अमेरिका में रूस के खिलाफ एक बड़े प्रतिबंध विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद भारत के लिए व्यापारिक चिंता बढ़ गई है। अमेरिकी सीनेट ने शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 को Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 को 86–11 वोटों से पास कर दिया। इस विधेयक में उन देशों के खिलाफ कड़े आर्थिक कदम उठाने का प्रावधान है जो रूस से बड़ी मात्रा में तेल और गैस खरीदते हैं। भारत और चीन भी इस दायरे में आ सकते हैं।
100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार
इस विधेयक के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया जा सकता है, जो रूसी ऊर्जा पर अधिक निर्भर हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि भारत पर अभी 100 प्रतिशत टैरिफ लागू हो गया है।
विधेयक राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि जरूरत पड़ने पर ऐसे देशों के खिलाफ टैरिफ लगाया जा सके। भारत के अलावा चीन, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया जैसे देशों का भी उल्लेख किया गया है।
भारत क्यों आया निशाने पर?
यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की खरीद की है। पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद रूस ने कई देशों को रियायती दरों पर कच्चा तेल बेचना शुरू किया था।
भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरत और राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए रूस से तेल खरीद जारी रखी। इससे भारतीय रिफाइनरियों को अपेक्षाकृत सस्ता कच्चा तेल मिला और देश की ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने में मदद मिली।
अमेरिकी सांसदों का तर्क है कि रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों के कारण मॉस्को को आर्थिक आय मिलती रहती है, जिसका इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में किया जा सकता है।
क्या भारत पर तुरंत लगेगा 100% टैरिफ?
फिलहाल ऐसा नहीं है। अमेरिकी सीनेट से बिल पास होना केवल एक महत्वपूर्ण चरण है। अब इस विधेयक को House of Representatives में भी मंजूरी लेनी होगी। इसके बाद ही इसे कानून बनने की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, हाउस में इस विधेयक को लेकर कुछ सांसदों की चिंताएं भी हैं। उनका कहना है कि अत्यधिक टैरिफ से अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं पर भी असर पड़ सकता है।
इसलिए भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ फिलहाल केवल एक संभावित खतरा है, लागू फैसला नहीं।
भारत-अमेरिका व्यापार पर पड़ सकता है असर
अगर भविष्य में भारत पर इतना बड़ा टैरिफ लगाया जाता है, तो अमेरिका को होने वाला भारतीय निर्यात महंगा हो सकता है। कपड़ा, इंजीनियरिंग सामान, ऑटो पार्ट्स, केमिकल और अन्य भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है।
इसका प्रभाव दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों पर भी पड़ सकता है। भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच व्यापार लगातार बढ़ा है।
अब सभी की नजर अमेरिकी House of Representatives पर रहेगी। अगर वहां भी विधेयक मंजूर हो जाता है, तो आगे राष्ट्रपति की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल भारत पर 100 प्रतिशत नया टैरिफ लागू नहीं हुआ है। इसलिए खबर को “भारत पर 100% टैरिफ लागू” कहने के बजाय “भारत पर 100% अमेरिकी टैरिफ का खतरा” कहना अधिक सही होगा।
Lucknow Desk: बिहार के मोकामा से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ चुनाव प्रचार के दौरान हमला किया गया। इस घटना में जानी-मानी हस्ती दुलारचंद यादव की हत्या हो गई है और आरोप लगाया गया है कि इस घटना में पूर्व विधायक अनंत सिंह के समर्थकों की भूमिका है। यह घटना आगामी विधानसभा चुनाव के बीच हुई है, जिससे राज्य में कानून-व्यवस्था और चुनावी हिंसा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अनंत सिंह समेत 5 नामजद मोकामा में दुलारचंद यादव की हत्या मामले में JDU प्रत्याशी बाहुबली अनंत सिंह समेत पांच लोगों पर केस दर्ज कर ली गई है। मृत दुलारचंद यादव के पोते के दिए गए बयान पर अनंत सिंह, दो भतीजों रणवीर सिंह, कर्मवीर सिंह, करीबी छोटन सिंह और कंजय सिंह पर नामजद और कई अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। यानी