राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन को कानूनी सुरक्षा देने के उद्देश्य से राज्यसभा में एक नया संशोधन विधेयक प्रस्तुत किया गया है। ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम संशोधन विधेयक, 2026’ नाम का यह प्रस्ताव 24 जुलाई 2026 को राज्यसभा में पेश हुआ। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय गीत के गायन को जानबूझकर रोकने या उसमें व्यवधान उत्पन्न करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता तैयार करना है।
यह विधेयक अभी संसदीय प्रक्रिया के शुरुआती चरण में है। इसे फिलहाल पारित कानून नहीं कहा जा सकता। लागू होने से पहले इसे संसद की आवश्यक मंजूरियां प्राप्त करनी होंगी।
1971 के कानून में बदलाव का प्रस्ताव
भारत में राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा के लिए ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971’ लागू है। इस कानून में राष्ट्रीय ध्वज, भारत के संविधान और राष्ट्रगान के अपमान से संबंधित अपराधों और दंड का उल्लेख किया गया है।
नए संशोधन विधेयक में कानून के दायरे को बढ़ाकर राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को भी शामिल करने की बात कही गई है। प्रस्ताव के अनुसार राष्ट्रगान के गायन में बाधा डालने से जुड़े मौजूदा प्रावधान को राष्ट्रीय गीत के लिए भी लागू किया जा सकता है।
किस तरह का व्यवहार अपराध माना जाएगा?
प्रस्तावित बदलाव मुख्य रूप से दो प्रकार के कार्यों से संबंधित है। पहला, किसी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर ‘वंदे मातरम्’ का गायन रोकना। दूसरा, राष्ट्रीय गीत गा रहे लोगों की सभा में इरादतन व्यवधान उत्पन्न करना।
सिर्फ किसी कार्यक्रम में उपस्थित न होना या सामान्य असहमति व्यक्त करना अपने आप इस प्रावधान के अंतर्गत अपराध नहीं बताया गया है। कानूनी कार्रवाई के लिए यह देखना आवश्यक होगा कि संबंधित व्यक्ति ने जानबूझकर गायन रोका या सभा में बाधा पहुंचाई थी।
किसी घटना में अपराध बना है या नहीं, इसका निर्णय शिकायत, उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
अधिकतम तीन वर्ष की सजा का प्रावधान
विधेयक में राष्ट्रीय गीत के गायन को जानबूझकर रोकने या उसमें बाधा डालने पर अधिकतम तीन वर्ष तक कारावास का प्रस्ताव है। दोषी व्यक्ति पर जुर्माना लगाया जा सकता है या अदालत जेल और जुर्माना दोनों की सजा सुना सकती है।
बार-बार अपराध करने वालों के लिए अधिक कठोर व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। दूसरी या उसके बाद की दोषसिद्धि पर कम से कम एक वर्ष के कारावास का प्रावधान हो सकता है।
ये प्रावधान राष्ट्रगान से संबंधित मौजूदा दंड व्यवस्था के आधार पर राष्ट्रीय गीत तक कानूनी सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से शामिल किए गए हैं।
विधेयक लाने के पीछे क्या कारण बताया गया?
