” उनकी इस पोस्ट पर फैन्स और फिल्म इंडस्ट्री के सितारों ने जमकर प्यार लुटाया। ‘इक्कीस’ मेगास्टार मेघना गुलज़ार के निर्देशन में बनी है और इसमें अगस्त्य नंदा एक अहम किरदार निभा रहे हैं। फिल्म 1971 के युद्ध के हीरो अरुण खेत्रपाल की कहानी पर आधारित है, जो देश के सबसे युवा परमवीर चक्र विजेता थे। फिल्म के ट्रेलर में अगस्त्य का जोश और समर्पण देखकर फैन्स कह रहे हैं—“दादा की तरह नाती भी लाजवाब!” तो देखना दिलचस्प होगा कि क्या अगस्त्य अपनी पहली ही फिल्म से दादा अमिताभ की विरासत को आगे बढ़ा पाएंगे।
Lucknow Desk: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज बुधवार को भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान राफेल में उड़ान भरकर इतिहास रच दिया है। इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुखोई-3 MKI लड़ाकू विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। राष्ट्रपति की इस उड़ान ने आज भारतीय वायुसेना के साथ-साथ पूरे देश को गौरव से भर दिया है। बता दें, भारत का राष्ट्रपति तीनों सेनाओं की कमांडर होता है और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर मौजूद हैं। अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज सुबह अंबाला एयरबेस पहुंचीं, जहां वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह और वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। बता दें, राष्ट्रपति का यह उड़ान न केवल साहसिक नेतृत्व शैली का प्रतीक है, बल्कि भारत की बढ़ती रक्षा क्षमता और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को वैश्विक पटल पर मजबूती से प्रदर्शित करना भी है। फाइटर जेट में उड़ान भरने वाली दूसरी महिला राष्ट्रपति मुर्मू राष्ट्रपति मुर्मू ने फाइटर जेट की सवारी ये पहली बार नहीं की हैं। उन्होंने इससे पहले 8 अप्रैल 2023 को असम के तेजपुर एयरफोर्स स्टेशन से सुखोई-30 MKI फाइटर विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। वह फाइटर जेट उड़ाने वाली तीसरी राष्ट्रपति और दूसरी महिला राष्ट्राध्यक्ष बनी थीं। राष्ट्रपति मुर्मू ने से पहले पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और प्रतिभा पाटिल ने भी सुखोई-30 MKI में उड़ान भरी थी। राफेल लड़ाकू विमान का क्या है इतिहास? बता दें, राफेल लड़ाकू विमान फ्रांसीसी कंपनी दसॉ एविएशन द्वारा निर्मित किया गया है। सितंबर 2020 में अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर भारतीय वायुसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था। अंबाला एयरबेस राफेल स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरोज' का मुख्य केंद्र है। इन विमानों का इस्तेमाल हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान किया गया था, इसके माध्यम से आतंकवादी ठिकानों पर हमले कर अपनी ताकत को सैनियों ने दिखाया था।
Lucknow Desk: कैसरगंज के बीजेपी नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के हेलीकॉप्टर को धान के खेत में अचानक उतारना पड़ा। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि तकनीकी खराबी आने के बाद पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतारा, जहां हेलीकॉप्टर देखने के लिए ग्रामीण भी जुट गए। मिली जानकारी के मुताबिक, बृजभूषण शरण सिंह एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। उड़ान के कुछ ही मिनट बाद हेलीकॉप्टर में तकनीकी दिक्कत आने लगी। स्थिति को समझते हुए पायलट ने तुरंत इमरजेंसी लैंडिंग का फैसला लिया और नज़दीकी धान के खेत में हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतार दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। हेलीकॉप्टर की जांच के लिए टेक्निकल टीम बुलाई गई है। फिलहाल राहत की बात यह है कि बृजभूषण शरण सिंह और हेलीकॉप्टर में मौजूद सभी लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं। जांच के बाद ही तकनीकी खराबी की असली वजह पता चल पाएगी। इसी बीच पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर संदेश दिया। उन्होंने कहा, आज मेरा बिहार प्रदेश के अंदर संदेश व दिनारा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सभा का कार्यक्रम था। संदेश विधानसभा का कार्यक्रम करके मैं दिनारा विधानसभा के लिए हेलीकाप्टर से निकला था। अचानक मौसम खराब होने के कारण हेलीकाप्टर की सुरक्षित लैंडिंग एक खेत में करानी पड़ी। पायलट ने बड़ी सूझबूझ से लैंडिंग कराई। मैं, इस समय गाड़ी से पटना जा रहा हूं। किसी अफवाह में आने की जरूरत नहीं है। किसी प्रकार की कोई हानि नहीं हुई है। हम सभी पूर्णतया सुरक्षित हैं। हेलीकाप्टर की सुरक्षा का प्रबंध कर दिया गया है। प्रशासन व जनता का बहुत सहयोग रहा...धन्यवाद
