31 जुलाई 2026 को दिल्ली में CJP आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। दिल्ली सरकार ने पुलिस को CJP के प्रदर्शन के दौरान दर्ज किए गए 13 मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है। ये मामले 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद की ओर निकाले गए ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान हुई हिंसा, अव्यवस्था और पुलिस से टकराव के संबंध में दर्ज किए गए थे।
हालांकि, यह राहत सभी प्रदर्शनकारियों को नहीं मिलेगी। दिल्ली सरकार के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जिन लोगों का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड है या जिनकी भूमिका गंभीर अपराधों में पाई गई है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रह सकती है। सामान्य और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई प्रतिकूल कानूनी कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया गया है।
20 जुलाई के प्रदर्शन के बाद दर्ज हुई थीं FIR
CJP ने परीक्षा पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में कथित भ्रष्टाचार और छात्रों की समस्याओं को लेकर दिल्ली में लंबे समय तक आंदोलन किया था। 20 जुलाई को बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर जमा हुए और संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेड लगाए थे।
इसके बाद कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया था। इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन से संबंधित हिंसा और अन्य घटनाओं को लेकर 13 FIR दर्ज की थीं।
गिरफ्तार लोगों के मामलों की होगी समीक्षा
दिल्ली सरकार के गृह विभाग ने पुलिस को निर्देश दिया है कि इन मामलों में पहले से गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए लोगों की स्थिति की जल्द समीक्षा की जाए। जिन लोगों के खिलाफ कोई गंभीर आरोप या पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उनकी रिहाई की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा सकती है।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी विभिन्न राज्यों से कहा था कि CJP आंदोलन के दौरान हिरासत में लिए गए ऐसे प्रदर्शनकारियों को रिहा किया जाए, जिनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। अदालत ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को महत्वपूर्ण बताते हुए पुलिस कार्रवाई की समीक्षा करने की आवश्यकता पर जोर दिया था।
FIR वापस लेने की कानूनी प्रक्रिया जरूरी
दिल्ली सरकार के आदेश के बाद भी मुकदमे तुरंत समाप्त नहीं माने जाएंगे। FIR वापस लेने के लिए पुलिस और सरकारी वकीलों को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। जिन मामलों में अदालत में आरोपपत्र दाखिल हो चुका है, उनमें मुकदमा वापस लेने के लिए अदालत की अनुमति भी आवश्यक हो सकती है।
इसलिए “दिल्ली पुलिस ने सभी मुकदमे खत्म कर दिए” लिखना अभी पूरी तरह सही नहीं होगा। सही स्थिति यह है कि दिल्ली सरकार ने 13 FIR वापस लेने का आदेश दिया है और दिल्ली पुलिस कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई करेगी।
CJP ने औपचारिक वापसी की मांग की
CJP ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है, लेकिन संगठन ने कहा है कि केवल मामलों को बंद करने का आश्वासन पर्याप्त नहीं है। CJP नेता सौरव दास ने मांग की है कि सभी संबंधित FIR को औपचारिक रूप से वापस लिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार समझौते के अनुसार कार्रवाई नहीं करती है, तो संगठन दोबारा सड़कों पर उतर सकता है।