विधेयक के उद्देश्यों में कहा गया है कि ‘वंदे मातरम्’ ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके बावजूद वर्तमान कानून में राष्ट्रीय गीत के गायन को जानबूझकर रोकने या सभा में बाधा डालने से संबंधित अलग प्रावधान नहीं है।
इसी कानूनी कमी को दूर करने के लिए संशोधन प्रस्ताव सामने लाया गया है। इसके समर्थकों का मानना है कि राष्ट्रीय गीत को भी राष्ट्रगान के समान उचित सम्मान और कानूनी संरक्षण मिलना चाहिए।
स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा है ‘वंदे मातरम्’
‘वंदे मातरम्’ की रचना बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह रचना उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ का हिस्सा बनी और बाद में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशभक्ति तथा राष्ट्रीय एकता की पहचान बन गई।
आजादी की लड़ाई में आंदोलनकारियों ने इसका प्रयोग प्रेरणा और विरोध के स्वर के रूप में किया। स्वतंत्र भारत में इसे राष्ट्रीय गीत का सम्मान प्राप्त है, जबकि ‘जन गण मन’ देश का राष्ट्रगान है।
अभी लागू नहीं हुए प्रस्तावित नियम
विधेयक का राज्यसभा में पेश होना और कानून बन जाना दो अलग स्थितियां हैं। वर्तमान आधिकारिक रिकॉर्ड में इसकी स्थिति केवल प्रस्तुत किए गए विधेयक की है। इसलिए अभी इसके प्रस्तावित दंड को लागू नियम नहीं माना जाएगा।
संसदीय प्रक्रिया पूरी होने और आवश्यक स्वीकृतियां मिलने के बाद ही इसके प्रावधान प्रभावी हो सकते हैं। ऐसे में खबर प्रकाशित करते समय इसे “राज्यसभा में पेश विधेयक” लिखना सही होगा। “संसद से पारित” या “नया कानून लागू” जैसे शब्दों का प्रयोग फिलहाल नहीं किया जाना चाहिए।
Lucknow Desk: बिहार के मोकामा से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ चुनाव प्रचार के दौरान हमला किया गया। इस घटना में जानी-मानी हस्ती दुलारचंद यादव की हत्या हो गई है और आरोप लगाया गया है कि इस घटना में पूर्व विधायक अनंत सिंह के समर्थकों की भूमिका है। यह घटना आगामी विधानसभा चुनाव के बीच हुई है, जिससे राज्य में कानून-व्यवस्था और चुनावी हिंसा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अनंत सिंह समेत 5 नामजद मोकामा में दुलारचंद यादव की हत्या मामले में JDU प्रत्याशी बाहुबली अनंत सिंह समेत पांच लोगों पर केस दर्ज कर ली गई है। मृत दुलारचंद यादव के पोते के दिए गए बयान पर अनंत सिंह, दो भतीजों रणवीर सिंह, कर्मवीर सिंह, करीबी छोटन सिंह और कंजय सिंह पर नामजद और कई अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। यानी दुलारचंद यादव के परिजनों और जन सुराज पार्टी के समर्थकों ने सीधे तौर पर JDU उम्मीदवार और बाहुबली नेता अनंत सिंह के समर्थकों पर हत्या का आरोप लगाया है। अनंत सिंह ने आरोपों को किया खारिज वहीं इस बयान पर JDU उम्मीदवार अनंत सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे RJD उम्मीदवार वीणा देवी के पति बाहुबली सूरजभान सिंह की साजिश बताया है। अनंत सिंह ने कहा कि उनके काफिले पर विरोधियों ने हमला किया और यह सारा खेल सूरजभान सिंह करवा रहे हैं। कौन थे दुलारचंद यादव ? मोकामा के रहने वाले दुलारचंद यादव को ‘टाल का बादशाह’ कहा जाता था। दुलारचंद पहलवानी के साथ-साथ गाना गाने के भी शौकीन थे। उन्होंने जन सुराज के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के लिए एक गाना भी रिकॉर्ड करवाया था। माना जा रहा है कि मोकामा की चुनावी जंग अब व्यक्तिगत रंजिश और हिंसक टकराव की तरफ मुड़ गई है।
बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन एक बार फिर दादा होने का गर्व महसूस कर रहे हैं। दरअसल, उनके नाती अगस्त्य नंदा की अपकमिंग फिल्म ‘इक्कीस’ का ट्रेलर हाल ही में रिलीज़ हुआ है। ट्रेलर देखकर बिग बी इतने इमोशनल हो गए कि उन्होंने सोशल मीडिया पर एक दिल छू लेने वाला पोस्ट शेयर किया। अमिताभ ने अपने पोस्ट में लिखा, “ये तो बस शुरुआत है... गर्व है तुम्हारे इस सफर पर, मेरे बच्चे।” उनकी इस पोस्ट पर फैन्स और फिल्म इंडस्ट्री के सितारों ने जमकर प्यार लुटाया। ‘इक्कीस’ मेगास्टार मेघना गुलज़ार के निर्देशन में बनी है और इसमें अगस्त्य नंदा एक अहम किरदार निभा रहे हैं। फिल्म 1971 के युद्ध के हीरो अरुण खेत्रपाल की कहानी पर आधारित है, जो देश के सबसे युवा परमवीर चक्र विजेता थे। फिल्म के ट्रेलर में अगस्त्य का जोश और समर्पण देखकर फैन्स कह रहे हैं—“दादा की तरह नाती भी लाजवाब!” तो देखना दिलचस्प होगा कि क्या अगस्त्य अपनी पहली ही फिल्म से दादा अमिताभ की विरासत को आगे बढ़ा पाएंगे।
