INDIA

असम में बाढ़ के बाद मुश्किलें बरकरार, लाखों लोगों के सामने घर और रोजगार बचाने की चुनौती

TV 24 Network July 31, 2026 0
असम में बाढ़ से प्रभावित गांव और राहत अभियान चलाते बचावकर्मी
Assam Flood 2026 Relief and Rescue Operation

असम में बाढ़ का पानी कई क्षेत्रों से धीरे-धीरे उतरने लगा है, लेकिन लोगों की परेशानियां अभी कम नहीं हुई हैं। अनेक गांवों में घरों के अंदर मिट्टी और गंदा पानी जमा है। सड़कों, बिजली व्यवस्था और खेती को हुए नुकसान के कारण सामान्य जीवन दोबारा शुरू होने में समय लग सकता है। प्रशासन की ओर से बचाव, राहत सामग्री वितरण और जरूरी सेवाओं को बहाल करने का काम लगातार किया जा रहा है।

 

29 जुलाई को राज्य में 3.32 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित बताए गए थे। पानी कम होने के बाद 30 जुलाई की रिपोर्ट में प्रभावित आबादी करीब 2.12 लाख रह गई। संख्या में कमी जरूर आई है, लेकिन हजारों परिवारों को अब भी भोजन, स्वच्छ पानी, दवा और सुरक्षित रहने की जगह की जरूरत है।

 

चार जिलों में बाढ़ का अधिक प्रभाव

चराइदेव, शिवसागर, जोरहाट और गोलाघाट जिले बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। इन जिलों के कई गांवों में मकानों, दुकानों और संपर्क मार्गों को नुकसान पहुंचा है। कुछ स्थानों पर पानी उतरने के बाद मोटी मिट्टी की परत दिखाई दे रही है, जिससे लोगों के लिए अपने घरों की सफाई और मरम्मत करना मुश्किल हो रहा है।

 

ग्रामीण इलाकों में टूटी सड़कों और क्षतिग्रस्त पुलों के कारण राहत सामग्री पहुंचाने में भी बाधा आ रही है। प्रशासन नावों और अन्य उपलब्ध साधनों की मदद से प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने का प्रयास कर रहा है।

 

राहत शिविरों में रहने को मजबूर परिवार

जिन लोगों के घर रहने योग्य नहीं बचे हैं, उन्हें राहत शिविरों और सुरक्षित स्थानों पर ठहराया गया है। शिविरों में भोजन, पेयजल, बच्चों के लिए आवश्यक सामग्री और प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराई जा रही है।

 

गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार लोगों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की टीमें शिविरों में जांच कर रही हैं। दूषित पानी के कारण दस्त, त्वचा संक्रमण और अन्य बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है।

 

मौतों का आंकड़ा बढ़ने से चिंता

बाढ़ और इससे जुड़ी दुर्घटनाओं में मरने वाले लोगों की संख्या लगभग 80 तक पहुंच गई है। कई लोगों की मौत पानी में डूबने, तेज बहाव में बहने और मकान क्षतिग्रस्त होने जैसी घटनाओं में हुई।

 

राज्य सरकार द्वारा मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने और नुकसान का आकलन करने की प्रक्रिया चल रही है। प्रभावित जिलों में सर्वेक्षण करके मकानों, खेती और अन्य संपत्तियों को हुए नुकसान की जानकारी जुटाई जा रही है।

 

किसानों की फसल और पशुधन प्रभावित

बाढ़ ने किसानों की मेहनत पर भी पानी फेर दिया है। धान सहित कई फसलें जलमग्न होने से खराब हो गई हैं। खेतों में जमा गाद और पानी के कारण अगली बुवाई की तैयारी भी प्रभावित हो सकती है।

 

कई परिवारों के पशु बह गए या बीमार हो गए हैं। पशुपालन विभाग द्वारा पशुओं के उपचार, टीकाकरण और चारे की व्यवस्था करने की कोशिश की जा रही है। किसानों का कहना है कि फसल और पशुधन दोनों को नुकसान होने से उनकी आय पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है।

 

बिजली और सड़क व्यवस्था बहाल करने का काम जारी

बाढ़ के कई दिनों बाद भी हजारों घरों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है। पानी में डूबे ट्रांसफार्मर, बिजली के खंभे और तारों की मरम्मत की जा रही है।