CJP का कहना है कि आंदोलन समाप्त करते समय सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने और भविष्य में सामान्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन दिया था। हालांकि, आपराधिक पृष्ठभूमि वाले और हिंसक घटनाओं में शामिल लोगों के मामले अलग रखे गए हैं।
प्रदर्शनकारियों के लिए बड़ी राहत
दिल्ली सरकार का यह फैसला उन छात्रों, युवाओं और सामान्य नागरिकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जो आंदोलन में शामिल हुए थे। सरकार का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को कानूनी परेशानियों से बचाया जाएगा, लेकिन हिंसा या गंभीर अपराध में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि दिल्ली पुलिस 13 FIR वापस लेने की कानूनी प्रक्रिया कितनी जल्दी पूरी करती है और गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों की समीक्षा के बाद कितने लोगों को राहत मिलती है।
Lucknow Desk: बिहार के मोकामा से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ चुनाव प्रचार के दौरान हमला किया गया। इस घटना में जानी-मानी हस्ती दुलारचंद यादव की हत्या हो गई है और आरोप लगाया गया है कि इस घटना में पूर्व विधायक अनंत सिंह के समर्थकों की भूमिका है। यह घटना आगामी विधानसभा चुनाव के बीच हुई है, जिससे राज्य में कानून-व्यवस्था और चुनावी हिंसा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अनंत सिंह समेत 5 नामजद मोकामा में दुलारचंद यादव की हत्या मामले में JDU प्रत्याशी बाहुबली अनंत सिंह समेत पांच लोगों पर केस दर्ज कर ली गई है। मृत दुलारचंद यादव के पोते के दिए गए बयान पर अनंत सिंह, दो भतीजों रणवीर सिंह, कर्मवीर सिंह, करीबी छोटन सिंह और कंजय सिंह पर नामजद और कई अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। यानी दुलारचंद यादव के परिजनों और जन सुराज पार्टी के समर्थकों ने सीधे तौर पर JDU उम्मीदवार और बाहुबली नेता अनंत सिंह के समर्थकों पर हत्या का आरोप लगाया है। अनंत सिंह ने आरोपों को किया खारिज वहीं इस बयान पर JDU उम्मीदवार अनंत सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे RJD उम्मीदवार वीणा देवी के पति बाहुबली सूरजभान सिंह की साजिश बताया है। अनंत सिंह ने कहा कि उनके काफिले पर विरोधियों ने हमला किया और यह सारा खेल सूरजभान सिंह करवा रहे हैं। कौन थे दुलारचंद यादव ? मोकामा के रहने वाले दुलारचंद यादव को ‘टाल का बादशाह’ कहा जाता था। दुलारचंद पहलवानी के साथ-साथ गाना गाने के भी शौकीन थे। उन्होंने जन सुराज के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के लिए एक गाना भी रिकॉर्ड करवाया था। माना जा रहा है कि मोकामा की चुनावी जंग अब व्यक्तिगत रंजिश और हिंसक टकराव की तरफ मुड़ गई है।
बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन एक बार फिर दादा होने का गर्व महसूस कर रहे हैं। दरअसल, उनके नाती अगस्त्य नंदा की अपकमिंग फिल्म ‘इक्कीस’ का ट्रेलर हाल ही में रिलीज़ हुआ है। ट्रेलर देखकर बिग बी इतने इमोशनल हो गए कि उन्होंने सोशल मीडिया पर एक दिल छू लेने वाला पोस्ट शेयर किया। अमिताभ ने अपने पोस्ट में लिखा, “ये तो बस शुरुआत है... गर्व है तुम्हारे इस सफर पर, मेरे बच्चे।” उनकी इस पोस्ट पर फैन्स और फिल्म इंडस्ट्री के सितारों ने जमकर प्यार लुटाया। ‘इक्कीस’ मेगास्टार मेघना गुलज़ार के निर्देशन में बनी है और इसमें अगस्त्य नंदा एक अहम किरदार निभा रहे हैं। फिल्म 1971 के युद्ध के हीरो अरुण खेत्रपाल की कहानी पर आधारित है, जो देश के सबसे युवा परमवीर चक्र विजेता थे। फिल्म के ट्रेलर में अगस्त्य का जोश और समर्पण देखकर फैन्स कह रहे हैं—“दादा की तरह नाती भी लाजवाब!” तो देखना दिलचस्प होगा कि क्या अगस्त्य अपनी पहली ही फिल्म से दादा अमिताभ की विरासत को आगे बढ़ा पाएंगे।