Lucknow Desk: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज बुधवार को भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान राफेल में उड़ान भरकर इतिहास रच दिया है। इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुखोई-3 MKI लड़ाकू विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। राष्ट्रपति की इस उड़ान ने आज भारतीय वायुसेना के साथ-साथ पूरे देश को गौरव से भर दिया है। बता दें, भारत का राष्ट्रपति तीनों सेनाओं की कमांडर होता है और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर मौजूद हैं। अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज सुबह अंबाला एयरबेस पहुंचीं, जहां वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह और वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। बता दें, राष्ट्रपति का यह उड़ान न केवल साहसिक नेतृत्व शैली का प्रतीक है, बल्कि भारत की बढ़ती रक्षा क्षमता और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को वैश्विक पटल पर मजबूती से प्रदर्शित करना भी है। फाइटर जेट में उड़ान भरने वाली दूसरी महिला राष्ट्रपति मुर्मू राष्ट्रपति मुर्मू ने फाइटर जेट की सवारी ये पहली बार नहीं की हैं। उन्होंने इससे पहले 8 अप्रैल 2023 को असम के तेजपुर एयरफोर्स स्टेशन से सुखोई-30 MKI फाइटर विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। वह फाइटर जेट उड़ाने वाली तीसरी राष्ट्रपति और दूसरी महिला राष्ट्राध्यक्ष बनी थीं। राष्ट्रपति मुर्मू ने से पहले पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और प्रतिभा पाटिल ने भी सुखोई-30 MKI में उड़ान भरी थी। राफेल लड़ाकू विमान का क्या है इतिहास? बता दें, राफेल लड़ाकू विमान फ्रांसीसी कंपनी दसॉ एविएशन द्वारा निर्मित किया गया है। सितंबर 2020 में अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर भारतीय वायुसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था। अंबाला एयरबेस राफेल स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरोज' का मुख्य केंद्र है। इन विमानों का इस्तेमाल हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान किया गया था, इसके माध्यम से आतंकवादी ठिकानों पर हमले कर अपनी ताकत को सैनियों ने दिखाया था।
Lucknow Desk: कैसरगंज के बीजेपी नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के हेलीकॉप्टर को धान के खेत में अचानक उतारना पड़ा। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि तकनीकी खराबी आने के बाद पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतारा, जहां हेलीकॉप्टर देखने के लिए ग्रामीण भी जुट गए। मिली जानकारी के मुताबिक, बृजभूषण शरण सिंह एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। उड़ान के कुछ ही मिनट बाद हेलीकॉप्टर में तकनीकी दिक्कत आने लगी। स्थिति को समझते हुए पायलट ने तुरंत इमरजेंसी लैंडिंग का फैसला लिया और नज़दीकी धान के खेत में हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतार दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। हेलीकॉप्टर की जांच के लिए टेक्निकल टीम बुलाई गई है। फिलहाल राहत की बात यह है कि बृजभूषण शरण सिंह और हेलीकॉप्टर में मौजूद सभी लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं। जांच के बाद ही तकनीकी खराबी की असली वजह पता चल पाएगी। इसी बीच पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर संदेश दिया। उन्होंने कहा, आज मेरा बिहार प्रदेश के अंदर संदेश व दिनारा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सभा का कार्यक्रम था। संदेश विधानसभा का कार्यक्रम करके मैं दिनारा विधानसभा के लिए हेलीकाप्टर से निकला था। अचानक मौसम खराब होने के कारण हेलीकाप्टर की सुरक्षित लैंडिंग एक खेत में करानी पड़ी। पायलट ने बड़ी सूझबूझ से लैंडिंग कराई। मैं, इस समय गाड़ी से पटना जा रहा हूं। किसी अफवाह में आने की जरूरत नहीं है। किसी प्रकार की कोई हानि नहीं हुई है। हम सभी पूर्णतया सुरक्षित हैं। हेलीकाप्टर की सुरक्षा का प्रबंध कर दिया गया है। प्रशासन व जनता का बहुत सहयोग रहा...धन्यवाद
