Lucknow Desk: लखनऊ के ठाकुरगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत रेलवे कॉलोनी बालागंज में बीते रविवार को 14 साल की किशोरी का शव फंदे से लटका मिला। परिजनों ने दुष्कर्म के विरोध में किशोरी की हत्या का करने का आरोप लगाया है। मिली जानकारी के अनुसार, किशोरी पिछले एक साल से राघव नामक व्यक्ति के घर में घरेलू सहायिका का काम करती थी। घटना के बाद परिजनों ने मकान मालिक पर दुष्कर्म और हत्या का आरोप लगाते हुए मायापुरम और बालागंज इलाके में सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया। मौके पर पहुंचकर पुलिस ने प्रदर्शन शांत कराया।
मिली जानकारी के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किशोरी की मौत का कारण हैगिंग सामने आया है। डॉक्टरों ने दुष्कर्म की जांच के लिए स्लाइड बनाई है और उसे परीक्षण के लिए भेजा गया है। फिलहाल, पुलिस ने हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर मकान मालिक के बेटे को हिरासत में ले लिया है।
किशोरी मूल रूप से सीतापुर की रहने वाली थी। वह परिवार के साथ रहती थी। किशोरी के पिता ने बताया कि बेटी बीते एक साल से बालागंज की रेलवे कॉलोनी में रहने वाले बोकारो स्टील प्लांट से रिटायर्ड बुजुर्ग के मकान में रहकर घरेलू काम करती थी। होली के मौके पर वह दो दिन के लिए घर भी आई थी। होली के बाद वह वापस काम पर लौट गई। इसके बाद रविवार दोपहर बुजुर्ग की पत्नी ने फोन कर बताया कि किशोरी ने फंदा लगा लिया है, तभी परिजन मौके पर पहुंचे।
वहीं किशोरी की मां ने बताया कि रविवार दोपहर किशोरी से ऊपर वाले कमरे में जाकर काम करने के लिए कहा था। काफी देर तक जब वह नहीं लौटी तो उन्होंने बेटे को ऊपर के कमरे में जाकर देखने के लिए कहा। वह जब वहां पहुंचा तो उसने किशोरी को पंखे से दुपट्टे के सहारे लटका हुआ देखा। फिर मौके पर पुलिस पहुंची तो किशोरी को ट्रामा सेंटर ले गई, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
Lucknow Desk: बिहार के मोकामा से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ चुनाव प्रचार के दौरान हमला किया गया। इस घटना में जानी-मानी हस्ती दुलारचंद यादव की हत्या हो गई है और आरोप लगाया गया है कि इस घटना में पूर्व विधायक अनंत सिंह के समर्थकों की भूमिका है। यह घटना आगामी विधानसभा चुनाव के बीच हुई है, जिससे राज्य में कानून-व्यवस्था और चुनावी हिंसा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अनंत सिंह समेत 5 नामजद मोकामा में दुलारचंद यादव की हत्या मामले में JDU प्रत्याशी बाहुबली अनंत सिंह समेत पांच लोगों पर केस दर्ज कर ली गई है। मृत दुलारचंद यादव के पोते के दिए गए बयान पर अनंत सिंह, दो भतीजों रणवीर सिंह, कर्मवीर सिंह, करीबी छोटन सिंह और कंजय सिंह पर नामजद और कई अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। यानी दुलारचंद यादव के परिजनों और जन सुराज पार्टी के समर्थकों ने सीधे तौर पर JDU उम्मीदवार और बाहुबली नेता अनंत सिंह के समर्थकों पर हत्या का आरोप लगाया है। अनंत सिंह ने आरोपों को किया खारिज वहीं इस बयान पर JDU उम्मीदवार अनंत सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे RJD उम्मीदवार वीणा देवी के पति बाहुबली सूरजभान सिंह की साजिश बताया है। अनंत सिंह ने कहा कि उनके काफिले पर विरोधियों ने हमला किया और यह सारा खेल सूरजभान सिंह करवा रहे हैं। कौन थे दुलारचंद यादव ? मोकामा के रहने वाले दुलारचंद यादव को ‘टाल का बादशाह’ कहा जाता था। दुलारचंद पहलवानी के साथ-साथ गाना गाने के भी शौकीन थे। उन्होंने जन सुराज के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के लिए एक गाना भी रिकॉर्ड करवाया था। माना जा रहा है कि मोकामा की चुनावी जंग अब व्यक्तिगत रंजिश और हिंसक टकराव की तरफ मुड़ गई है।
बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन एक बार फिर दादा होने का गर्व महसूस कर रहे हैं। दरअसल, उनके नाती अगस्त्य नंदा की अपकमिंग फिल्म ‘इक्कीस’ का ट्रेलर हाल ही में रिलीज़ हुआ है। ट्रेलर देखकर बिग बी इतने इमोशनल हो गए कि उन्होंने सोशल मीडिया पर एक दिल छू लेने वाला पोस्ट शेयर किया। अमिताभ ने अपने पोस्ट में लिखा, “ये तो बस शुरुआत है... गर्व है तुम्हारे इस सफर पर, मेरे बच्चे।” उनकी इस पोस्ट पर फैन्स और फिल्म इंडस्ट्री के सितारों ने जमकर प्यार लुटाया। ‘इक्कीस’ मेगास्टार मेघना गुलज़ार के निर्देशन में बनी है और इसमें अगस्त्य नंदा एक अहम किरदार निभा रहे हैं। फिल्म 1971 के युद्ध के हीरो अरुण खेत्रपाल की कहानी पर आधारित है, जो देश के सबसे युवा परमवीर चक्र विजेता थे। फिल्म के ट्रेलर में अगस्त्य का जोश और समर्पण देखकर फैन्स कह रहे हैं—“दादा की तरह नाती भी लाजवाब!” तो देखना दिलचस्प होगा कि क्या अगस्त्य अपनी पहली ही फिल्म से दादा अमिताभ की विरासत को आगे बढ़ा पाएंगे।
Lucknow Desk: कैसरगंज के बीजेपी नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के हेलीकॉप्टर को धान के खेत में अचानक उतारना पड़ा। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि तकनीकी खराबी आने के बाद पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतारा, जहां हेलीकॉप्टर देखने के लिए ग्रामीण भी जुट गए। मिली जानकारी के मुताबिक, बृजभूषण शरण सिंह एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। उड़ान के कुछ ही मिनट बाद हेलीकॉप्टर में तकनीकी दिक्कत आने लगी। स्थिति को समझते हुए पायलट ने तुरंत इमरजेंसी लैंडिंग का फैसला लिया और नज़दीकी धान के खेत में हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतार दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। हेलीकॉप्टर की जांच के लिए टेक्निकल टीम बुलाई गई है। फिलहाल राहत की बात यह है कि बृजभूषण शरण सिंह और हेलीकॉप्टर में मौजूद सभी लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं। जांच के बाद ही तकनीकी खराबी की असली वजह पता चल पाएगी। इसी बीच पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर संदेश दिया। उन्होंने कहा, आज मेरा बिहार प्रदेश के अंदर संदेश व दिनारा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सभा का कार्यक्रम था। संदेश विधानसभा का कार्यक्रम करके मैं दिनारा विधानसभा के लिए हेलीकाप्टर से निकला था। अचानक मौसम खराब होने के कारण हेलीकाप्टर की सुरक्षित लैंडिंग एक खेत में करानी पड़ी। पायलट ने बड़ी सूझबूझ से लैंडिंग कराई। मैं, इस समय गाड़ी से पटना जा रहा हूं। किसी अफवाह में आने की जरूरत नहीं है। किसी प्रकार की कोई हानि नहीं हुई है। हम सभी पूर्णतया सुरक्षित हैं। हेलीकाप्टर की सुरक्षा का प्रबंध कर दिया गया है। प्रशासन व जनता का बहुत सहयोग रहा...धन्यवाद