Lucknow Desk: कैसरगंज के बीजेपी नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के हेलीकॉप्टर को धान के खेत में अचानक उतारना पड़ा। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि तकनीकी खराबी आने के बाद पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतारा, जहां हेलीकॉप्टर देखने के लिए ग्रामीण भी जुट गए। मिली जानकारी के मुताबिक, बृजभूषण शरण सिंह एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। उड़ान के कुछ ही मिनट बाद हेलीकॉप्टर में तकनीकी दिक्कत आने लगी। स्थिति को समझते हुए पायलट ने तुरंत इमरजेंसी लैंडिंग का फैसला लिया और नज़दीकी धान के खेत में हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतार दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। हेलीकॉप्टर की जांच के लिए टेक्निकल टीम बुलाई गई है। फिलहाल राहत की बात यह है कि बृजभूषण शरण सिंह और हेलीकॉप्टर में मौजूद सभी लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं। जांच के बाद ही तकनीकी खराबी की असली वजह पता चल पाएगी। इसी बीच पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर संदेश दिया। उन्होंने कहा, आज मेरा बिहार प्रदेश के अंदर संदेश व दिनारा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सभा का कार्यक्रम था। संदेश विधानसभा का कार्यक्रम करके मैं दिनारा विधानसभा के लिए हेलीकाप्टर से निकला था। अचानक मौसम खराब होने के कारण हेलीकाप्टर की सुरक्षित लैंडिंग एक खेत में करानी पड़ी। पायलट ने बड़ी सूझबूझ से लैंडिंग कराई। मैं, इस समय गाड़ी से पटना जा रहा हूं। किसी अफवाह में आने की जरूरत नहीं है। किसी प्रकार की कोई हानि नहीं हुई है। हम सभी पूर्णतया सुरक्षित हैं। हेलीकाप्टर की सुरक्षा का प्रबंध कर दिया गया है। प्रशासन व जनता का बहुत सहयोग रहा...धन्यवाद
Lucknow Desk: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज बुधवार को भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान राफेल में उड़ान भरकर इतिहास रच दिया है। इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुखोई-3 MKI लड़ाकू विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। राष्ट्रपति की इस उड़ान ने आज भारतीय वायुसेना के साथ-साथ पूरे देश को गौरव से भर दिया है। बता दें, भारत का राष्ट्रपति तीनों सेनाओं की कमांडर होता है और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर मौजूद हैं। अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज सुबह अंबाला एयरबेस पहुंचीं, जहां वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह और वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। बता दें, राष्ट्रपति का यह उड़ान न केवल साहसिक नेतृत्व शैली का प्रतीक है, बल्कि भारत की बढ़ती रक्षा क्षमता और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को वैश्विक पटल पर मजबूती से प्रदर्शित करना भी है। फाइटर जेट में उड़ान भरने वाली दूसरी महिला राष्ट्रपति मुर्मू राष्ट्रपति मुर्मू ने फाइटर जेट की सवारी ये पहली बार नहीं की हैं। उन्होंने इससे पहले 8 अप्रैल 2023 को असम के तेजपुर एयरफोर्स स्टेशन से सुखोई-30 MKI फाइटर विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। वह फाइटर जेट उड़ाने वाली तीसरी राष्ट्रपति और दूसरी महिला राष्ट्राध्यक्ष बनी थीं। राष्ट्रपति मुर्मू ने से पहले पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और प्रतिभा पाटिल ने भी सुखोई-30 MKI में उड़ान भरी थी। राफेल लड़ाकू विमान का क्या है इतिहास? बता दें, राफेल लड़ाकू विमान फ्रांसीसी कंपनी दसॉ एविएशन द्वारा निर्मित किया गया है। सितंबर 2020 में अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर भारतीय वायुसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था। अंबाला एयरबेस राफेल स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरोज' का मुख्य केंद्र है। इन विमानों का इस्तेमाल हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान किया गया था, इसके माध्यम से आतंकवादी ठिकानों पर हमले कर अपनी ताकत को सैनियों ने दिखाया था।
