भारतीय मौसम विभाग ने अगस्त 2026 के दौरान देश में सामान्य से कम मानसूनी बारिश होने का अनुमान जताया है। मौसम विभाग ने यह पूर्वानुमान 31 जुलाई 2026 को जारी किया था। इसके अनुसार अगस्त में पूरे देश की औसत बारिश दीर्घावधि औसत यानी LPA के 94 प्रतिशत से कम रह सकती है। इस पूर्वानुमान ने किसानों, कृषि विशेषज्ञों और जल प्रबंधन से जुड़े विभागों की चिंता बढ़ा दी है।
अगस्त और सितंबर में भी कम बारिश की आशंका
मौसम विभाग ने केवल अगस्त ही नहीं, बल्कि अगस्त और सितंबर 2026 की संयुक्त अवधि के दौरान भी सामान्य से कम बारिश होने की संभावना जताई है। IMD के अनुसार अगस्त से सितंबर के बीच देश में होने वाली बारिश दीर्घावधि औसत के 94 प्रतिशत से कम रह सकती है।
वर्ष 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर अगस्त और सितंबर के दौरान पूरे देश की औसत बारिश लगभग 422.8 मिलीमीटर मानी जाती है। इस बार बारिश इससे कम रहने की आशंका जताई गई है। हालांकि देश के सभी हिस्सों में बारिश की स्थिति एक जैसी नहीं रहेगी। कुछ क्षेत्रों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश भी हो सकती है।
किन क्षेत्रों में कम बारिश की संभावना?
IMD के पूर्वानुमान के अनुसार देश के कई हिस्सों में अगस्त और सितंबर के दौरान सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। हालांकि प्रायद्वीपीय भारत, मध्य भारत, उत्तर-पश्चिम भारत के उत्तरी हिस्सों तथा पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है।
इसका अर्थ यह है कि राष्ट्रीय स्तर पर बारिश कम रहने के बावजूद कुछ राज्यों में भारी बारिश या बाढ़ जैसी स्थिति भी बन सकती है। मानसून की बारिश का वितरण असमान रहने से कहीं सूखे जैसी स्थिति और कहीं अत्यधिक वर्षा का सामना करना पड़ सकता है।
खरीफ फसलों पर पड़ सकता है असर
अगस्त का महीना खरीफ फसलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। धान, मक्का, सोयाबीन, कपास, बाजरा और दाल जैसी फसलों को इस समय पर्याप्त पानी की आवश्यकता होती है। यदि अगस्त में लंबे समय तक बारिश नहीं होती है तो खेतों में नमी कम हो सकती है और फसलों की वृद्धि प्रभावित हो सकती है।
जिन किसानों के पास सिंचाई की पर्याप्त सुविधा नहीं है, उनके लिए कम बारिश अधिक परेशानी पैदा कर सकती है। बारिश की कमी से दोबारा सिंचाई करने का खर्च बढ़ सकता है। इसका असर किसानों की उत्पादन लागत और फसलों की पैदावार पर भी पड़ने की आशंका है।
रिपोर्ट के अनुसार जून के अंत तक गर्मी के मौसम की फसलों की बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत पीछे थी। जुलाई में बारिश सुधरने के बाद यह अंतर घटकर पांच प्रतिशत से कम रह गया। इसके बावजूद अगस्त में कम बारिश होने पर हाल में बोई गई फसलों पर दबाव बढ़ सकता है।
जुलाई में सामान्य रही मानसूनी बारिश
जुलाई 2026 के दौरान देश में मानसूनी बारिश लगभग सामान्य रही। रिपोर्ट के अनुसार जुलाई की बारिश दीर्घावधि औसत से करीब एक प्रतिशत अधिक दर्ज की गई। इससे जून में बनी बारिश की कमी को कुछ हद तक पूरा करने और खरीफ फसलों की बुवाई तेज करने में मदद मिली।
हालांकि जुलाई में बारिश अच्छी रहने के बाद भी मौसम विभाग ने अगस्त को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है। लगातार कई दिनों तक बारिश नहीं होने या बारिश के असमान वितरण से कृषि गतिविधियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
जलाशयों और पानी की उपलब्धता पर असर
भारत में मानसून की बारिश खेती के साथ-साथ नदियों, तालाबों, बांधों और भूजल स्तर के लिए भी महत्वपूर्ण होती है। देश की वार्षिक बारिश का बड़ा हिस्सा दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान प्राप्त होता है।