 

सड़कों से मिट्टी और मलबा हटाने का काम भी जारी है। कुछ क्षेत्रों में यातायात शुरू हो गया है, जबकि कई ग्रामीण रास्ते अभी बंद हैं। प्रशासन ने लोगों से क्षतिग्रस्त सड़कों और तेज बहाव वाले स्थानों से दूर रहने की अपील की है।

 

दोबारा बारिश होने पर बढ़ सकता है खतरा

मौसम विभाग ने असम के कुछ हिस्सों में और बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में नदियों का जलस्तर फिर बढ़ने और निचले इलाकों में पानी भरने का खतरा बना हुआ है।

 

लोगों से स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों का पालन करने, नदी किनारे नहीं जाने और जरूरी दस्तावेज तथा सामान सुरक्षित रखने को कहा गया है। फिलहाल असम के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित लोगों को घर वापस पहुंचाने के साथ उनके रोजगार, खेती और दैनिक जीवन को दोबारा पटरी पर लाना है।

Tags

Assam-Flood Assam-News Flood-News Relief-Operation
Popular post
Bihar Chunav से पहले Anant Singh की बढ़ी मुश्किलें, दुलार चंद यादव के हत्या मामले में फंसे बाहुबली

Lucknow Desk: बिहार के मोकामा से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ चुनाव प्रचार के दौरान हमला किया गया। इस घटना में जानी-मानी हस्ती दुलारचंद यादव की हत्या हो गई है और आरोप लगाया गया है कि इस घटना में पूर्व विधायक अनंत सिंह के समर्थकों की भूमिका है। यह घटना आगामी विधानसभा चुनाव के बीच हुई है, जिससे राज्य में कानून-व्यवस्था और चुनावी हिंसा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अनंत सिंह समेत 5 नामजद मोकामा में दुलारचंद यादव की हत्या मामले में JDU प्रत्याशी बाहुबली अनंत सिंह समेत पांच लोगों पर केस दर्ज कर ली गई है। मृत दुलारचंद यादव के पोते के दिए गए बयान पर अनंत सिंह, दो भतीजों रणवीर सिंह, कर्मवीर सिंह, करीबी छोटन सिंह और कंजय सिंह पर नामजद और कई अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। यानी दुलारचंद यादव के परिजनों और जन सुराज पार्टी के समर्थकों ने सीधे तौर पर JDU उम्मीदवार और बाहुबली नेता अनंत सिंह के समर्थकों पर हत्या का आरोप लगाया है। अनंत सिंह ने आरोपों को किया खारिज वहीं इस बयान पर JDU उम्मीदवार अनंत सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे RJD उम्मीदवार वीणा देवी के पति बाहुबली सूरजभान सिंह की साजिश बताया है। अनंत सिंह ने कहा कि उनके काफिले पर विरोधियों ने हमला किया और यह सारा खेल सूरजभान सिंह करवा रहे हैं। कौन थे दुलारचंद यादव ? मोकामा के रहने वाले दुलारचंद यादव को ‘टाल का बादशाह’ कहा जाता था। दुलारचंद पहलवानी के साथ-साथ गाना गाने के भी शौकीन थे। उन्होंने जन सुराज के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के लिए एक गाना भी रिकॉर्ड करवाया था। माना जा रहा है कि मोकामा की चुनावी जंग अब व्यक्तिगत रंजिश और हिंसक टकराव की तरफ मुड़ गई है।

नाती अगस्त्य की Ikkis का ट्रेलर देखकर इमोशनल हुए Amitabh Bachchan!

बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन एक बार फिर दादा होने का गर्व महसूस कर रहे हैं। दरअसल, उनके नाती अगस्त्य नंदा की अपकमिंग फिल्म ‘इक्कीस’ का ट्रेलर हाल ही में रिलीज़ हुआ है। ट्रेलर देखकर बिग बी इतने इमोशनल हो गए कि उन्होंने सोशल मीडिया पर एक दिल छू लेने वाला पोस्ट शेयर किया। अमिताभ ने अपने पोस्ट में लिखा, “ये तो बस शुरुआत है... गर्व है तुम्हारे इस सफर पर, मेरे बच्चे।” उनकी इस पोस्ट पर फैन्स और फिल्म इंडस्ट्री के सितारों ने जमकर प्यार लुटाया। ‘इक्कीस’ मेगास्टार मेघना गुलज़ार के निर्देशन में बनी है और इसमें अगस्त्य नंदा एक अहम किरदार निभा रहे हैं। फिल्म 1971 के युद्ध के हीरो अरुण खेत्रपाल की कहानी पर आधारित है, जो देश के सबसे युवा परमवीर चक्र विजेता थे। फिल्म के ट्रेलर में अगस्त्य का जोश और समर्पण देखकर फैन्स कह रहे हैं—“दादा की तरह नाती भी लाजवाब!” तो देखना दिलचस्प होगा कि क्या अगस्त्य अपनी पहली ही फिल्म से दादा अमिताभ की विरासत को आगे बढ़ा पाएंगे।

अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, फाइटर जेट में उड़ान भरने वाली दूसरी महिला राष्ट्रपति

Lucknow Desk: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज बुधवार को भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान राफेल में उड़ान भरकर इतिहास रच दिया है। इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुखोई-3 MKI लड़ाकू विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। राष्ट्रपति की इस उड़ान ने आज भारतीय वायुसेना के साथ-साथ पूरे देश को गौरव से भर दिया है। बता दें, भारत का राष्ट्रपति तीनों सेनाओं की कमांडर होता है और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर मौजूद हैं। अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज सुबह अंबाला एयरबेस पहुंचीं, जहां वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह और वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। बता दें, राष्ट्रपति का यह उड़ान न केवल साहसिक नेतृत्व शैली का प्रतीक है, बल्कि भारत की बढ़ती रक्षा क्षमता और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को वैश्विक पटल पर मजबूती से प्रदर्शित करना भी है। फाइटर जेट में उड़ान भरने वाली दूसरी महिला राष्ट्रपति मुर्मू राष्ट्रपति मुर्मू ने फाइटर जेट की सवारी ये पहली बार नहीं की हैं। उन्होंने इससे पहले 8 अप्रैल 2023 को असम के तेजपुर एयरफोर्स स्टेशन से सुखोई-30 MKI फाइटर विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। वह फाइटर जेट उड़ाने वाली तीसरी राष्ट्रपति और दूसरी महिला राष्ट्राध्यक्ष बनी थीं। राष्ट्रपति मुर्मू ने से पहले पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और प्रतिभा पाटिल ने भी सुखोई-30 MKI में उड़ान भरी थी। राफेल लड़ाकू विमान का क्या है इतिहास? बता दें, राफेल लड़ाकू विमान फ्रांसीसी कंपनी दसॉ एविएशन द्वारा निर्मित किया गया है। सितंबर 2020 में अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर भारतीय वायुसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था। अंबाला एयरबेस राफेल स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरोज' का मुख्य केंद्र है। इन विमानों का इस्तेमाल हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान किया गया था, इसके माध्यम से आतंकवादी ठिकानों पर हमले कर अपनी ताकत को सैनियों ने दिखाया था।

Brijbhushan Sharan Singh के हेलीकॉप्टर की खेत में इमरजेंसी लैंडिंग! इस वजह से बिगड़ा संतुलन