Lucknow Desk: आज 02 नवंबर 2025 को बॉलीवुड के बादशाह Shahrukh Khan ने अपने 60वें जन्मदिन का जश्न मनाया। इस मौके पर उन्होंने अपने परिवार, करीबियों और फिल्म इंडस्ट्री के दोस्तों के साथ खुशियाँ बाँटी। उन्होंने अपने आलीशान घर के बजाय इस बार सार्वजनिक रूप से Mannat से बाहर नहीं दिखने का फैसला किया क्योंकि वहाँ फिलहाल निर्माण का काम चल रहा है। वहीँ, जश्न के लिए उन्होंने Alibaug में स्थित निजी स्थान चुना। एक विशेष फैन-मीट कार्यक्रम Balgandharva Rangmandir, बांद्रा में आयोजित किया गया था, जहाँ सीमित प्रवेश पास के माध्यम से प्रशंसक सीधे शामिल हुए। सोशल मीडिया पर सितारों ने बधाइयाँ दीं। जिसमें Farah Khan ने लिखा, “Happy birthday KING … rule for another 100 years”। बता दें कि Shahrukh Khan के जन्मदिन के मौके पर सिर्फ भारत भर से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी फैंस जुटे। शाहरुख खान के फैन क्लबों ने जन्मदिन सप्ताह के रूप में मनाया, चैरिटी ड्राइव, विशेष बैनर आदि के माध्यम से ख़ास अंदाज़ से जश्न मनाया।
एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच दक्षिण कोरिया और ताइवान से दो महत्वपूर्ण खबरें सामने आई हैं। दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री ने अनुमान जताया है कि उत्तर कोरिया के पास 80 से 120 तक परमाणु हथियार हो सकते हैं। दूसरी ओर, ताइवान सरकार ने वर्ष 2027 के रक्षा बजट में 18 प्रतिशत बढ़ोतरी करने का प्रस्ताव रखा है। इन दोनों घटनाक्रमों को क्षेत्र में बदलते सुरक्षा समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है। उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों पर बड़ा अनुमान दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री आन ग्यू-बैक के अनुसार, उत्तर कोरिया के पास लगभग 80 से 120 परमाणु हथियार हो सकते हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अनुमान निजी अनुसंधान संस्थाओं के आंकड़ों पर आधारित है। दक्षिण कोरियाई सेना के पास उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों की सटीक संख्या की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करने की क्षमता नहीं है। दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया को आधिकारिक रूप से परमाणु हथियार संपन्न देश मानने से भी इनकार किया है। सियोल का कहना है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका की विस्तारित परमाणु सुरक्षा व्यवस्था पर निर्भर रहेगा। दक्षिण कोरिया ने अपने देश में अमेरिकी सामरिक परमाणु हथियारों की तैनाती का भी समर्थन नहीं किया है। उत्तर कोरिया पिछले कई वर्षों से अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम का लगातार विस्तार कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और कूटनीतिक दबाव के बावजूद प्योंगयांग ने कई मिसाइल परीक्षण किए हैं। इससे दक्षिण कोरिया, जापान और अमेरिका सहित अनेक देशों की चिंता बढ़ी हुई है। ताइवान का रक्षा बजट रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचेगा इस बीच ताइवान सरकार ने वर्ष 2027 के रक्षा बजट में 18 प्रतिशत बढ़ोतरी करने का औपचारिक प्रस्ताव रखा है। प्रस्तावित बजट लगभग 1.1225 ट्रिलियन ताइवानी डॉलर यानी करीब 31.41 अरब अमेरिकी डॉलर होगा। पहली बार ताइवान का रक्षा बजट एक ट्रिलियन ताइवानी डॉलर से ऊपर पहुंच सकता है। यह राशि ताइवान के सकल घरेलू उत्पाद के तीन प्रतिशत से अधिक होगी। इस बजट का उपयोग ड्रोन, मिसाइल, स्वदेशी पनडुब्बियों तथा अन्य आधुनिक सैन्य उपकरणों पर किए जाने की संभावना है। ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने बढ़ते रक्षा खर्च को शांति और राष्ट्रीय सुरक्षा में किया गया निवेश बताया है। ताइवान ने यह कदम ऐसे समय उठाया है, जब चीन की ओर से उस पर सैन्य और राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। चीन ताइवान को अपना क्षेत्र मानता है और आवश्यकता पड़ने पर बल प्रयोग की संभावना से इनकार नहीं करता। वहीं, ताइवान का कहना है कि उसके भविष्य का निर्णय केवल वहां की जनता को करना चाहिए। एशिया में बढ़ती हथियारों की प्रतिस्पर्धा उत्तर कोरिया के संभावित परमाणु हथियारों और ताइवान के रिकॉर्ड रक्षा बजट से संकेत मिलता है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सैन्य प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है। उत्तर कोरिया की परमाणु क्षमता कोरियाई प्रायद्वीप के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है, जबकि चीन और ताइवान के बीच तनाव पूरे क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। दोनों घटनाक्रम 20 अगस्त 2026 को सामने आए हैं। आने वाले समय में अमेरिका, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया की नीतियां इस क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
अमेरिका में रूस के खिलाफ एक बड़े प्रतिबंध विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद भारत के लिए व्यापारिक चिंता बढ़ गई है। अमेरिकी सीनेट ने शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 को Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 को 86–11 वोटों से पास कर दिया। इस विधेयक में उन देशों के खिलाफ कड़े आर्थिक कदम उठाने का प्रावधान है जो रूस से बड़ी मात्रा में तेल और गैस खरीदते हैं। भारत और चीन भी इस दायरे में आ सकते हैं। 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार इस विधेयक के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया जा सकता है, जो रूसी ऊर्जा पर अधिक निर्भर हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि भारत पर अभी 100 प्रतिशत टैरिफ लागू हो गया है। विधेयक राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि जरूरत पड़ने पर ऐसे देशों के खिलाफ टैरिफ लगाया जा सके। भारत के अलावा चीन, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया जैसे देशों का भी उल्लेख किया गया है। भारत क्यों आया निशाने पर? यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की खरीद की है। पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद रूस ने कई देशों को रियायती दरों पर कच्चा तेल बेचना शुरू किया था। भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरत और राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए रूस से तेल खरीद जारी रखी। इससे भारतीय रिफाइनरियों को अपेक्षाकृत सस्ता कच्चा तेल मिला और देश की ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने में मदद मिली। अमेरिकी सांसदों का तर्क है कि रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों के कारण मॉस्को को आर्थिक आय मिलती रहती है, जिसका इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में किया जा सकता है। क्या भारत पर तुरंत लगेगा 100% टैरिफ? फिलहाल ऐसा नहीं है। अमेरिकी सीनेट से बिल पास होना केवल एक महत्वपूर्ण चरण है। अब इस विधेयक को House of Representatives में भी मंजूरी लेनी होगी। इसके बाद ही इसे कानून बनने की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, हाउस में इस विधेयक को लेकर कुछ सांसदों की चिंताएं भी हैं। उनका कहना है कि अत्यधिक टैरिफ से अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ फिलहाल केवल एक संभावित खतरा है, लागू फैसला नहीं। भारत-अमेरिका व्यापार पर पड़ सकता है असर अगर भविष्य में भारत पर इतना बड़ा टैरिफ लगाया जाता है, तो अमेरिका को होने वाला भारतीय निर्यात महंगा हो सकता है। कपड़ा, इंजीनियरिंग सामान, ऑटो पार्ट्स, केमिकल और अन्य भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है। इसका प्रभाव दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों पर भी पड़ सकता है। भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच व्यापार लगातार बढ़ा है। अब सभी की नजर अमेरिकी House of Representatives पर रहेगी। अगर वहां भी विधेयक मंजूर हो जाता है, तो आगे राष्ट्रपति की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल भारत पर 100 प्रतिशत नया टैरिफ लागू नहीं हुआ है। इसलिए खबर को “भारत पर 100% टैरिफ लागू” कहने के बजाय “भारत पर 100% अमेरिकी टैरिफ का खतरा” कहना अधिक सही होगा।