दुलारचंद यादव के परिजनों और जन सुराज पार्टी के समर्थकों ने सीधे तौर पर JDU उम्मीदवार और बाहुबली नेता अनंत सिंह के समर्थकों पर हत्या का आरोप लगाया है। अनंत सिंह ने आरोपों को किया खारिज वहीं इस बयान पर JDU उम्मीदवार अनंत सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे RJD उम्मीदवार वीणा देवी के पति बाहुबली सूरजभान सिंह की साजिश बताया है। अनंत सिंह ने कहा कि उनके काफिले पर विरोधियों ने हमला किया और यह सारा खेल सूरजभान सिंह करवा रहे हैं। कौन थे दुलारचंद यादव ? मोकामा के रहने वाले दुलारचंद यादव को ‘टाल का बादशाह’ कहा जाता था। दुलारचंद पहलवानी के साथ-साथ गाना गाने के भी शौकीन थे। उन्होंने जन सुराज के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के लिए एक गाना भी रिकॉर्ड करवाया था। माना जा रहा है कि मोकामा की चुनावी जंग अब व्यक्तिगत रंजिश और हिंसक टकराव की तरफ मुड़ गई है।
बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन एक बार फिर दादा होने का गर्व महसूस कर रहे हैं। दरअसल, उनके नाती अगस्त्य नंदा की अपकमिंग फिल्म ‘इक्कीस’ का ट्रेलर हाल ही में रिलीज़ हुआ है। ट्रेलर देखकर बिग बी इतने इमोशनल हो गए कि उन्होंने सोशल मीडिया पर एक दिल छू लेने वाला पोस्ट शेयर किया। अमिताभ ने अपने पोस्ट में लिखा, “ये तो बस शुरुआत है... गर्व है तुम्हारे इस सफर पर, मेरे बच्चे।” उनकी इस पोस्ट पर फैन्स और फिल्म इंडस्ट्री के सितारों ने जमकर प्यार लुटाया। ‘इक्कीस’ मेगास्टार मेघना गुलज़ार के निर्देशन में बनी है और इसमें अगस्त्य नंदा एक अहम किरदार निभा रहे हैं। फिल्म 1971 के युद्ध के हीरो अरुण खेत्रपाल की कहानी पर आधारित है, जो देश के सबसे युवा परमवीर चक्र विजेता थे। फिल्म के ट्रेलर में अगस्त्य का जोश और समर्पण देखकर फैन्स कह रहे हैं—“दादा की तरह नाती भी लाजवाब!” तो देखना दिलचस्प होगा कि क्या अगस्त्य अपनी पहली ही फिल्म से दादा अमिताभ की विरासत को आगे बढ़ा पाएंगे।
Lucknow Desk: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज बुधवार को भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान राफेल में उड़ान भरकर इतिहास रच दिया है। इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुखोई-3 MKI लड़ाकू विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। राष्ट्रपति की इस उड़ान ने आज भारतीय वायुसेना के साथ-साथ पूरे देश को गौरव से भर दिया है। बता दें, भारत का राष्ट्रपति तीनों सेनाओं की कमांडर होता है और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर मौजूद हैं। अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज सुबह अंबाला एयरबेस पहुंचीं, जहां वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह और वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। बता दें, राष्ट्रपति का यह उड़ान न केवल साहसिक नेतृत्व शैली का प्रतीक है, बल्कि भारत की बढ़ती रक्षा क्षमता और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को वैश्विक पटल पर मजबूती से प्रदर्शित करना भी है। फाइटर जेट में उड़ान भरने वाली दूसरी महिला राष्ट्रपति मुर्मू राष्ट्रपति मुर्मू ने फाइटर जेट की सवारी ये पहली बार नहीं की हैं। उन्होंने इससे पहले 8 अप्रैल 2023 को असम के तेजपुर एयरफोर्स स्टेशन से सुखोई-30 MKI फाइटर विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। वह फाइटर जेट उड़ाने वाली तीसरी राष्ट्रपति और दूसरी महिला राष्ट्राध्यक्ष बनी थीं। राष्ट्रपति मुर्मू ने से पहले पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और प्रतिभा पाटिल ने भी सुखोई-30 MKI में उड़ान भरी थी। राफेल लड़ाकू विमान का क्या है इतिहास? बता दें, राफेल लड़ाकू विमान फ्रांसीसी कंपनी दसॉ एविएशन द्वारा निर्मित किया गया है। सितंबर 2020 में अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर भारतीय वायुसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था। अंबाला एयरबेस राफेल स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरोज' का मुख्य केंद्र है। इन विमानों का इस्तेमाल हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान किया गया था, इसके माध्यम से आतंकवादी ठिकानों पर हमले कर अपनी ताकत को सैनियों ने दिखाया था।