Lucknow Desk: आज 02 नवंबर 2025 को बॉलीवुड के बादशाह Shahrukh Khan ने अपने 60वें जन्मदिन का जश्न मनाया। इस मौके पर उन्होंने अपने परिवार, करीबियों और फिल्म इंडस्ट्री के दोस्तों के साथ खुशियाँ बाँटी। उन्होंने अपने आलीशान घर के बजाय इस बार सार्वजनिक रूप से Mannat से बाहर नहीं दिखने का फैसला किया क्योंकि वहाँ फिलहाल निर्माण का काम चल रहा है। वहीँ, जश्न के लिए उन्होंने Alibaug में स्थित निजी स्थान चुना। एक विशेष फैन-मीट कार्यक्रम Balgandharva Rangmandir, बांद्रा में आयोजित किया गया था, जहाँ सीमित प्रवेश पास के माध्यम से प्रशंसक सीधे शामिल हुए। सोशल मीडिया पर सितारों ने बधाइयाँ दीं। जिसमें Farah Khan ने लिखा, “Happy birthday KING … rule for another 100 years”। बता दें कि Shahrukh Khan के जन्मदिन के मौके पर सिर्फ भारत भर से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी फैंस जुटे। शाहरुख खान के फैन क्लबों ने जन्मदिन सप्ताह के रूप में मनाया, चैरिटी ड्राइव, विशेष बैनर आदि के माध्यम से ख़ास अंदाज़ से जश्न मनाया।
31 जुलाई 2026 को दिल्ली में CJP आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। दिल्ली सरकार ने पुलिस को CJP के प्रदर्शन के दौरान दर्ज किए गए 13 मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है। ये मामले 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद की ओर निकाले गए ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान हुई हिंसा, अव्यवस्था और पुलिस से टकराव के संबंध में दर्ज किए गए थे। हालांकि, यह राहत सभी प्रदर्शनकारियों को नहीं मिलेगी। दिल्ली सरकार के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जिन लोगों का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड है या जिनकी भूमिका गंभीर अपराधों में पाई गई है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रह सकती है। सामान्य और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई प्रतिकूल कानूनी कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया गया है। 20 जुलाई के प्रदर्शन के बाद दर्ज हुई थीं FIR CJP ने परीक्षा पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में कथित भ्रष्टाचार और छात्रों की समस्याओं को लेकर दिल्ली में लंबे समय तक आंदोलन किया था। 20 जुलाई को बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर जमा हुए और संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेड लगाए थे। इसके बाद कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया था। इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन से संबंधित हिंसा और अन्य घटनाओं को लेकर 13 FIR दर्ज की थीं। गिरफ्तार लोगों के मामलों की होगी समीक्षा दिल्ली सरकार के गृह विभाग ने पुलिस को निर्देश दिया है कि इन मामलों में पहले से गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए लोगों की स्थिति की जल्द समीक्षा की जाए। जिन लोगों के खिलाफ कोई गंभीर आरोप या पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उनकी रिहाई की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा सकती है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी विभिन्न राज्यों से कहा था कि CJP आंदोलन के दौरान हिरासत में लिए गए ऐसे प्रदर्शनकारियों को रिहा किया जाए, जिनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। अदालत ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को महत्वपूर्ण बताते हुए पुलिस कार्रवाई की समीक्षा करने की आवश्यकता पर जोर दिया था। FIR वापस लेने की कानूनी प्रक्रिया जरूरी दिल्ली सरकार के आदेश के बाद भी मुकदमे तुरंत समाप्त नहीं माने जाएंगे। FIR वापस लेने के लिए पुलिस और सरकारी वकीलों को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। जिन मामलों में अदालत में आरोपपत्र दाखिल हो चुका है, उनमें मुकदमा वापस लेने के लिए अदालत की अनुमति भी आवश्यक हो सकती है। इसलिए “दिल्ली पुलिस ने सभी मुकदमे खत्म कर दिए” लिखना अभी पूरी तरह सही नहीं होगा। सही स्थिति यह है कि दिल्ली सरकार ने 13 FIR वापस लेने का आदेश दिया है और दिल्ली पुलिस कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई करेगी। CJP ने औपचारिक वापसी की मांग की CJP ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है, लेकिन संगठन ने कहा है कि केवल मामलों को बंद करने का आश्वासन पर्याप्त नहीं है। CJP नेता सौरव दास ने मांग की है कि सभी संबंधित FIR को औपचारिक रूप से वापस लिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार समझौते के अनुसार कार्रवाई नहीं करती है, तो संगठन दोबारा सड़कों पर उतर सकता है। CJP का कहना है कि आंदोलन समाप्त करते समय सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने और भविष्य में सामान्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन दिया था। हालांकि, आपराधिक पृष्ठभूमि वाले और हिंसक घटनाओं में शामिल लोगों के मामले अलग रखे गए हैं। प्रदर्शनकारियों के लिए बड़ी राहत दिल्ली सरकार का यह फैसला उन छात्रों, युवाओं और सामान्य नागरिकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जो आंदोलन में शामिल हुए थे। सरकार का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को कानूनी परेशानियों से बचाया जाएगा, लेकिन हिंसा या गंभीर अपराध में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी। अब सभी की नजर इस बात पर है कि दिल्ली पुलिस 13 FIR वापस लेने की कानूनी प्रक्रिया कितनी जल्दी पूरी करती है और गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों की समीक्षा के बाद कितने लोगों को राहत मिलती है।
सरकारी भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, फर्जीवाड़ा और संगठित नकल रोकने के लिए लोकसभा ने एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक पारित कर दिया है। लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को 27 जुलाई 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था और 29 जुलाई 2026 को सदन ने इसे पारित कर दिया। यह विधेयक वर्ष 2024 के मौजूदा कानून को अधिक सख्त बनाने के उद्देश्य से लाया गया है। पेपर लीक में शामिल व्यक्ति को क्या सजा मिलेगी? नए विधेयक में अलग-अलग प्रकार के अपराधों के लिए अलग सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है। किसी व्यक्ति द्वारा पेपर लीक करने, प्रश्नपत्र प्राप्त करने, उत्तर उपलब्ध कराने या परीक्षा में अन्य अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने पर पांच से दस साल तक की जेल हो सकती है। ऐसे व्यक्ति पर ₹50 लाख तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। पुराने कानून में इस अपराध के लिए तीन से पांच साल की जेल और ₹10 लाख तक जुर्माने का प्रावधान था। नए संशोधन में जेल की अवधि और जुर्माना दोनों बढ़ाए गए हैं। परीक्षा सेवा प्रदाता पर ₹5 करोड़ तक जुर्माना सरकारी परीक्षाओं को आयोजित कराने वाली एजेंसी या सेवा प्रदाता कंपनी यदि पेपर लीक अथवा किसी अन्य गड़बड़ी में शामिल पाई जाती है, तो उस पर ₹5 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। पुराने कानून में सेवा प्रदाता संस्था पर अधिकतम ₹1 करोड़ जुर्माने का प्रावधान था। इसके साथ ही दोषी एजेंसी को आठ साल तक किसी सार्वजनिक परीक्षा को आयोजित करने की जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। पहले यह प्रतिबंध चार साल के लिए था। यदि कंपनी के जिम्मेदार अधिकारी अपराध में शामिल पाए जाते हैं, तो उन्हें कम से कम पांच साल की जेल और ₹5 करोड़ तक जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। संगठित अपराध के लिए ₹10 करोड़ जुर्माना पेपर लीक को किसी गिरोह, संस्था या नेटवर्क द्वारा संगठित तरीके से अंजाम देने पर सबसे कठोर सजा का प्रावधान किया गया है। ऐसे संगठित अपराध में दोषी पाए जाने वाले लोगों को सात से दस साल तक की जेल हो सकती है। इसके साथ ही उन पर कम से कम ₹10 करोड़ का जुर्माना लगाया जाएगा। इसलिए ₹10 करोड़ का प्रावधान सामान्य व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि संगठित पेपर लीक अपराध से जुड़े मामलों के लिए है। विधेयक में अपराध से अर्जित संपत्ति को जब्त करने की व्यवस्था भी रखी गई है। दो महीने में जांच पूरी करने का लक्ष्य नए संशोधन विधेयक में परीक्षा गड़बड़ी के मामलों की जांच के लिए समय-सीमा निर्धारित की गई है। मामला दर्ज होने के बाद जांच दो महीने के