Lucknow Desk: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज बुधवार को भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान राफेल में उड़ान भरकर इतिहास रच दिया है। इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुखोई-3 MKI लड़ाकू विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। राष्ट्रपति की इस उड़ान ने आज भारतीय वायुसेना के साथ-साथ पूरे देश को गौरव से भर दिया है। बता दें, भारत का राष्ट्रपति तीनों सेनाओं की कमांडर होता है और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर मौजूद हैं। अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज सुबह अंबाला एयरबेस पहुंचीं, जहां वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह और वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। बता दें, राष्ट्रपति का यह उड़ान न केवल साहसिक नेतृत्व शैली का प्रतीक है, बल्कि भारत की बढ़ती रक्षा क्षमता और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को वैश्विक पटल पर मजबूती से प्रदर्शित करना भी है। फाइटर जेट में उड़ान भरने वाली दूसरी महिला राष्ट्रपति मुर्मू राष्ट्रपति मुर्मू ने फाइटर जेट की सवारी ये पहली बार नहीं की हैं। उन्होंने इससे पहले 8 अप्रैल 2023 को असम के तेजपुर एयरफोर्स स्टेशन से सुखोई-30 MKI फाइटर विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। वह फाइटर जेट उड़ाने वाली तीसरी राष्ट्रपति और दूसरी महिला राष्ट्राध्यक्ष बनी थीं। राष्ट्रपति मुर्मू ने से पहले पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और प्रतिभा पाटिल ने भी सुखोई-30 MKI में उड़ान भरी थी। राफेल लड़ाकू विमान का क्या है इतिहास? बता दें, राफेल लड़ाकू विमान फ्रांसीसी कंपनी दसॉ एविएशन द्वारा निर्मित किया गया है। सितंबर 2020 में अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर भारतीय वायुसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था। अंबाला एयरबेस राफेल स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरोज' का मुख्य केंद्र है। इन विमानों का इस्तेमाल हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान किया गया था, इसके माध्यम से आतंकवादी ठिकानों पर हमले कर अपनी ताकत को सैनियों ने दिखाया था।
Lucknow Desk: आज 02 नवंबर 2025 को बॉलीवुड के बादशाह Shahrukh Khan ने अपने 60वें जन्मदिन का जश्न मनाया। इस मौके पर उन्होंने अपने परिवार, करीबियों और फिल्म इंडस्ट्री के दोस्तों के साथ खुशियाँ बाँटी। उन्होंने अपने आलीशान घर के बजाय इस बार सार्वजनिक रूप से Mannat से बाहर नहीं दिखने का फैसला किया क्योंकि वहाँ फिलहाल निर्माण का काम चल रहा है। वहीँ, जश्न के लिए उन्होंने Alibaug में स्थित निजी स्थान चुना। एक विशेष फैन-मीट कार्यक्रम Balgandharva Rangmandir, बांद्रा में आयोजित किया गया था, जहाँ सीमित प्रवेश पास के माध्यम से प्रशंसक सीधे शामिल हुए। सोशल मीडिया पर सितारों ने बधाइयाँ दीं। जिसमें Farah Khan ने लिखा, “Happy birthday KING … rule for another 100 years”। बता दें कि Shahrukh Khan के जन्मदिन के मौके पर सिर्फ भारत भर से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी फैंस जुटे। शाहरुख खान के फैन क्लबों ने जन्मदिन सप्ताह के रूप में मनाया, चैरिटी ड्राइव, विशेष बैनर आदि के माध्यम से ख़ास अंदाज़ से जश्न मनाया।
