Lucknow Desk: उत्तर प्रदेश में डिजिटल क्रांति को नई रफ्तार देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना 'प्रोजेक्ट गंगा' की शुरुआत की है। राजधानी लखनऊ में लॉन्च की गई यह परियोजना राज्य के ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों को हाई-स्पीड इंटरनेट से जोड़ने का बड़ा अभियान है। सरकार का मानना है कि आने वाला समय पूरी तरह डिजिटल अर्थव्यवस्था का होगा और ऐसे में गांवों को तकनीक से जोड़ना बेहद जरूरी है।
'प्रोजेक्ट गंगा' का सबसे बड़ा लक्ष्य प्रदेश के 20 लाख से ज्यादा घरों तक हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड इंटरनेट पहुंचाना है। हालांकि यह योजना सिर्फ इंटरनेट उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए गांवों में आधुनिक डिजिटल सुविधाओं का पूरा नेटवर्क तैयार किया जाएगा। सरकार चाहती है कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी शहरों की तरह डिजिटल सेवाओं का लाभ उठा सकें और तकनीक की मुख्यधारा से जुड़ सकें।
इस परियोजना के तहत गांवों में एक मजबूत डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर नेटवर्क विकसित किया जाएगा। इसके माध्यम से लोगों को हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड, सार्वजनिक वाई-फाई, आईपीटीवी और ओटीटी जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यानी अब ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी बेहतर इंटरनेट और मनोरंजन सुविधाएं मिल सकेंगी। इसके अलावा सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी आधारित निगरानी व्यवस्था और साइबर सिक्योरिटी सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे गांवों में डिजिटल सुरक्षा को मजबूत बनाया जा सके।
प्रोजेक्ट गंगा का एक और अहम पहलू रोजगार और स्वरोजगार से जुड़ा हुआ है। सरकार का लक्ष्य है कि न्याय पंचायत स्तर पर करीब 8 से 10 हजार युवाओं को डिजिटल सेवा प्रदाता के रूप में तैयार किया जाए। ये युवा अपने क्षेत्रों में इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने का काम करेंगे। खास बात यह है कि इस पहल में महिलाओं की 50 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया है, जिससे महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिलेगा।
सरकार का मानना है कि डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ने से ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। अब गांवों में रहने वाले युवा फ्रीलांसिंग, रिमोट वर्क और ऑनलाइन ट्रेनिंग जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। इससे उन्हें रोजगार के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन करने की जरूरत कम होगी और वे अपने घर-परिवार के साथ रहकर ही आय के बेहतर अवसर हासिल कर सकेंगे।
युवाओं को डिजिटल उद्यमिता के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। यदि कोई युवा अपना डिजिटल कारोबार शुरू करना चाहता है, तो उसे पांच लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इस योजना के जरिए प्रदेश में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से एक लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन और हिंदुजा ग्रुप की सहयोगी कंपनी वनओटीटी एंटरटेनमेंट लिमिटेड के बीच 9 मार्च को एक समझौता ज्ञापन यानी एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह साझेदारी गांवों तक आधुनिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
योगी सरकार का कहना है कि डिजिटल कनेक्टिविटी केवल सुविधा नहीं, बल्कि भविष्य की आवश्यकता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, व्यापार और सरकारी सेवाओं तक आसान पहुंच के लिए इंटरनेट आज सबसे अहम माध्यम बन चुका है। ऐसे में प्रोजेक्ट गंगा ग्रामीण क्षेत्रों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, प्रोजेक्ट गंगा सिर्फ एक इंटरनेट परियोजना नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश के गांवों को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने का एक व्यापक अभियान है। यदि यह योजना अपने तय लक्ष्यों को हासिल करने में सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों की जिंदगी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। यही वजह है कि इसे यूपी को डिजिटल रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी पहल माना जा रहा है।