भीतर पूरी करने का प्रावधान है। केंद्र सरकार गंभीर मामलों की जांच के लिए विशेष टास्क फोर्स भी बना सकेगी। हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में इन मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाया जाएगा। आरोपपत्र दाखिल होने के बाद मुकदमे को तीन महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा मामलों की सुनवाई रोजाना आधार पर किए जाने का प्रावधान भी है। किन परीक्षाओं पर लागू होगा कानून? यह कानून संघ लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग, रेलवे भर्ती बोर्ड, बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी और केंद्र सरकार के मंत्रालयों द्वारा आयोजित सार्वजनिक परीक्षाओं पर लागू होगा। सरकार का कहना है कि कठोर सजा, तेज जांच और फास्ट ट्रैक अदालतों से परीक्षा माफिया पर रोक लगेगी। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि कानून के साथ परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा, तकनीक और प्रशासनिक निगरानी को भी मजबूत करना आवश्यक होगा। यह विधेयक अभी लोकसभा से पारित हुआ है। कानून बनने के लिए इसे आगे की संसदीय प्रक्रिया और राष्ट्रपति की मंजूरी पूरी करनी होगी।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। लखनऊ विकास प्राधिकरण यानी LDA ने अलीगंज इलाके में स्थित चार मंजिला अवैध इमारत को बुलडोजर से गिराने की कार्रवाई शुरू कर दी है। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आसपास के लगभग 700 मीटर क्षेत्र को सील कर दिया गया। 15 लोगों की गई थी जान लखनऊ के अलीगंज इलाके में 22 जून 2026 को एक इमारत में भीषण आग लग गई थी। इस दर्दनाक हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई थी। घटना के बाद इमारत की सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण नियमों को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। जांच के दौरान इमारत में कई प्रकार की अनियमितताएं सामने आने की बात कही गई। बताया गया कि भवन का निर्माण नियमों के अनुसार नहीं किया गया था और जरूरी सुरक्षा मानकों की भी अनदेखी की गई थी। अग्निकांड के बाद LDA ने इमारत की जांच करते हुए ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की थी। 10 जुलाई को दिया गया था आदेश लखनऊ विकास प्राधिकरण ने इस चार मंजिला इमारत को गिराने का आदेश 10 जुलाई 2026 को जारी किया था। इसके बाद इमारत पर नोटिस भी चस्पा किया गया। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद 25 जुलाई को बुलडोजर और अन्य मशीनों की मदद से भवन को गिराने का काम शुरू किया गया। कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए प्रशासन ने पहले से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। इमारत के आसपास रहने वाले लोगों और दुकानदारों को सुरक्षित दूरी पर रहने के निर्देश दिए गए। 700 मीटर तक इलाका किया गया सील बुलडोजर कार्रवाई के दौरान इमारत के आसपास लगभग 700 मीटर तक के क्षेत्र को सील कर दिया गया। रास्ते पर आम लोगों और वाहनों की आवाजाही रोक दी गई। मौके पर तीन थानों की पुलिस फोर्स और 100 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। LDA के अधिकारी और कर्मचारी भी मौके पर मौजूद रहे। बड़ी इमारत होने के कारण ध्वस्तीकरण का काम सावधानी से किया गया, ताकि आसपास के मकानों, दुकानों और राहगीरों को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल इस अग्निकांड के बाद केवल इमारत मालिक ही नहीं, बल्कि संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। मामले में छह PCS अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके साथ ही भवनों के नक्शे और फायर सेफ्टी नियमों को लेकर सख्ती बढ़ाने की तैयारी भी की गई। अवैध निर्माण पर प्रशासन का सख्त संदेश इस कार्रवाई के माध्यम से प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी करके बनाए गए अवैध भवनों को बख्शा नहीं जाएगा। यह हादसा बताता है कि बिना नक्शा पास कराए, फायर सेफ्टी व्यवस्था और इमरजेंसी निकास के बिना बनाई गई इमारतें लोगों की जान के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं। हालांकि, इमारत से जुड़े लोगों की ओर से बुलडोजर कार्रवाई को अदालत में चुनौती देने की तैयारी किए जाने की बात भी सामने आई है।