यदि अगस्त और सितंबर में बारिश सामान्य से कम रहती है तो कुछ क्षेत्रों में जलाशयों का जलस्तर अपेक्षा के अनुसार नहीं बढ़ पाएगा। इससे आने वाले महीनों में सिंचाई, पेयजल और बिजली उत्पादन के लिए पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
अल नीनो को माना जा रहा प्रमुख कारण
इस बार मानसून कमजोर रहने के पीछे अल नीनो की परिस्थितियों को भी एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। अल नीनो के दौरान प्रशांत महासागर के पानी का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है, जिसका असर भारत सहित कई देशों के मौसम पर पड़ता है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अल नीनो की स्थिति मजबूत होने पर भारत में मानसूनी बारिश कमजोर या असमान हो सकती है। हालांकि इसका प्रभाव हर क्षेत्र और हर वर्ष समान नहीं होता।
कुल मिलाकर अगस्त में सामान्य से कम बारिश का अनुमान किसानों और जल प्रबंधन विभागों के लिए चिंता का विषय है। आने वाले दिनों में बारिश का वास्तविक वितरण कैसा रहता है, इस पर खरीफ फसलों की पैदावार, जलाशयों की स्थिति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था काफी हद तक निर्भर करेगी।
Lucknow Desk: बिहार के मोकामा से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ चुनाव प्रचार के दौरान हमला किया गया। इस घटना में जानी-मानी हस्ती दुलारचंद यादव की हत्या हो गई है और आरोप लगाया गया है कि इस घटना में पूर्व विधायक अनंत सिंह के समर्थकों की भूमिका है। यह घटना आगामी विधानसभा चुनाव के बीच हुई है, जिससे राज्य में कानून-व्यवस्था और चुनावी हिंसा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अनंत सिंह समेत 5 नामजद मोकामा में दुलारचंद यादव की हत्या मामले में JDU प्रत्याशी बाहुबली अनंत सिंह समेत पांच लोगों पर केस दर्ज कर ली गई है। मृत दुलारचंद यादव के पोते के दिए गए बयान पर अनंत सिंह, दो भतीजों रणवीर सिंह, कर्मवीर सिंह, करीबी छोटन सिंह और कंजय सिंह पर नामजद और कई अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। यानी दुलारचंद यादव के परिजनों और जन सुराज पार्टी के समर्थकों ने सीधे तौर पर JDU उम्मीदवार और बाहुबली नेता अनंत सिंह के समर्थकों पर हत्या का आरोप लगाया है। अनंत सिंह ने आरोपों को किया खारिज वहीं इस बयान पर JDU उम्मीदवार अनंत सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे RJD उम्मीदवार वीणा देवी के पति बाहुबली सूरजभान सिंह की साजिश बताया है। अनंत सिंह ने कहा कि उनके काफिले पर विरोधियों ने हमला किया और यह सारा खेल सूरजभान सिंह करवा रहे हैं। कौन थे दुलारचंद यादव ? मोकामा के रहने वाले दुलारचंद यादव को ‘टाल का बादशाह’ कहा जाता था। दुलारचंद पहलवानी के साथ-साथ गाना गाने के भी शौकीन थे। उन्होंने जन सुराज के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के लिए एक गाना भी रिकॉर्ड करवाया था। माना जा रहा है कि मोकामा की चुनावी जंग अब व्यक्तिगत रंजिश और हिंसक टकराव की तरफ मुड़ गई है।
बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन एक बार फिर दादा होने का गर्व महसूस कर रहे हैं। दरअसल, उनके नाती अगस्त्य नंदा की अपकमिंग फिल्म ‘इक्कीस’ का ट्रेलर हाल ही में रिलीज़ हुआ है। ट्रेलर देखकर बिग बी इतने इमोशनल हो गए कि उन्होंने सोशल मीडिया पर एक दिल छू लेने वाला पोस्ट शेयर किया। अमिताभ ने अपने पोस्ट में लिखा, “ये तो बस शुरुआत है... गर्व है तुम्हारे इस सफर पर, मेरे बच्चे।” उनकी इस पोस्ट पर फैन्स और फिल्म इंडस्ट्री के सितारों ने जमकर प्यार लुटाया। ‘इक्कीस’ मेगास्टार मेघना गुलज़ार के निर्देशन में बनी है और इसमें अगस्त्य नंदा एक अहम किरदार निभा रहे हैं। फिल्म 1971 के युद्ध के हीरो अरुण खेत्रपाल की कहानी पर आधारित है, जो देश के सबसे युवा परमवीर चक्र विजेता थे। फिल्म के ट्रेलर में अगस्त्य का जोश और समर्पण देखकर फैन्स कह रहे हैं—“दादा की तरह नाती भी लाजवाब!” तो देखना दिलचस्प होगा कि क्या अगस्त्य अपनी पहली ही फिल्म से दादा अमिताभ की विरासत को आगे बढ़ा पाएंगे।