Lucknow Desk: आज 02 नवंबर 2025 को बॉलीवुड के बादशाह Shahrukh Khan ने अपने 60वें जन्मदिन का जश्न मनाया। इस मौके पर उन्होंने अपने परिवार, करीबियों और फिल्म इंडस्ट्री के दोस्तों के साथ खुशियाँ बाँटी। उन्होंने अपने आलीशान घर के बजाय इस बार सार्वजनिक रूप से Mannat से बाहर नहीं दिखने का फैसला किया क्योंकि वहाँ फिलहाल निर्माण का काम चल रहा है। वहीँ, जश्न के लिए उन्होंने Alibaug में स्थित निजी स्थान चुना। एक विशेष फैन-मीट कार्यक्रम Balgandharva Rangmandir, बांद्रा में आयोजित किया गया था, जहाँ सीमित प्रवेश पास के माध्यम से प्रशंसक सीधे शामिल हुए। सोशल मीडिया पर सितारों ने बधाइयाँ दीं। जिसमें Farah Khan ने लिखा, “Happy birthday KING … rule for another 100 years”। बता दें कि Shahrukh Khan के जन्मदिन के मौके पर सिर्फ भारत भर से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी फैंस जुटे। शाहरुख खान के फैन क्लबों ने जन्मदिन सप्ताह के रूप में मनाया, चैरिटी ड्राइव, विशेष बैनर आदि के माध्यम से ख़ास अंदाज़ से जश्न मनाया।
उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) की प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (PET) 2026 को देखते हुए प्रदेश के लगभग 60 जिलों में स्कूलों को बंद रखने की व्यवस्था की गई है। 30 अक्टूबर को आयोजित परीक्षा के मद्देनजर कक्षा 12 तक के स्कूलों में अवकाश रखने का निर्णय लिया गया है। इसका उद्देश्य परीक्षा केंद्रों पर व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखना और परीक्षार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी से बचाना है। प्रदेश में PET परीक्षा को लेकर प्रशासन और शिक्षा विभाग की ओर से आवश्यक तैयारियां की गई हैं। परीक्षा केंद्रों के आसपास यातायात व्यवस्था, सुरक्षा और अन्य जरूरी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के परीक्षा में शामिल होने के कारण कई जिलों में स्कूलों को बंद रखने की व्यवस्था की गई है, ताकि सड़कों पर भीड़ और यातायात का दबाव कम किया जा सके। दो पालियों में आयोजित हो रही परीक्षा UPSSSC PET परीक्षा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अलग-अलग पालियों में आयोजित की जा रही है। परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों को निर्धारित समय से पहले पहुंचने की सलाह दी गई है। पहली पाली और दूसरी पाली के लिए अलग-अलग समय निर्धारित किया गया है। अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र में दिए गए परीक्षा केंद्र, समय और जरूरी दिशा-निर्देशों को ध्यान से पढ़ने के लिए कहा गया है। परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को अपना एडमिट कार्ड और निर्धारित पहचान पत्र साथ रखना अनिवार्य है। परीक्षा केंद्र पर प्रवेश से पहले अभ्यर्थियों की जांच की जाएगी। परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल को रोकने के लिए भी जरूरी इंतजाम किए गए हैं। स्कूलों को बंद रखने के पीछे क्या है वजह? PET परीक्षा के दौरान बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के एक जिले से दूसरे जिले में पहुंचने की संभावना रहती है। ऐसे में परीक्षा केंद्रों के आसपास यातायात का दबाव बढ़ सकता है। स्कूलों की छुट्टी रखने से बच्चों की आवाजाही कम होगी और परीक्षा से जुड़े इंतजामों