उत्तर प्रदेश में महर्षि वाल्मीकि जयंती को लेकर सार्वजनिक अवकाश की खबर सामने आई है। इस अवसर पर भगवान वाल्मीकि के जीवन, उनके साहित्यिक योगदान और सामाजिक संदेश को याद किया जाता है। हालांकि, 26 अक्टूबर 2026 को प्रदेश में अवकाश लागू होने की आधिकारिक पुष्टि संबंधित सरकारी आदेश से की जानी चाहिए। अवकाश की स्थिति के अनुसार सरकारी कार्यालयों, स्कूलों और अन्य संस्थानों के कामकाज पर असर पड़ सकता है। महर्षि वाल्मीकि को भारतीय साहित्य में रामायण के रचयिता के रूप में विशेष स्थान प्राप्त है। उनकी रचना रामायण भारतीय संस्कृति, साहित्य और धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। हर वर्ष उनकी जयंती पर विभिन्न स्थानों पर धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। महर्षि वाल्मीकि के जीवन और योगदान को किया जाता है याद महर्षि वाल्मीकि का नाम भारतीय साहित्य की प्राचीन परंपरा में प्रमुखता से लिया जाता है। रामायण के माध्यम से उन्होंने भगवान राम के जीवन, आदर्शों, कर्तव्य और मर्यादा से जुड़े प्रसंगों को प्रस्तुत किया। उनकी रचना का प्रभाव भारतीय समाज, लोककथाओं, कला और सांस्कृतिक परंपराओं में लंबे समय से देखा जाता रहा है। वाल्मीकि जयंती के अवसर पर उनके विचारों और साहित्यिक योगदान पर चर्चा की जाती है। कई स्थानों पर शोभायात्राएं, पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और सामुदायिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों का उद्देश्य महर्षि वाल्मीकि के संदेश को लोगों तक पहुंचाना और उनके योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त करना होता है। बिठूर में कार्यक्रम को लेकर जानकारी कानपुर के ऐतिहासिक क्षेत्र बिठूर का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। यहां समय-समय पर विभिन्न धार्मिक अवसरों पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के महर्षि वाल्मीकि जयंती से संबंधित कार्यक्रम में शामिल होने की जानकारी की पुष्टि आधिकारिक कार्यक्रम सूची या राज्य सरकार की सूचना से की जानी चाहिए। यदि किसी जिले में विशेष आयोजन निर्धारित है, तो स्थानीय प्रशासन की ओर से सुरक्षा, यातायात और आयोजन संबंधी व्यवस्थाएं की जा सकती हैं। नागरिकों को कार्यक्रम के समय और स्थान की जानकारी आधिकारिक सूचना से प्राप्त करनी चाहिए। अवकाश की आधिकारिक सूचना देखना जरूरी अभिभावकों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों को स्कूलों तथा सरकारी कार्यालयों में अवकाश की स्थिति जानने के लिए संबंधित विभाग का आदेश देखना चाहिए। सभी निजी संस्थानों पर अवकाश लागू होने की स्थिति उनके नियमों और जारी निर्देशों पर निर्भर कर सकती है। महर्षि वाल्मीकि जयंती भारतीय साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को याद करने का अवसर है। इस दिन उनके योगदान और आदर्शों पर चर्चा के साथ सामाजिक सद्भाव और शिक्षा के महत्व को भी रेखांकित किया जाता है।
उत्तर प्रदेश में सर्दियों के दौरान एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले वाहन चालकों को अपनी रफ्तार पर विशेष ध्यान देना होगा। कोहरे के कारण सड़क पर दिखाई देने की दूरी कम होने और दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने नई शीतकालीन यातायात व्यवस्था तैयार की है। इसके तहत 1 नवंबर 2026 से 15 फरवरी 2027 तक वाहनों की अधिकतम गति सीमा में बदलाव किया जाएगा। नई व्यवस्था का उद्देश्य तेज रफ्तार पर नियंत्रण रखना और यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाना है। किन एक्सप्रेसवे पर लागू होगी व्यवस्था? यूपीडा की नई व्यवस्था आगरा-लखनऊ, पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गोरखपुर लिंक और गंगा एक्सप्रेसवे पर लागू होगी। इन मार्गों पर सर्दियों में यातायात की निगरानी बढ़ाई जाएगी। संबंधित अधिकारियों को 31 अक्टूबर तक आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। नवंबर से दो चरणों में बदलेगी गति सीमा नई व्यवस्था के तहत वाहनों की रफ्तार में दो चरणों में बदलाव होगा। 