Lucknow Desk: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज बुधवार को भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान राफेल में उड़ान भरकर इतिहास रच दिया है। इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुखोई-3 MKI लड़ाकू विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। राष्ट्रपति की इस उड़ान ने आज भारतीय वायुसेना के साथ-साथ पूरे देश को गौरव से भर दिया है। बता दें, भारत का राष्ट्रपति तीनों सेनाओं की कमांडर होता है और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर मौजूद हैं। अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज सुबह अंबाला एयरबेस पहुंचीं, जहां वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह और वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। बता दें, राष्ट्रपति का यह उड़ान न केवल साहसिक नेतृत्व शैली का प्रतीक है, बल्कि भारत की बढ़ती रक्षा क्षमता और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को वैश्विक पटल पर मजबूती से प्रदर्शित करना भी है। फाइटर जेट में उड़ान भरने वाली दूसरी महिला राष्ट्रपति मुर्मू राष्ट्रपति मुर्मू ने फाइटर जेट की सवारी ये पहली बार नहीं की हैं। उन्होंने इससे पहले 8 अप्रैल 2023 को असम के तेजपुर एयरफोर्स स्टेशन से सुखोई-30 MKI फाइटर विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। वह फाइटर जेट उड़ाने वाली तीसरी राष्ट्रपति और दूसरी महिला राष्ट्राध्यक्ष बनी थीं। राष्ट्रपति मुर्मू ने से पहले पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और प्रतिभा पाटिल ने भी सुखोई-30 MKI में उड़ान भरी थी। राफेल लड़ाकू विमान का क्या है इतिहास? बता दें, राफेल लड़ाकू विमान फ्रांसीसी कंपनी दसॉ एविएशन द्वारा निर्मित किया गया है। सितंबर 2020 में अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर भारतीय वायुसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था। अंबाला एयरबेस राफेल स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरोज' का मुख्य केंद्र है। इन विमानों का इस्तेमाल हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान किया गया था, इसके माध्यम से आतंकवादी ठिकानों पर हमले कर अपनी ताकत को सैनियों ने दिखाया था।
Lucknow Desk: कैसरगंज के बीजेपी नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के हेलीकॉप्टर को धान के खेत में अचानक उतारना पड़ा। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि तकनीकी खराबी आने के बाद पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतारा, जहां हेलीकॉप्टर देखने के लिए ग्रामीण भी जुट गए। मिली जानकारी के मुताबिक, बृजभूषण शरण सिंह एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। उड़ान के कुछ ही मिनट बाद हेलीकॉप्टर में तकनीकी दिक्कत आने लगी। स्थिति को समझते हुए पायलट ने तुरंत इमरजेंसी लैंडिंग का फैसला लिया और नज़दीकी धान के खेत में हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतार दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। हेलीकॉप्टर की जांच के लिए टेक्निकल टीम बुलाई गई है। फिलहाल राहत की बात