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Lucknow Desk: बिहार के मोकामा से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ चुनाव प्रचार के दौरान हमला किया गया। इस घटना में जानी-मानी हस्ती दुलारचंद यादव की हत्या हो गई है और आरोप लगाया गया है कि इस घटना में पूर्व विधायक अनंत सिंह के समर्थकों की भूमिका है। यह घटना आगामी विधानसभा चुनाव के बीच हुई है, जिससे राज्य में कानून-व्यवस्था और चुनावी हिंसा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अनंत सिंह समेत 5 नामजद मोकामा में दुलारचंद यादव की हत्या मामले में JDU प्रत्याशी बाहुबली अनंत सिंह समेत पांच लोगों पर केस दर्ज कर ली गई है। मृत दुलारचंद यादव के पोते के दिए गए बयान पर अनंत सिंह, दो भतीजों रणवीर सिंह, कर्मवीर सिंह, करीबी छोटन सिंह और कंजय सिंह पर नामजद और कई अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। यानी दुलारचंद यादव के परिजनों और जन सुराज पार्टी के समर्थकों ने सीधे तौर पर JDU उम्मीदवार और बाहुबली नेता अनंत सिंह के समर्थकों पर हत्या का आरोप लगाया है। अनंत सिंह ने आरोपों को किया खारिज वहीं इस बयान पर JDU उम्मीदवार अनंत सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे RJD उम्मीदवार वीणा देवी के पति बाहुबली सूरजभान सिंह की साजिश बताया है। अनंत सिंह ने कहा कि उनके काफिले पर विरोधियों ने हमला किया और यह सारा खेल सूरजभान सिंह करवा रहे हैं। कौन थे दुलारचंद यादव ? मोकामा के रहने वाले दुलारचंद यादव को ‘टाल का बादशाह’ कहा जाता था। दुलारचंद पहलवानी के साथ-साथ गाना गाने के भी शौकीन थे। उन्होंने जन सुराज के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के लिए एक गाना भी रिकॉर्ड करवाया था। माना जा रहा है कि मोकामा की चुनावी जंग अब व्यक्तिगत रंजिश और हिंसक टकराव की तरफ मुड़ गई है।
बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन एक बार फिर दादा होने का गर्व महसूस कर रहे हैं। दरअसल, उनके नाती अगस्त्य नंदा की अपकमिंग फिल्म ‘इक्कीस’ का ट्रेलर हाल ही में रिलीज़ हुआ है। ट्रेलर देखकर बिग बी इतने इमोशनल हो गए कि उन्होंने सोशल मीडिया पर एक दिल छू लेने वाला पोस्ट शेयर किया। अमिताभ ने अपने पोस्ट में लिखा, “ये तो बस शुरुआत है... गर्व है तुम्हारे इस सफर पर, मेरे बच्चे।” उनकी इस पोस्ट पर फैन्स और फिल्म इंडस्ट्री के सितारों ने जमकर प्यार लुटाया। ‘इक्कीस’ मेगास्टार मेघना गुलज़ार के निर्देशन में बनी है और इसमें अगस्त्य नंदा एक अहम किरदार निभा रहे हैं। फिल्म 1971 के युद्ध के हीरो अरुण खेत्रपाल की कहानी पर आधारित है, जो देश के सबसे युवा परमवीर चक्र विजेता थे। फिल्म के ट्रेलर में अगस्त्य का जोश और समर्पण देखकर फैन्स कह रहे हैं—“दादा की तरह नाती भी लाजवाब!” तो देखना दिलचस्प होगा कि क्या अगस्त्य अपनी पहली ही फिल्म से दादा अमिताभ की विरासत को आगे बढ़ा पाएंगे।
Lucknow Desk: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज बुधवार को भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान राफेल में उड़ान भरकर इतिहास रच दिया है। इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुखोई-3 MKI लड़ाकू विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। राष्ट्रपति की इस उड़ान ने आज भारतीय वायुसेना के साथ-साथ पूरे देश को गौरव से भर दिया है। बता दें, भारत का राष्ट्रपति तीनों सेनाओं की कमांडर होता है और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर मौजूद हैं। अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज सुबह अंबाला एयरबेस पहुंचीं, जहां वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह और वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। बता दें, राष्ट्रपति का यह उड़ान न केवल साहसिक नेतृत्व शैली का प्रतीक है, बल्कि भारत की बढ़ती रक्षा क्षमता और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को वैश्विक पटल पर मजबूती से प्रदर्शित करना भी है। फाइटर जेट में उड़ान भरने वाली दूसरी महिला राष्ट्रपति मुर्मू राष्ट्रपति मुर्मू ने फाइटर जेट की सवारी ये पहली बार नहीं की हैं। उन्होंने इससे पहले 8 अप्रैल 2023 को असम के तेजपुर एयरफोर्स स्टेशन से सुखोई-30 MKI फाइटर विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। वह फाइटर जेट उड़ाने वाली तीसरी राष्ट्रपति और दूसरी महिला राष्ट्राध्यक्ष बनी थीं। राष्ट्रपति मुर्मू ने से पहले पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और प्रतिभा पाटिल ने भी सुखोई-30 MKI में उड़ान भरी थी। राफेल लड़ाकू विमान का क्या है इतिहास? बता दें, राफेल लड़ाकू विमान फ्रांसीसी कंपनी दसॉ एविएशन द्वारा निर्मित किया गया है। सितंबर 2020 में अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर भारतीय वायुसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था। अंबाला एयरबेस राफेल स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरोज' का मुख्य केंद्र है। इन विमानों का इस्तेमाल हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान किया गया था, इसके माध्यम से आतंकवादी ठिकानों पर हमले कर अपनी ताकत को सैनियों ने दिखाया था।