को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिलेगी। अभ्यर्थियों को इन बातों का रखना होगा ध्यान परीक्षार्थियों को सलाह दी गई है कि वे परीक्षा केंद्र पर समय से पहुंचें और एडमिट कार्ड पर दिए गए निर्देशों का पालन करें। मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच और अन्य प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण परीक्षा केंद्र के अंदर ले जाने की अनुमति नहीं होती है। वहीं, अभिभावकों और विद्यार्थियों को अपने जिले के शिक्षा विभाग या जिला प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक आदेश की जानकारी अवश्य लेनी चाहिए। स्कूलों में अवकाश संबंधी निर्देश जिले के अनुसार अलग हो सकते हैं।
बंगाल की खाड़ी में चक्रवात की आशंका के बीच भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा और परिचालन व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कुछ ट्रेनों के संचालन में बदलाव किया है। 26 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, चक्रवात अर्नब के प्रभाव को देखते हुए आठ ट्रेनें रद्द की गई हैं, जबकि दो अन्य ट्रेनों के मार्ग बदलने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा कुछ सेवाओं के शुरुआती और अंतिम स्टेशन में भी बदलाव किए गए हैं। चक्रवात से रेल सेवाओं पर असर बंगाल की खाड़ी में मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण पूर्वी तटीय क्षेत्रों में रेल परिचालन प्रभावित होने की आशंका है। तेज हवाओं, भारी बारिश और जलभराव जैसी परिस्थितियों में रेलवे को ट्रेनों की गति नियंत्रित करने, सेवाएं रद्द करने या वैकल्पिक मार्गों से चलाने की जरूरत पड़ सकती है। रेलवे का उद्देश्य यात्रियों को संभावित जोखिम से बचाना और रेल सेवाओं का सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करना है। हालांकि, किन ट्रेनों को रद्द किया गया है और किनके मार्ग बदले गए हैं, इसकी पूरी जानकारी यात्रियों को संबंधित रेलवे जोन की आधिकारिक सूचना से जांचनी चाहिए। यात्रियों को हो सकती है परेशानी ट्रेनों के रद्द होने या मार्ग बदलने से यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में देरी हो सकती है। जिन लोगों ने पहले से टिकट बुक करा रखे हैं, उन्हें यात्रा शुरू करने से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति की जानकारी लेनी चाहिए। विशेष रूप से लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को यह जांचना चाहिए कि उनकी ट्रेन निर्धारित समय पर चल रही है या नहीं। मार्ग परिवर्तन होने पर कुछ स्टेशनों पर ट्रेन का ठहराव भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए केवल पुराने समय-सारणी के आधार पर स्टेशन पहुंचने का निर्णय लेना उचित नहीं होगा। यात्रा से पहले ऐसे चेक करें ट्रेन का स्टेटस यात्री भारतीय रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट, NTES (National Train Enquiry System) और रेलवे की अधिकृत पूछताछ सेवाओं के माध्यम से अपनी ट्रेन की स्थिति देख सकते हैं। इसके लिए ट्रेन नंबर या ट्रेन का नाम दर्ज करके रद्द होने, देरी और मार्ग परिवर्तन से संबंधित जानकारी प्राप्त की जा सकती है। यदि ट्रेन रद्द हो जाती है, तो टिकट के प्रकार और रेलवे के लागू नियमों के अनुसार रिफंड की प्रक्रिया की जानकारी लें। जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक ट्रेन या यात्रा के दूसरे साधन पर भी विचार किया जा सकता है। रेलवे की सलाह पर दें ध्यान चक्रवात के दौरान मौसम तेजी से बदल सकता है। ऐसे में यात्रियों को रेलवे की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखनी चाहिए और बिना पुष्टि के सोशल मीडिया पर प्रसारित ट्रेन संबंधी सूचनाओं पर भरोसा नहीं करना चाहिए। यात्रियों के लिए सबसे जरूरी है कि वे यात्रा से पहले ट्रेन का ताजा स्टेटस जांचें, पर्याप्त समय लेकर स्टेशन पहुंचें और किसी भी बदलाव के लिए तैयार रहें।