यह है कि बृजभूषण शरण सिंह और हेलीकॉप्टर में मौजूद सभी लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं। जांच के बाद ही तकनीकी खराबी की असली वजह पता चल पाएगी। इसी बीच पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर संदेश दिया। उन्होंने कहा, आज मेरा बिहार प्रदेश के अंदर संदेश व दिनारा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सभा का कार्यक्रम था। संदेश विधानसभा का कार्यक्रम करके मैं दिनारा विधानसभा के लिए हेलीकाप्टर से निकला था। अचानक मौसम खराब होने के कारण हेलीकाप्टर की सुरक्षित लैंडिंग एक खेत में करानी पड़ी। पायलट ने बड़ी सूझबूझ से लैंडिंग कराई। मैं, इस समय गाड़ी से पटना जा रहा हूं। किसी अफवाह में आने की जरूरत नहीं है। किसी प्रकार की कोई हानि नहीं हुई है। हम सभी पूर्णतया सुरक्षित हैं। हेलीकाप्टर की सुरक्षा का प्रबंध कर दिया गया है। प्रशासन व जनता का बहुत सहयोग रहा...धन्यवाद
Lucknow Desk: आज 02 नवंबर 2025 को बॉलीवुड के बादशाह Shahrukh Khan ने अपने 60वें जन्मदिन का जश्न मनाया। इस मौके पर उन्होंने अपने परिवार, करीबियों और फिल्म इंडस्ट्री के दोस्तों के साथ खुशियाँ बाँटी। उन्होंने अपने आलीशान घर के बजाय इस बार सार्वजनिक रूप से Mannat से बाहर नहीं दिखने का फैसला किया क्योंकि वहाँ फिलहाल निर्माण का काम चल रहा है। वहीँ, जश्न के लिए उन्होंने Alibaug में स्थित निजी स्थान चुना। एक विशेष फैन-मीट कार्यक्रम Balgandharva Rangmandir, बांद्रा में आयोजित किया गया था, जहाँ सीमित प्रवेश पास के माध्यम से प्रशंसक सीधे शामिल हुए। सोशल मीडिया पर सितारों ने बधाइयाँ दीं। जिसमें Farah Khan ने लिखा, “Happy birthday KING … rule for another 100 years”। बता दें कि Shahrukh Khan के जन्मदिन के मौके पर सिर्फ भारत भर से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी फैंस जुटे। शाहरुख खान के फैन क्लबों ने जन्मदिन सप्ताह के रूप में मनाया, चैरिटी ड्राइव, विशेष बैनर आदि के माध्यम से ख़ास अंदाज़ से जश्न मनाया।
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में खराब मौसम और लगातार हो रही बारिश को देखते हुए आदि कैलाश यात्रा का दूसरा चरण स्थगित कर दिया गया है। यह चरण पहले 15 सितंबर से शुरू होना था, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने यात्रा को अब 20 सितंबर तक टालने का निर्णय लिया है। कई जगह सड़क मार्ग प्रभावित पिथौरागढ़ के सीमांत इलाकों में बारिश के कारण कई स्थानों पर भूस्खलन और मलबा आने की स्थिति बनी हुई है। पहाड़ी मार्गों पर पत्थर और बोल्डर गिरने से यातायात प्रभावित हो रहा है। आदि कैलाश यात्रा के प्रमुख मार्गों पर भी मौसम का असर देखा गया है। ऐसे में यात्रियों की आवाजाही को सुरक्षित बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। धार्मिक यात्रा का विशेष महत्व आदि कैलाश उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों में से एक है। हर साल देश के अलग-अलग राज्यों से श्रद्धालु यहां भगवान शिव के दर्शन और धार्मिक यात्रा के लिए पहुंचते हैं। आदि कैलाश के साथ आसपास के कई धार्मिक स्थलों की यात्रा भी इस यात्रा का हिस्सा होती है। यात्रियों की सुरक्षा बनी प्राथमिकता प्रशासन ने खराब मौसम के बीच यात्रा शुरू करने के बजाय यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम अचानक बदल सकता है और भारी बारिश के दौरान भूस्खलन की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में यात्रा को कुछ दिनों के लिए रोकना सुरक्षा की दृष्टि से जरूरी माना गया है। 