Lucknow Desk: कैसरगंज के बीजेपी नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के हेलीकॉप्टर को धान के खेत में अचानक उतारना पड़ा। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि तकनीकी खराबी आने के बाद पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतारा, जहां हेलीकॉप्टर देखने के लिए ग्रामीण भी जुट गए। मिली जानकारी के मुताबिक, बृजभूषण शरण सिंह एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। उड़ान के कुछ ही मिनट बाद हेलीकॉप्टर में तकनीकी दिक्कत आने लगी। स्थिति को समझते हुए पायलट ने तुरंत इमरजेंसी लैंडिंग का फैसला लिया और नज़दीकी धान के खेत में हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतार दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। हेलीकॉप्टर की जांच के लिए टेक्निकल टीम बुलाई गई है। फिलहाल राहत की बात यह है कि बृजभूषण शरण सिंह और हेलीकॉप्टर में मौजूद सभी लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं। जांच के बाद ही तकनीकी खराबी की असली वजह पता चल पाएगी। इसी बीच पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर संदेश दिया। उन्होंने कहा, आज मेरा बिहार प्रदेश के अंदर संदेश व दिनारा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सभा का कार्यक्रम था। संदेश विधानसभा का कार्यक्रम करके मैं दिनारा विधानसभा के लिए हेलीकाप्टर से निकला था। अचानक मौसम खराब होने के कारण हेलीकाप्टर की सुरक्षित लैंडिंग एक खेत में करानी पड़ी। पायलट ने बड़ी सूझबूझ से लैंडिंग कराई। मैं, इस समय गाड़ी से पटना जा रहा हूं। किसी अफवाह में आने की जरूरत नहीं है। किसी प्रकार की कोई हानि नहीं हुई है। हम सभी पूर्णतया सुरक्षित हैं। हेलीकाप्टर की सुरक्षा का प्रबंध कर दिया गया है। प्रशासन व जनता का बहुत सहयोग रहा...धन्यवाद
Lucknow Desk: आज 02 नवंबर 2025 को बॉलीवुड के बादशाह Shahrukh Khan ने अपने 60वें जन्मदिन का जश्न मनाया। इस मौके पर उन्होंने अपने परिवार, करीबियों और फिल्म इंडस्ट्री के दोस्तों के साथ खुशियाँ बाँटी। उन्होंने अपने आलीशान घर के बजाय इस बार सार्वजनिक रूप से Mannat से बाहर नहीं दिखने का फैसला किया क्योंकि वहाँ फिलहाल निर्माण का काम चल रहा है। वहीँ, जश्न के लिए उन्होंने Alibaug में स्थित निजी स्थान चुना। एक विशेष फैन-मीट कार्यक्रम Balgandharva Rangmandir, बांद्रा में आयोजित किया गया था, जहाँ सीमित प्रवेश पास के माध्यम से प्रशंसक सीधे शामिल हुए। सोशल मीडिया पर सितारों ने बधाइयाँ दीं। जिसमें Farah Khan ने लिखा, “Happy birthday KING … rule for another 100 years”। बता दें कि Shahrukh Khan के जन्मदिन के मौके पर सिर्फ भारत भर से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी फैंस जुटे। शाहरुख खान के फैन क्लबों ने जन्मदिन सप्ताह के रूप में मनाया, चैरिटी ड्राइव, विशेष बैनर आदि के माध्यम से ख़ास अंदाज़ से जश्न मनाया।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। लखनऊ विकास प्राधिकरण यानी LDA ने अलीगंज इलाके में स्थित चार मंजिला अवैध इमारत को बुलडोजर से गिराने की कार्रवाई शुरू कर दी है। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आसपास के लगभग 700 मीटर क्षेत्र को सील कर दिया गया। 15 लोगों की गई थी जान लखनऊ के अलीगंज इलाके में 22 जून 2026 को एक इमारत में भीषण आग लग गई थी। इस दर्दनाक हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई थी। घटना के बाद इमारत की सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण नियमों को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। जांच के दौरान इमारत में कई प्रकार की अनियमितताएं सामने आने की बात कही गई। बताया गया कि भवन का निर्माण नियमों के अनुसार नहीं किया गया था और जरूरी सुरक्षा मानकों की भी अनदेखी की गई थी। अग्निकांड के बाद LDA ने इमारत की जांच करते हुए ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की थी। 10 जुलाई को दिया गया था आदेश लखनऊ विकास प्राधिकरण ने इस चार मंजिला इमारत को गिराने का आदेश 10 जुलाई 2026 को जारी किया था। इसके बाद इमारत पर नोटिस भी चस्पा किया गया। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद 25 जुलाई को बुलडोजर और अन्य मशीनों की मदद से भवन को गिराने का काम शुरू किया गया। कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए प्रशासन ने पहले से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। इमारत के आसपास रहने वाले लोगों और दुकानदारों को सुरक्षित दूरी पर रहने के निर्देश दिए गए। 