Lucknow Desk: कैसरगंज के बीजेपी नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के हेलीकॉप्टर को धान के खेत में अचानक उतारना पड़ा। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि तकनीकी खराबी आने के बाद पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतारा, जहां हेलीकॉप्टर देखने के लिए ग्रामीण भी जुट गए। मिली जानकारी के मुताबिक, बृजभूषण शरण सिंह एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। उड़ान के कुछ ही मिनट बाद हेलीकॉप्टर में तकनीकी दिक्कत आने लगी। स्थिति को समझते हुए पायलट ने तुरंत इमरजेंसी लैंडिंग का फैसला लिया और नज़दीकी धान के खेत में हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतार दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। हेलीकॉप्टर की जांच के लिए टेक्निकल टीम बुलाई गई है। फिलहाल राहत की बात यह है कि बृजभूषण शरण सिंह और हेलीकॉप्टर में मौजूद सभी लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं। जांच के बाद ही तकनीकी खराबी की असली वजह पता चल पाएगी। इसी बीच पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर संदेश दिया। उन्होंने कहा, आज मेरा बिहार प्रदेश के अंदर संदेश व दिनारा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सभा का कार्यक्रम था। संदेश विधानसभा का कार्यक्रम करके मैं दिनारा विधानसभा के लिए हेलीकाप्टर से निकला था। अचानक मौसम खराब होने के कारण हेलीकाप्टर की सुरक्षित लैंडिंग एक खेत में करानी पड़ी। पायलट ने बड़ी सूझबूझ से लैंडिंग कराई। मैं, इस समय गाड़ी से पटना जा रहा हूं। किसी अफवाह में आने की जरूरत नहीं है। किसी प्रकार की कोई हानि नहीं हुई है। हम सभी पूर्णतया सुरक्षित हैं। हेलीकाप्टर की सुरक्षा का प्रबंध कर दिया गया है। प्रशासन व जनता का बहुत सहयोग रहा...धन्यवाद

Shahrukh Khan ने मनाया 60वां जन्मदिन, विदेशों से भी जुटे फैंस

Lucknow Desk: आज 02 नवंबर 2025 को बॉलीवुड के बादशाह Shahrukh Khan ने अपने 60वें जन्मदिन का जश्न मनाया। इस मौके पर उन्होंने अपने परिवार, करीबियों और फिल्म इंडस्ट्री के दोस्तों के साथ खुशियाँ बाँटी। उन्होंने अपने आलीशान घर के बजाय इस बार सार्वजनिक रूप से Mannat से बाहर नहीं दिखने का फैसला किया क्योंकि वहाँ फिलहाल निर्माण का काम चल रहा है। वहीँ, जश्न के लिए उन्होंने Alibaug में स्थित निजी स्थान चुना। एक विशेष फैन-मीट कार्यक्रम Balgandharva Rangmandir, बांद्रा में आयोजित किया गया था, जहाँ सीमित प्रवेश पास के माध्यम से प्रशंसक सीधे शामिल हुए। सोशल मीडिया पर सितारों ने बधाइयाँ दीं। जिसमें Farah Khan ने लिखा, “Happy birthday KING … rule for another 100 years”। बता दें कि Shahrukh Khan के जन्मदिन के मौके पर सिर्फ भारत भर से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी फैंस जुटे। शाहरुख खान के फैन क्लबों ने जन्मदिन सप्ताह के रूप में मनाया, चैरिटी ड्राइव, विशेष बैनर आदि के माध्यम से ख़ास अंदाज़ से जश्न मनाया।

दिल्ली में CJP प्रदर्शनकारियों से जुड़े 13 मुकदमे वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करती पुलिस
दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला, CJP प्रदर्शनकारियों से जुड़े 13 मुकदमे होंगे वापस