20 सितंबर तक इंतजार आदि कैलाश यात्रा का दूसरा चरण अब 20 सितंबर तक स्थगित रहेगा। इसके बाद मौसम और सड़क की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। परिस्थितियां अनुकूल रहने पर यात्रा को दोबारा शुरू करने की अनुमति दी जा सकती है। प्रशासन मौसम की स्थिति और यात्रा मार्गों पर लगातार नजर बनाए हुए है। यात्रियों से सावधानी बरतने की अपील प्रशासन की ओर से यात्रियों से अपील की गई है कि वे आधिकारिक निर्देशों का पालन करें और बिना अनुमति के जोखिम वाले पहाड़ी क्षेत्रों में जाने से बचें। यात्रा की नई तारीख और आगे की व्यवस्था के संबंध में जानकारी प्रशासन की ओर से दी जाएगी। मौसम सामान्य होने का इंतजार फिलहाल श्रद्धालुओं को मौसम में सुधार और प्रशासन के अगले निर्देश का इंतजार करना होगा। आदि कैलाश जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सुरक्षित यात्रा के लिए मौसम और सड़क की स्थिति सामान्य होना बेहद जरूरी है। 20 सितंबर के बाद परिस्थितियों के आधार पर यात्रा को लेकर अगला फैसला लिया जाएगा।
उत्तर प्रदेश में सितंबर के महीने में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। शुक्रवार, 4 सितंबर को प्रदेश के कई इलाकों में बादल छाए रहने के साथ बारिश और गरज-चमक की स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले दिनों में भी प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। इससे तापमान में उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा और लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। कई इलाकों में बारिश का असर यूपी के पश्चिमी हिस्सों में आज बारिश की गतिविधियां तेज रहने की संभावना है। कुछ स्थानों पर भारी बारिश भी हो सकती है। इसके साथ ही गरज-चमक और तेज हवा चलने की स्थिति बन सकती है। लगातार बारिश वाले क्षेत्रों में सड़कों पर पानी जमा होने से लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। पूर्वांचल में भी बढ़ सकती है बारिश प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में आने वाले दिनों में बारिश का दौर और सक्रिय हो सकता है। कई जिलों में बादल छाए रहने और रुक-रुककर बारिश होने की संभावना है। पूर्वांचल के कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश की स्थिति बनने पर निचले इलाकों में जलभराव की समस्या बढ़ सकती है। लखनऊ समेत कई शहरों में बदला मौसम राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के कई शहरों में मौसम में बदलाव महसूस किया जा रहा है। बारिश के बाद तापमान में थोड़ी गिरावट आने से दिन की गर्मी से राहत मिल सकती है। हालांकि वातावरण में नमी अधिक होने के कारण बारिश रुकने के बाद उमस परेशान कर सकती है। किसानों के लिए बारिश महत्वपूर्ण सितंबर में होने वाली बारिश किसानों के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। खेतों में खड़ी फसलों को बारिश से फायदा मिल सकता है। हालांकि बहुत ज्यादा बारिश होने पर खेतों में पानी जमा होने से फसलों को नुकसान भी पहुंच सकता है। इसलिए किसानों को स्थानीय मौसम की जानकारी देखते हुए सिंचाई और अन्य कृषि कार्य करने की सलाह दी जाती है। बिजली और तेज हवा से रहें सावधान बारिश के साथ बिजली चमकने और तेज हवा की संभावना वाले इलाकों में लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। गरज-चमक के दौरान खुले मैदान, पेड़ और बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचना जरूरी है। वाहन चलाने वाले लोगों को भी बारिश के समय गति कम रखने और पानी भरी सड़कों पर सावधानी से चलने की जरूरत है। अगले कुछ दिनों तक जारी रह सकता है मौसम का बदलाव मौसम विभाग के अनुसार उत्तर प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक बारिश की गतिविधियां बनी रह सकती हैं। पश्चिमी हिस्सों में पहले बारिश का असर अधिक देखने को मिल सकता है, जबकि पूर्वी हिस्सों में भी बाद में बारिश बढ़ने की संभावना है। कुल मिलाकर यूपी में फिलहाल मौसम पूरी तरह साफ होने के संकेत नहीं हैं। कई इलाकों में बारिश लोगों को गर्मी से राहत देगी, लेकिन भारी बारिश वाले क्षेत्रों में जलभराव और यातायात जैसी समस्याएं परेशानी बढ़ा सकती हैं। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देना चाहिए और खराब मौसम के दौरान जरूरी सावधानी बरतनी चाहिए।
देश के कई हिस्सों में मानसून की गतिविधियां एक बार फिर तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। 27 अगस्त 2026 को मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले दिनों में कई राज्यों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। उत्तर प्रदेश और बिहार समेत उत्तर भारत के कई इलाकों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना जताई गई है। कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश भी हो सकती है। यूपी में बारिश की संभावना उत्तर प्रदेश में मानसून सक्रिय रहने के कारण आज कई जिलों में बादल छाए रहने और बारिश होने की संभावना है। कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज बारिश हो सकती है। लगातार बारिश वाले क्षेत्रों में जलभराव की समस्या सामने आ सकती है। प्रशासन को निचले इलाकों और जलभराव वाले स्थानों पर निगरानी रखने की जरूरत है। बिहार में भी मौसम बदलेगा बिहार में भी अगले कुछ दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि कुछ इलाकों में तेज बारिश के साथ आंधी और बिजली चमकने की स्थिति बन सकती है। मौसम विभाग ने लोगों को स्थानीय मौसम चेतावनियों पर ध्यान देने की सलाह दी है। कई राज्यों में मानसून सक्रिय मौसम विभाग के अनुसार 26 अगस्त से 1 सितंबर के बीच देश के कई हिस्सों में मानसून की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। पूर्वी और मध्य भारत के अलावा हिमालयी क्षेत्रों और पूर्वोत्तर राज्यों में भी बारिश की संभावना बनी हुई है। पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के कारण भूस्खलन और सड़क मार्ग प्रभावित होने का खतरा रह सकता है। तेज हवाओं और बिजली से सावधानी बारिश के साथ कुछ स्थानों पर तेज हवाएं और गरज-चमक की स्थिति बन सकती है। बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए लोगों को खुले मैदानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के पास जाने से बचना चाहिए। खराब मौसम के दौरान जरूरी न होने पर यात्रा टालना भी बेहतर रहेगा। नदियों और निचले इलाकों पर नजर लगातार बारिश के कारण नदियों और जलाशयों के जलस्तर में बढ़ोतरी हो सकती है। उत्तर प्रदेश और बिहार के नदी किनारे रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। नेपाल में हाल की भारी बारिश के बाद गंडक जैसी नदियों के जलस्तर पर भी प्रशासन नजर बनाए हुए है। किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण मानसून की बारिश खरीफ फसलों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है, लेकिन अत्यधिक बारिश खेतों में जलभराव की समस्या पैदा कर सकती है। किसानों को स्थानीय मौसम पूर्वानुमान देखते हुए फसलों की देखभाल और जल निकासी की व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए। फिलहाल 27 अगस्त 2026 का मौसम अपडेट बताता है कि मानसून कई क्षेत्रों में सक्रिय बना हुआ है। आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं, इसलिए लोगों को मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों पर नजर रखनी चाहिए।