राजस्थान में मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश और खरीफ की फसलों को हुए नुकसान के बाद राज्य सरकार ने 14 जिलों की 80 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। सरकार के इस फैसले से प्रभावित क्षेत्रों में किसानों, पशुपालकों और स्थानीय प्रशासन को राहत मिलने की उम्मीद है। जारी अधिसूचनाओं के अनुसार, इन तहसीलों में सूखे की स्थिति को गंभीर और मध्यम, दो श्रेणियों में बांटा गया है। 69 तहसीलों में गंभीर सूखे की स्थिति राज्य सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, कुल 80 तहसीलों में से 69 को गंभीर सूखा प्रभावित और 11 को मध्यम सूखा प्रभावित श्रेणी में रखा गया है। आपदा प्रबंधन, राहत एवं नागरिक सुरक्षा विभाग ने 24 और 25 अक्टूबर को इस संबंध में अधिसूचनाएं जारी कीं। यह घोषणा 2026 के खरीफ सीजन के लिए की गई है और अधिसूचना के प्रकाशन से छह महीने तक प्रभावी रहेगी। पहली अधिसूचना में 13 जिलों की 53 तहसीलों को शामिल किया गया था। इसके बाद दूसरी अधिसूचना के जरिए 27 और तहसीलों को सूची में जोड़ा गया। बीकानेर इस प्रक्रिया में शामिल होने वाला नया जिला बना, जिससे सूखा प्रभावित जिलों की कुल संख्या 14 हो गई। जोधपुर, जालोर और बाड़मेर सबसे अधिक प्रभावित सूखा प्रभावित तहसीलों की संख्या के मामले में जोधपुर सबसे आगे है। यहां 12 तहसीलों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है। जालोर और बाड़मेर में 10-10 तहसीलें, बालोतरा में नौ और पाली में आठ तहसीलें शामिल हैं। इसके अलावा डूंगरपुर, जैसलमेर और फलोदी की सात-सात तहसीलों को सूची में रखा गया है। बांसवाड़ा की तीन तहसीलें, चूरू और ब्यावर की दो-दो तहसीलें तथा बीकानेर, नागौर और सिरोही की एक-एक तहसील भी इस घोषणा के दायरे में आती हैं। इन क्षेत्रों में बारिश की कमी और जल उपलब्धता में गिरावट के कारण कृषि गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। कम बारिश और फसलों को नुकसान बना प्रमुख कारण सूखे का आकलन करते समय सरकार ने कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार किया। इनमें सामान्य से कम वर्षा, सतही जल और भूजल की उपलब्धता, खड़ी फसलों की स्थिति तथा केंद्र सरकार के सूखा निगरानी पोर्टल से प्राप्त जानकारी शामिल है। आकलन केंद्र के सूखा प्रबंधन मैनुअल, 2016 के दिशा-निर्देशों के अनुसार किया गया। राज्य में बारिश की कमी के कारण कई इलाकों में खेतों की नमी प्रभावित हुई है। इससे खरीफ की फसलों के उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ी है। कृषि पर निर्भर परिवारों के लिए यह स्थिति आर्थिक चुनौती बन सकती है। किसानों और पशुपालकों को राहत की उम्मीद सूखाग्रस्त घोषित होने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक स्तर पर राहत संबंधी कदम उठाए जाने की संभावना है। विधानसभा के मुख्य सचेतक योगेश्वर गर्ग ने प्रभावित क्षेत्रों में चारा डिपो स्थापित करने और किसानों तथा पशुपालकों को हरसंभव सहायता देने की बात कही है। हालांकि, किसानों को मिलने वाली सहायता, पात्रता और वितरण की प्रक्रिया संबंधित सरकारी नियमों एवं आदेशों पर निर्भर करेगी। ऐसे में प्रभावित किसानों के लिए जिला प्रशासन की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखना जरूरी है। राजस्थान सरकार के इस फैसले से सूखे की समस्या से जूझ रहे क्षेत्रों में राहत कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। अब प्रभावित इलाकों के किसानों और पशुपालकों की नजर सरकार की ओर से किए जाने वाले अगले कदमों पर है।