31 जुलाई 2026 को दिल्ली में CJP आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। दिल्ली सरकार ने पुलिस को CJP के प्रदर्शन के दौरान दर्ज किए गए 13 मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है। ये मामले 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद की ओर निकाले गए ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान हुई हिंसा, अव्यवस्था और पुलिस से टकराव के संबंध में दर्ज किए गए थे।   हालांकि, यह राहत सभी प्रदर्शनकारियों को नहीं मिलेगी। दिल्ली सरकार के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जिन लोगों का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड है या जिनकी भूमिका गंभीर अपराधों में पाई गई है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रह सकती है। सामान्य और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई प्रतिकूल कानूनी कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया गया है।   20 जुलाई के प्रदर्शन के बाद दर्ज हुई थीं FIR CJP ने परीक्षा पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में कथित भ्रष्टाचार और छात्रों की समस्याओं को लेकर दिल्ली में लंबे समय तक आंदोलन किया था। 20 जुलाई को बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर जमा हुए और संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेड लगाए थे।   इसके बाद कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया था। इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन से संबंधित हिंसा और अन्य घटनाओं को लेकर 13 FIR दर्ज की थीं।   गिरफ्तार लोगों के मामलों की होगी समीक्षा दिल्ली सरकार के गृह विभाग ने पुलिस को निर्देश दिया है कि इन मामलों में पहले से गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए लोगों की स्थिति की जल्द समीक्षा की जाए। जिन लोगों के खिलाफ कोई गंभीर आरोप या पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उनकी रिहाई की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा सकती है।   इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी विभिन्न राज्यों से कहा था कि CJP आंदोलन के दौरान हिरासत में लिए गए ऐसे प्रदर्शनकारियों को रिहा किया जाए, जिनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। अदालत ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को महत्वपूर्ण बताते हुए पुलिस कार्रवाई की समीक्षा करने की आवश्यकता पर जोर दिया था।   FIR वापस लेने की कानूनी प्रक्रिया जरूरी दिल्ली सरकार के आदेश के बाद भी मुकदमे तुरंत समाप्त नहीं माने जाएंगे। FIR वापस लेने के लिए पुलिस और सरकारी वकीलों को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। जिन मामलों में अदालत में आरोपपत्र दाखिल हो चुका है, उनमें मुकदमा वापस लेने के लिए अदालत की अनुमति भी आवश्यक हो सकती है।   इसलिए “दिल्ली पुलिस ने सभी मुकदमे खत्म कर दिए” लिखना अभी पूरी तरह सही नहीं होगा। सही स्थिति यह है कि दिल्ली सरकार ने 13 FIR वापस लेने का आदेश दिया है और दिल्ली पुलिस कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आगे की कार्रवाई करेगी।   CJP ने औपचारिक वापसी की मांग की CJP ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है, लेकिन संगठन ने कहा है कि केवल मामलों को बंद करने का आश्वासन पर्याप्त नहीं है। CJP नेता सौरव दास ने मांग की है कि सभी संबंधित FIR को औपचारिक रूप से वापस लिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार समझौते के अनुसार कार्रवाई नहीं करती है, तो संगठन दोबारा सड़कों पर उतर सकता है।   CJP का कहना है कि आंदोलन समाप्त करते समय सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने और भविष्य में सामान्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन दिया था। हालांकि, आपराधिक पृष्ठभूमि वाले और हिंसक घटनाओं में शामिल लोगों के मामले अलग रखे गए हैं।   प्रदर्शनकारियों के लिए बड़ी राहत दिल्ली सरकार का यह फैसला उन छात्रों, युवाओं और सामान्य नागरिकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जो आंदोलन में शामिल हुए थे। सरकार का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को कानूनी परेशानियों से बचाया जाएगा, लेकिन हिंसा या गंभीर अपराध में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।   अब सभी की नजर इस बात पर है कि दिल्ली पुलिस 13 FIR वापस लेने की कानूनी प्रक्रिया कितनी जल्दी पूरी करती है और गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों की समीक्षा के बाद कितने लोगों को राहत मिलती है।

TV 24 Network July 31, 2026 0
वंदे मातरम् को कानूनी संरक्षण देने वाला संशोधन विधेयक संसद से पारित

वंदे मातरम् को मिलेगा राष्ट्रगान जैसा कानूनी संरक्षण, संसद के दोनों सदनों से विधेयक पारित

असम में बाढ़ से प्रभावित गांव और राहत अभियान चलाते बचावकर्मी

असम में बाढ़ के बाद मुश्किलें बरकरार, लाखों लोगों के सामने घर और रोजगार बचाने की चुनौती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आंध्र प्रदेश में भोगापुरम अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का उद्घाटन करते हुए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1 अगस्त को आंध्र प्रदेश जाएंगे, भोगापुरम एयरपोर्ट का कर सकते हैं उद्घाटन

लोकसभा में एंटी-पेपर लीक संशोधन बिल 2026 पारित होने का प्रतीकात्मक दृश्य
लोकसभा से एंटी-पेपर लीक बिल पारित, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई

सरकारी भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, फर्जीवाड़ा और संगठित नकल रोकने के लिए लोकसभा ने एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक पारित कर दिया है। लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को 27 जुलाई 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था और 29 जुलाई 2026 को सदन ने इसे पारित कर दिया। यह विधेयक वर्ष 2024 के मौजूदा कानून को अधिक सख्त बनाने के उद्देश्य से लाया गया है।   पेपर लीक में शामिल व्यक्ति को क्या सजा मिलेगी? नए विधेयक में अलग-अलग प्रकार के अपराधों के लिए अलग सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है। किसी व्यक्ति द्वारा पेपर लीक करने, प्रश्नपत्र प्राप्त करने, उत्तर उपलब्ध कराने या परीक्षा में अन्य अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने पर पांच से दस साल तक की जेल हो सकती है।   ऐसे व्यक्ति पर ₹50 लाख तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। पुराने कानून में इस अपराध के लिए तीन से पांच साल की जेल और ₹10 लाख तक जुर्माने का प्रावधान था। नए संशोधन में जेल की अवधि और जुर्माना दोनों बढ़ाए गए हैं।   परीक्षा सेवा प्रदाता पर ₹5 करोड़ तक जुर्माना सरकारी परीक्षाओं को आयोजित कराने वाली एजेंसी या सेवा प्रदाता कंपनी यदि पेपर लीक अथवा किसी अन्य गड़बड़ी में शामिल पाई जाती है, तो उस पर ₹5 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।   पुराने कानून में सेवा प्रदाता संस्था पर अधिकतम ₹1 करोड़ जुर्माने का प्रावधान था। इसके साथ ही दोषी एजेंसी को आठ साल तक किसी सार्वजनिक परीक्षा को आयोजित करने की जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। पहले यह प्रतिबंध चार साल के लिए था।   यदि कंपनी के जिम्मेदार अधिकारी अपराध में शामिल पाए जाते हैं, तो उन्हें कम से कम पांच साल की जेल और ₹5 करोड़ तक जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।   संगठित अपराध के लिए ₹10 करोड़ जुर्माना पेपर लीक को किसी गिरोह, संस्था या नेटवर्क द्वारा संगठित तरीके से अंजाम देने पर सबसे कठोर सजा का प्रावधान किया गया है। ऐसे संगठित अपराध में दोषी पाए जाने वाले लोगों को सात से दस साल तक की जेल हो सकती है।   इसके साथ ही उन पर कम से कम ₹10 करोड़ का जुर्माना लगाया जाएगा। इसलिए ₹10 करोड़ का प्रावधान सामान्य व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि संगठित पेपर लीक अपराध से जुड़े मामलों के लिए है। विधेयक में अपराध से अर्जित संपत्ति को जब्त करने की व्यवस्था भी रखी गई है।   दो महीने में जांच पूरी करने का लक्ष्य नए संशोधन विधेयक में परीक्षा गड़बड़ी के मामलों की जांच के लिए समय-सीमा निर्धारित की गई है। मामला दर्ज होने के बाद जांच दो महीने के भीतर पूरी करने का प्रावधान है। केंद्र सरकार गंभीर मामलों की जांच के लिए विशेष टास्क फोर्स भी बना सकेगी।   हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में इन मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाया जाएगा। आरोपपत्र दाखिल होने के बाद मुकदमे को तीन महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा मामलों की सुनवाई रोजाना आधार पर किए जाने का प्रावधान भी है।   किन परीक्षाओं पर लागू होगा कानून? यह कानून संघ लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग, रेलवे भर्ती बोर्ड, बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी और केंद्र सरकार के मंत्रालयों द्वारा आयोजित सार्वजनिक परीक्षाओं पर लागू होगा।   सरकार का कहना है कि कठोर सजा, तेज जांच और फास्ट ट्रैक अदालतों से परीक्षा माफिया पर रोक लगेगी। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि कानून के साथ परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा, तकनीक और प्रशासनिक निगरानी को भी मजबूत करना आवश्यक होगा। यह विधेयक अभी लोकसभा से पारित हुआ है। कानून बनने के लिए इसे आगे की संसदीय प्रक्रिया और राष्ट्रपति की मंजूरी पूरी करनी होगी।

TV 24 Network July 30, 2026 0
उत्तराखंड में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण बंद पहाड़ी सड़क

उत्तराखंड में भारी बारिश से 111 रास्ते बंद, आठ जिलों में अलर्ट जारी

असम में बाढ़ प्रभावित गांव में नाव से लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाती बचाव टीम

असम बाढ़ 2026: 75 लोगों की मौत, कई गांव जलमग्न, राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी

CJP ने FIR वापसी और छात्रों की रिहाई के लिए दोबारा आंदोलन की चेतावनी दी

CJP ने दोबारा आंदोलन शुरू करने की दी चेतावनी, FIR वापसी और छात्रों की रिहाई की मांग

लखनऊ अग्निकांड के बाद चार मंजिला अवैध इमारत पर बुलडोजर चलाता LDA
लखनऊ अग्निकांड: 15 मौतों के बाद जागा प्रशासन, अवैध इमारत पर चला बुलडोजर

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। लखनऊ विकास प्राधिकरण यानी LDA ने अलीगंज इलाके में स्थित चार मंजिला अवैध इमारत को बुलडोजर से गिराने की कार्रवाई शुरू कर दी है। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आसपास के लगभग 700 मीटर क्षेत्र को सील कर दिया गया।   15 लोगों की गई थी जान लखनऊ के अलीगंज इलाके में 22 जून 2026 को एक इमारत में भीषण आग लग गई थी। इस दर्दनाक हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई थी। घटना के बाद इमारत की सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण नियमों को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।   जांच के दौरान इमारत में कई प्रकार की अनियमितताएं सामने आने की बात कही गई। बताया गया कि भवन का निर्माण नियमों के अनुसार नहीं किया गया था और जरूरी सुरक्षा मानकों की भी अनदेखी की गई थी। अग्निकांड के बाद LDA ने इमारत की जांच करते हुए ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की थी। 10 जुलाई को दिया गया था आदेश लखनऊ विकास प्राधिकरण ने इस चार मंजिला इमारत को गिराने का आदेश 10 जुलाई 2026 को जारी किया था। इसके बाद इमारत पर नोटिस भी चस्पा किया गया। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद 25 जुलाई को बुलडोजर और अन्य मशीनों की मदद से भवन को गिराने का काम शुरू किया गया।   कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए प्रशासन ने पहले से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। इमारत के आसपास रहने वाले लोगों और दुकानदारों को सुरक्षित दूरी पर रहने के निर्देश दिए गए।   700 मीटर तक इलाका किया गया सील बुलडोजर कार्रवाई के दौरान इमारत के आसपास लगभग 700 मीटर तक के क्षेत्र को सील कर दिया गया। रास्ते पर आम लोगों और वाहनों की आवाजाही रोक दी गई। मौके पर तीन थानों की पुलिस फोर्स और 100 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया।   LDA के अधिकारी और कर्मचारी भी मौके पर मौजूद रहे। बड़ी इमारत होने के कारण ध्वस्तीकरण का काम सावधानी से किया गया, ताकि आसपास के मकानों, दुकानों और राहगीरों को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे।   अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल इस अग्निकांड के बाद केवल इमारत मालिक ही नहीं, बल्कि संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। मामले में छह PCS अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके साथ ही भवनों के नक्शे और फायर सेफ्टी नियमों को लेकर सख्ती बढ़ाने की तैयारी भी की गई।   अवैध निर्माण पर प्रशासन का सख्त संदेश इस कार्रवाई के माध्यम से प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी करके बनाए गए अवैध भवनों को बख्शा नहीं जाएगा। यह हादसा बताता है कि बिना नक्शा पास कराए, फायर सेफ्टी व्यवस्था और इमरजेंसी निकास के बिना बनाई गई इमारतें लोगों की जान के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं। हालांकि, इमारत से जुड़े लोगों की ओर से बुलडोजर कार्रवाई को अदालत में चुनौती देने की तैयारी किए जाने की बात भी सामने आई है।

TV 24 Network July 25, 2026 0
पेपर लीक मामलों की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

पेपर लीक पर केंद्र सरकार सख्त, जल्द सुनवाई के लिए बनेंगे विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट

गोरखपुर में ₹994 करोड़ की 14 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

गोरखपुर में विकास की बड़ी सौगात, CM योगी ने ₹994 करोड़ की 14 परियोजनाओं का किया लोकार्पण और शिलान्यास

खराब गोला-बारूद से 62.10 करोड़ रुपये के नुकसान और धनुष तोप प्रोजेक्ट पर PAC की रिपोर्ट

खराब गोला-बारूद से 62.10 करोड़ का नुकसान, धनुष प्रोजेक्ट की देरी पर PAC ने उठाए सवाल

0 Comments