Lucknow Desk: कैसरगंज के बीजेपी नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के हेलीकॉप्टर को धान के खेत में अचानक उतारना पड़ा। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि तकनीकी खराबी आने के बाद पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतारा, जहां हेलीकॉप्टर देखने के लिए ग्रामीण भी जुट गए। मिली जानकारी के मुताबिक, बृजभूषण शरण सिंह एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। उड़ान के कुछ ही मिनट बाद हेलीकॉप्टर में तकनीकी दिक्कत आने लगी। स्थिति को समझते हुए पायलट ने तुरंत इमरजेंसी लैंडिंग का फैसला लिया और नज़दीकी धान के खेत में हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतार दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। हेलीकॉप्टर की जांच के लिए टेक्निकल टीम बुलाई गई है। फिलहाल राहत की बात यह है कि बृजभूषण शरण सिंह और हेलीकॉप्टर में मौजूद सभी लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं। जांच के बाद ही तकनीकी खराबी की असली वजह पता चल पाएगी। इसी बीच पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर संदेश दिया। उन्होंने कहा, आज मेरा बिहार प्रदेश के अंदर संदेश व दिनारा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सभा का कार्यक्रम था। संदेश विधानसभा का कार्यक्रम करके मैं दिनारा विधानसभा के लिए हेलीकाप्टर से निकला था। अचानक मौसम खराब होने के कारण हेलीकाप्टर की सुरक्षित लैंडिंग एक खेत में करानी पड़ी। पायलट ने बड़ी सूझबूझ से लैंडिंग कराई। मैं, इस समय गाड़ी से पटना जा रहा हूं। किसी अफवाह में आने की जरूरत नहीं है। किसी प्रकार की कोई हानि नहीं हुई है। हम सभी पूर्णतया सुरक्षित हैं। हेलीकाप्टर की सुरक्षा का प्रबंध कर दिया गया है। प्रशासन व जनता का बहुत सहयोग रहा...धन्यवाद
Lucknow Desk: आज 02 नवंबर 2025 को बॉलीवुड के बादशाह Shahrukh Khan ने अपने 60वें जन्मदिन का जश्न मनाया। इस मौके पर उन्होंने अपने परिवार, करीबियों और फिल्म इंडस्ट्री के दोस्तों के साथ खुशियाँ बाँटी। उन्होंने अपने आलीशान घर के बजाय इस बार सार्वजनिक रूप से Mannat से बाहर नहीं दिखने का फैसला किया क्योंकि वहाँ फिलहाल निर्माण का काम चल रहा है। वहीँ, जश्न के लिए उन्होंने Alibaug में स्थित निजी स्थान चुना। एक विशेष फैन-मीट कार्यक्रम Balgandharva Rangmandir, बांद्रा में आयोजित किया गया था, जहाँ सीमित प्रवेश पास के माध्यम से प्रशंसक सीधे शामिल हुए। सोशल मीडिया पर सितारों ने बधाइयाँ दीं। जिसमें Farah Khan ने लिखा, “Happy birthday KING … rule for another 100 years”। बता दें कि Shahrukh Khan के जन्मदिन के मौके पर सिर्फ भारत भर से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी फैंस जुटे। शाहरुख खान के फैन क्लबों ने जन्मदिन सप्ताह के रूप में मनाया, चैरिटी ड्राइव, विशेष बैनर आदि के माध्यम से ख़ास अंदाज़ से जश्न मनाया।
थाईलैंड में एक स्कूल में हुई गोलीबारी की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। यह घटना 7 अगस्त 2026 को बैंकॉक के पास नोंथाबुरी प्रांत में हुई, जहां एक 14 वर्षीय किशोर पर अपने घर और बाद में स्कूल में गोलीबारी करने का आरोप है। इस घटना में कुल 7 लोगों की मौत हुई, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, किशोर ने पहले अपने घर पर अपने दादा-दादी को गोली मारी। इसके बाद वह हथियार लेकर अपने स्कूल पहुंचा और वहां भी फायरिंग शुरू कर दी। घटना के बाद स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई और छात्र, शिक्षक तथा कर्मचारी सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। स्कूल में मची अफरा-तफरी घटना के समय स्कूल में बड़ी संख्या में छात्र और शिक्षक मौजूद थे। अचानक गोली चलने की आवाज सुनते ही स्कूल प्रशासन ने आपात स्थिति की प्रक्रिया शुरू की। कई लोगों ने खुद को कक्षाओं और अन्य कमरों में बंद कर लिया। स्थानीय पुलिस और सुरक्षा बलों को सूचना मिलते ही स्कूल को चारों ओर से घेर लिया गया। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया गया, जहां कई लोगों का इलाज किया गया। रिपोर्ट्स में बताया गया कि इस गोलीबारी में 23 लोग घायल हुए। इनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई गई थी। घर से शुरू हुई थी घटना जांच में सामने आया कि हमला स्कूल से शुरू नहीं हुआ था। पुलिस के अनुसार, किशोर ने स्कूल जाने से पहले अपने घर पर अपने दादा-दादी को गोली मारी थी। इसके बाद वह स्कूल पहुंचा और वहां भी लोगों को निशाना बनाया। इस घटनाक्रम ने जांच एजेंसियों के सामने कई सवाल खड़े किए हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि किशोर के पास हथियार कैसे पहुंचा और उसने इतनी गंभीर घटना को अंजाम देने का फैसला क्यों किया। हमलावर ने खुद को भी गोली मारी पुलिस के अनुसार, स्कूल में गोलीबारी के बाद किशोर ने खुद को भी गोली मार ली। उसकी मौत के बाद पुलिस ने इलाके को सुरक्षित किया और पूरे स्कूल परिसर की तलाशी ली। जांच अधिकारी घटना से पहले किशोर की गतिविधियों, उसके डिजिटल रिकॉर्ड और उसके परिवार से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रहे हैं। अधिकारियों का उद्देश्य यह समझना है कि क्या हमले के पीछे कोई पूर्व योजना थी या यह घटना अचानक हुई। थाईलैंड में सुरक्षा को लेकर चिंता इस घटना के बाद थाईलैंड में स्कूल सुरक्षा और हथियारों की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है। स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों के बीच भी सवाल उठ रहे हैं। थाईलैंड में पहले भी गोलीबारी की गंभीर घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसी घटनाओं के बाद सरकार और प्रशासन पर हथियार नियंत्रण तथा स्कूल सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने का दबाव बढ़ जाता है। जांच जारी फिलहाल पुलिस इस मामले की विस्तृत जांच कर रही है। अधिकारी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि किशोर ने किन परिस्थितियों में हथियार हासिल किया और क्या किसी अन्य व्यक्ति को उसकी योजना के बारे में जानकारी थी। यह घटना थाईलैंड के लिए एक बड़ी त्रासदी बनकर सामने आई है। मृतकों के परिवारों और घायलों के प्रति संवेदना व्यक्त की जा रही है, जबकि प्रशासन ने लोगों से अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।
यूरोप के कई देश इस समय भीषण गर्मी और जंगलों में लगी आग के गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। फ्रांस और स्पेन में आग ने सबसे अधिक तबाही मचाई है। तेज हवा, लंबे समय से जारी सूखा और अत्यधिक तापमान के कारण आग तेजी से नए क्षेत्रों में फैल रही है। हालात को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित इलाकों से लाखों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। फ्रांस में स्थिति गंभीर फ्रांस के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से, विशेष रूप से गिरोंद और बोर्डो के आसपास के क्षेत्र, जंगल की आग से बुरी तरह प्रभावित हैं। कई स्थानों पर आग ने जंगलों के साथ-साथ घरों, खेतों और स्थानीय संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचाया है। रिपोर्टों के अनुसार, फ्रांस में एक लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि आग की चपेट में आ चुकी है। बड़ी संख्या में दमकलकर्मी, सैनिक और बचाव दल आग को नियंत्रित करने में जुटे हैं। आग से उठने वाले घने धुएं के कारण आसपास के क्षेत्रों की वायु गुणवत्ता भी खराब हो गई है। स्थानीय प्रशासन ने बच्चों, बुजुर्गों और सांस से जुड़ी बीमारी वाले लोगों को घरों में रहने तथा मास्क पहनने की सलाह दी है। कई सड़कें बंद कर दी गई हैं और लोगों को प्रभावित जंगलों के पास न जाने को कहा गया है। स्पेन में भी बड़े स्तर पर निकासी स्पेन में मैड्रिड, आविला और अन्य क्षेत्रों के पास जंगल की आग ने हजारों लोगों को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया है। आपातकालीन सेवाओं के साथ सेना की विशेष इकाइयों को भी राहत और बचाव कार्यों में लगाया गया है। प्रशासन का कहना है कि बढ़ता तापमान और बदलती हवा आग बुझाने के अभियान को कठिन बना रही है। फ्रांस और स्पेन को मिलाकर तीन लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए जाने की खबर है। कई परिवार अस्थायी राहत शिविरों में रह रहे हैं। आग के कारण पर्यटन, सड़क परिवहन, खेती और स्थानीय कारोबार भी प्रभावित हुए हैं। नई गर्मी की लहर का खतरा मौसम विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यूरोप के कुछ हिस्सों में तापमान दोबारा 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच सकता है। इससे सूखी घास और पेड़ों में आग फैलने का खतरा और बढ़ जाएगा। दमकल विभाग के लिए आने वाले दिन बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। यूरोपीय संघ ने प्रभावित देशों की सहायता के लिए विमान, हेलीकॉप्टर और दमकल दल उपलब्ध कराए हैं। पुर्तगाल, स्वीडन और अन्य देशों से भी मदद भेजी गई है। जलवायु परिवर्तन से बढ़ रही चुनौती विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार बढ़ता तापमान, कम बारिश और लंबे सूखे से जंगल की आग अधिक खतरनाक हो रही है। हालांकि हर आग का कारण सीधे जलवायु परिवर्तन नहीं होता, लेकिन गर्म और शुष्क परिस्थितियां आग को तेजी से फैलने में मदद करती हैं। यूरोप का यह संकट बताता है कि जंगलों की सुरक्षा, समय पर चेतावनी व्यवस्था, पर्याप्त दमकल संसाधन और जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए ठोस कदम उठाना बेहद आवश्यक हो गया है।
भारत ने बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच अपनी विदेश नीति को नई दिशा देते हुए इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी है। जापान, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया जैसे देशों के साथ बढ़ते रणनीतिक संबंधों को भारत की दीर्घकालिक कूटनीतिक रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि इन साझेदारियों से क्षेत्रीय संतुलन मजबूत हो सकता है और चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत की भूमिका और महत्वपूर्ण बन सकती है। इंडो-पैसिफिक पर भारत का बढ़ता फोकस हिंद-प्रशांत क्षेत्र आज वैश्विक व्यापार, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का प्रमुख केंद्र बन चुका है। भारत लगातार "मुक्त, खुला और समावेशी इंडो-पैसिफिक" की वकालत कर रहा है। इसका उद्देश्य समुद्री मार्गों की सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान और सभी देशों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना है। जापान, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया से बढ़ा सहयोग भारत ने हाल के समय में जापान, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया के साथ रक्षा, समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा, निवेश और महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals) जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया है। इन साझेदारियों का उद्देश्य केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि सुरक्षित और मजबूत सप्लाई चेन तैयार करना भी है। 'G Minus Two' रणनीति पर चर्चा हाल के दिनों में "G Minus Two" रणनीति की चर्चा तेज हुई है। इस अवधारणा के तहत भारत उन देशों के साथ सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहा है जो बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था और स्वतंत्र इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का समर्थन करते हैं। इसे अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के दौर में भारत की संतुलित कूटनीतिक नीति के रूप में देखा जा रहा है। महत्वपूर्ण खनिजों पर भी विशेष ध्यान सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा तकनीक और स्वच्छ ऊर्जा के लिए जरूरी रेयर अर्थ और क्रिटिकल मिनरल्स की वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है। भारत इन संसाधनों की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कई देशों के साथ समझौते और सहयोग बढ़ा रहा है ताकि किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता कम की जा सके। भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका पिछले कुछ वर्षों में भारत ने G20, क्वाड और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर सक्रिय भागीदारी निभाई है। विदेश नीति में संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए भारत एक साथ कई देशों के साथ रणनीतिक संबंध मजबूत कर रहा है। इससे वैश्विक मंच पर भारत की विश्वसनीयता और प्रभाव दोनों में वृद्धि देखने को मिल रही है। भारत की नई कूटनीतिक रणनीति का केंद्र सहयोग, क्षेत्रीय स्थिरता और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में मजबूत साझेदारियां भारत को आर्थिक, सामरिक और कूटनीतिक रूप से अधिक सक्षम बना सकती हैं। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय संबंध लगातार बदलते रहते हैं और भारत तथा चीन दोनों अपने-अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार नीतियां बनाते रहते हैं।