1 नवंबर से 15 नवंबर तक कार जैसे हल्के वाहनों की अधिकतम गति सीमा दिन में 100 किलोमीटर प्रति घंटा और रात में 80 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी। 15 नवंबर से 15 फरवरी तक यह सीमा दिन में 80 और रात में 60 किलोमीटर प्रति घंटा हो जाएगी। मध्यम और भारी यात्री वाहनों के लिए पहले चरण में दिन के समय अधिकतम गति सीमा 80 और रात में 60 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। दूसरे चरण में इसे घटाकर दिन में 60 और रात में 50 किलोमीटर प्रति घंटा किया जाएगा। मालवाहक ट्रक, डंपर और ट्रेलर जैसे वाहनों के लिए पहले चरण में दिन में 60 तथा रात में 50 किलोमीटर प्रति घंटा की सीमा निर्धारित की गई है। 15 नवंबर से इन वाहनों की अधिकतम गति दिन में 50 और रात में 40 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। स्पीड पर नजर रखेगा निगरानी सिस्टम एक्सप्रेसवे पर वाहनों की गति पर नजर रखने के लिए एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा। निर्धारित सीमा से अधिक गति से वाहन चलाने वालों के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। गश्ती दल और सुरक्षा कर्मचारी भी लगातार निगरानी करेंगे। घना कोहरा होने पर मिल सकती है मदद यदि दृश्यता 50 मीटर से कम हो जाती है, तो सुरक्षा दल पुलिस के समन्वय से वाहन चालकों को नजदीकी टोल प्लाजा, पेट्रोल पंप, रेस्तरां या अन्य सुरक्षित स्थान तक पहुंचने में मार्गदर्शन देंगे। आवश्यकता पड़ने पर वाहनों को समूह में आगे भेजने की व्यवस्था भी की जा सकती है। फॉग लाइट और चेतावनी बोर्ड लगाने की तैयारी सर्दियों में सुरक्षित सफर के लिए एक्सप्रेसवे के प्रवेश और निकास बिंदुओं पर फॉग लाइट लगाने, संवेदनशील स्थानों पर रिफ्लेक्टर और ब्लिंकर लगाने तथा साइनबोर्ड की स्थिति जांचने के निर्देश दिए गए हैं। टोल प्लाजा पर उद्घोषणा प्रणाली और रेडियो के माध्यम से भी वाहन चालकों को सावधानियों की जानकारी दी जाएगी। वाहन चालकों को क्या ध्यान रखना चाहिए? एक्सप्रेसवे पर यात्रा करने वालों को निर्धारित गति सीमा का पालन करना चाहिए। कोहरा होने पर आगे चल रहे वाहन से पर्याप्त दूरी बनाए रखना, अचानक ब्रेक लगाने से बचना और वाहन की लाइटों का सही इस्तेमाल करना जरूरी है। दृश्यता बहुत कम होने पर सुरक्षित स्थान पर रुकना बेहतर है। यूपीडा की इस पहल से सर्दियों में एक्सप्रेसवे पर यातायात को अधिक सुरक्षित बनाने की उम्मीद है। हालांकि, वाहन चालकों को मार्ग पर लगे आधिकारिक संकेतकों और संबंधित अधिकारियों के निर्देशों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में सिंचाई विभाग से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर जांच तेज हो गई है। आरोप है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 344 ऐसे लोगों के नाम पर कोषागार में खाते खुलवाकर करीब 16 करोड़ रुपये का एरियर भुगतान किया गया, जिनकी विभाग में नियुक्ति नहीं हुई थी। महालेखाकार प्रयागराज की ऑडिट टीम की जांच में संदिग्ध भुगतान का मामला सामने आया। इसके बाद संबंधित एकाउंटेंट को निलंबित कर दिया गया और पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की है। ऑडिट जांच में सामने आया मामला यह मामला मिर्जापुर कैनाल डिविजन के लघु डाल पंप कैनाल खंड से जुड़ा बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, महालेखाकार प्रयागराज की टीम ने 14 अक्टूबर से विभागीय रिकॉर्ड का ऑडिट शुरू किया था। जांच के दौरान 16 अक्टूबर को करीब 16 करोड़ रुपये के कथित फर्जी एरियर भुगतान का मामला सामने आया। ऑडिट टीम ने भुगतान से संबंधित दस्तावेजों और खातों की जांच के दौरान संदिग्ध लेनदेन की पहचान की। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को मामले की जानकारी दी गई। अब जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि भुगतान किस प्रक्रिया के तहत स्वीकृत हुआ और इसमें किन लोगों की भूमिका रही। 344 लोगों के नाम पर एरियर भुगतान का आरोप मामले में आरोप है कि विभाग में नियुक्ति नहीं होने के बावजूद 344 लोगों के नाम पर कोषागार में खाते खुलवाए गए। इसके बाद उनके नाम पर एरियर की रकम जारी कर दी गई। कुल भुगतान लगभग 16 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। एरियर का भुगतान आमतौर पर कर्मचारियों को वेतन संशोधन, वेतनवृद्धि या अन्य स्वीकृत बकाया राशि के रूप में किया जाता है। इसके लिए संबंधित कर्मचारी का रिकॉर्ड, वेतन निर्धारण और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन जरूरी होता है। ऐसे में इस मामले में बिल तैयार करने, दस्तावेजों की जांच करने और भुगतान को मंजूरी देने की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में है। एकाउंटेंट निलंबित, पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी मामला सामने आने के बाद मिर्जापुर कैनाल डिविजन के अधिशासी अभियंता प्रमोद कुमार की ओर से 18 अक्टूबर को शहर कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत के आधार पर एकाउंटेंट जितेंद्र कुमार और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके बाद संबंधित एकाउंटेंट को निलंबित कर दिया गया। हालांकि, प्राथमिकी दर्ज होने या किसी कर्मचारी के निलंबित होने का अर्थ यह नहीं है कि आरोप साबित हो चुके हैं। मामले में पुलिस की जांच और विभागीय स्तर पर जुटाए जा रहे साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अन्य विभागीय रिकॉर्ड की भी जांच ऑडिट टीम ने नलकूप और लघु डाल नहर प्रखंड कार्यालयों से जुड़े रिकॉर्ड की भी पड़ताल की। जांच में जनवरी से अगस्त 2026 के बीच कोषागार से पारित बिलों, वेतनवृद्धि के बाद दिए गए एरियर और सातवें वेतन आयोग के तहत वेतन निर्धारण से जुड़े भुगतान की जांच की जा रही है। इसके साथ ही वर्ष 2016 से अब तक तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों का विवरण भी मांगा गया है। इससे भुगतान प्रक्रिया में शामिल लोगों की जिम्मेदारी निर्धारित करने और संदिग्ध लेनदेन की अवधि का पता लगाने में मदद मिल सकती है। जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी स्थिति मिर्जापुर में सामने आए इस मामले ने सरकारी विभागों में वित्तीय निगरानी और भुगतान से पहले दस्तावेजों के सत्यापन की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल मामले में कथित 16 करोड़ रुपये के भुगतान, खातों के संचालन और भुगतान की स्वीकृति से जुड़े तथ्यों की पुष्टि जांच के जरिए की जानी है। पुलिस और विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में कौन-कौन जिम्मेदार है और सरकारी धन के कथित दुरुपयोग में किन लोगों की भूमिका रही