दुनियाभर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमत में तेज उछाल देखने को मिला है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत कुछ समय के लिए 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। हालांकि, 24 जुलाई 2026 को शुरुआती कारोबार में कीमत थोड़ी नीचे भी आई, लेकिन यह अब भी लगभग 99 से 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है। अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI का भाव लगभग 91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। तेल की कीमत में यह बढ़ोतरी केवल मांग बढ़ने के कारण नहीं हुई है। इसके पीछे पश्चिम एशिया में जारी तनाव और समुद्री मार्गों से तेल की सप्लाई बाधित होने का डर प्रमुख कारण बताया जा रहा है। लाल सागर में तेल टैंकरों पर हमले रिपोर्टों के अनुसार, लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमले के बाद वैश्विक बाजार में चिंता बढ़ गई है। इन हमलों के कारण व्यापारियों को डर है कि तेल ले जाने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते हैं। यदि इन मार्गों पर खतरा बढ़ता है, तो तेल टैंकरों को अफ्रीका के चारों ओर से लंबा रास्ता अपनाना पड़ सकता है। इससे यात्रा का समय, बीमा खर्च और माल ढुलाई की लागत काफी बढ़ जाएगी। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी चिंता तेल बाजार पहले से ही होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान की आशंका का सामना कर रहा है। यह मार्ग पश्चिम एशिया से दुनिया के विभिन्न हिस्सों में कच्चा तेल पहुंचाने के सबसे महत्वपूर्ण रास्तों में शामिल है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। अब लाल सागर के रास्ते पर भी खतरा बढ़ने से बाजार को दो महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर सप्लाई बाधित होने का डर सता रहा है। इसी आशंका ने ब्रेंट क्रूड को दो महीने में पहली बार 100 डॉलर के स्तर के ऊपर पहुंचा दिया। भारत पर क्या होगा असर? भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने से भारत का आयात खर्च बढ़ सकता है। तेल खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर खर्च होने पर देश के व्यापार घाटे और रुपये पर भी दबाव पड़ सकता है। यदि कच्चे तेल की ऊंची कीमत लंबे समय तक बनी रहती है, तो पेट्रोलियम कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। इसका प्रभाव पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और विमान ईंधन की कीमतों पर दिखाई दे सकता है। हालांकि, पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें बढ़ेंगी या नहीं, इसका फैसला सरकार, तेल कंपनियों, टैक्स और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा। महंगाई बढ़ने का खतरा डीजल की कीमत बढ़ने पर ट्रक और अन्य मालवाहक वाहनों का खर्च बढ़ जाता है। इससे सब्जियों, फलों, दूध, अनाज और रोजमर्रा के सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना महंगा हो सकता है। कंपनियां बढ़ा हुआ परिवहन खर्च ग्राहकों से वसूल सकती हैं, जिससे बाजार में वस्तुओं की कीमत बढ़ने का खतरा रहता है। महंगा कच्चा तेल एयरलाइंस, प्लास्टिक, पेंट, केमिकल, सीमेंट और लॉजिस्टिक्स जैसे उद्योगों की लागत भी बढ़ा सकता है। वैश्विक स्तर पर तेल के 100 डॉलर तक पहुंचने से महंगाई दोबारा बढ़ने और आर्थिक विकास की गति धीमी होने की चिंता पैदा हो गई है। क्या कीमत 120 डॉलर तक जा सकती है? कुछ बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समुद्री रास्तों पर हमले जारी रहते हैं और तेल की सप्लाई में वास्तविक कमी आती है, तो ब्रेंट क्रूड की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। हालांकि, यह केवल एक संभावना है। तनाव कम होने, समुद्री रास्ते सुरक्षित होने या अन्य देशों द्वारा उत्पादन बढ़ाने पर कीमतों में गिरावट भी आ सकती है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर पश्चिम एशिया की स्थिति और तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही पर बनी हुई है। आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों की दिशा इन्हीं घटनाओं पर निर्भर करेगी।