700 मीटर तक इलाका किया गया सील बुलडोजर कार्रवाई के दौरान इमारत के आसपास लगभग 700 मीटर तक के क्षेत्र को सील कर दिया गया। रास्ते पर आम लोगों और वाहनों की आवाजाही रोक दी गई। मौके पर तीन थानों की पुलिस फोर्स और 100 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। LDA के अधिकारी और कर्मचारी भी मौके पर मौजूद रहे। बड़ी इमारत होने के कारण ध्वस्तीकरण का काम सावधानी से किया गया, ताकि आसपास के मकानों, दुकानों और राहगीरों को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे। अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल इस अग्निकांड के बाद केवल इमारत मालिक ही नहीं, बल्कि संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। मामले में छह PCS अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके साथ ही भवनों के नक्शे और फायर सेफ्टी नियमों को लेकर सख्ती बढ़ाने की तैयारी भी की गई। अवैध निर्माण पर प्रशासन का सख्त संदेश इस कार्रवाई के माध्यम से प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी करके बनाए गए अवैध भवनों को बख्शा नहीं जाएगा। यह हादसा बताता है कि बिना नक्शा पास कराए, फायर सेफ्टी व्यवस्था और इमरजेंसी निकास के बिना बनाई गई इमारतें लोगों की जान के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं। हालांकि, इमारत से जुड़े लोगों की ओर से बुलडोजर कार्रवाई को अदालत में चुनौती देने की तैयारी किए जाने की बात भी सामने आई है।
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के भूख हड़ताल को लेकर उनकी सेहत पर चिंता लगातार बढ़ रही है। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने उनसे अपना भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की है। दिपके ने कहा कि देश को सोनम वांगचुक जैसे लोगों की जरूरत है और आंदोलन को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अब दूसरे लोग भी संभालेंगे। उन्होंने यह भी साफ किया कि भूख हड़ताल समाप्त होने का मतलब आंदोलन का खत्म होना नहीं है। सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर बढ़ी चिंता सोनम वांगचुक लंबे समय से भूख हड़ताल पर हैं, जिसके कारण उनकी सेहत को लेकर चिंता जताई जा रही है। हाल के दिनों में उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर डॉक्टरों ने भी नजर रखी है। स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बीच उन्हें अस्पताल में रखा गया और उनके इलाज को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में भी मामला पहुंचा। ऐसे में अभिजीत दिपके और आंदोलन से जुड़े अन्य लोगों ने वांगचुक से अपील की है कि वे अपनी जिंदगी को खतरे में न डालें। उनका कहना है कि किसी भी आंदोलन को लंबे समय तक चलाने के लिए उसके नेतृत्व और समर्थकों का स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है। 'देश को सोनम वांगचुक की जरूरत' अभिजीत दिपके ने अपनी अपील में इस बात पर जोर दिया कि सोनम वांगचुक का योगदान केवल इस आंदोलन तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि देश को उनकी जरूरत है और इसलिए उन्हें अपना भूख हड़ताल खत्म करने पर विचार करना चाहिए। आंदोलन से जुड़े लोगों ने भरोसा दिलाया कि जिन मांगों को लेकर प्रदर्शन किया जा रहा है, उन्हें उठाना जारी रखा जाएगा। दिपके का कहना है कि आंदोलन किसी एक व्यक्ति के भरोसे नहीं रहेगा। इससे जुड़े छात्र, कार्यकर्ता और समर्थक अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे। अभिजीत दिपके भी खत्म कर चुके हैं अपना भूख हड़ताल इससे पहले अभिजीत दिपके ने भी सोनम वांगचुक की अपील के बाद अपना अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त किया था और इसके बाद आंदोलन से जुड़ी गतिविधियों में शामिल हुए थे। यह घटनाक्रम 20 जुलाई 2026 को सामने आया था। अब दिपके की ओर से वांगचुक से भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील सामने आई है। इससे यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए भूख हड़ताल ही एकमात्र रास्ता नहीं है। आंदोलन जारी रखने का दावा CJP से जुड़े नेताओं का कहना है कि उनकी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। संगठन ने साफ किया है कि सोनम वांगचुक के भूख हड़ताल पर कोई भी फैसला आंदोलन की दिशा को खत्म नहीं करेगा। समर्थक आगे भी अपनी आवाज उठाते रहेंगे और संबंधित मुद्दों पर सरकार से कार्रवाई की मांग करेंगे। फिलहाल सभी की नजर सोनम वांगचुक की सेहत और उनके अगले फैसले पर है। आंदोलन से जुड़े लोग चाहते हैं कि वह अपना भूख हड़ताल समाप्त कर स्वस्थ होकर संघर्ष को आगे बढ़ाने में मार्गदर्शन देते रहें। वहीं प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं।
संसद का मानसून सत्र आज, 20 जुलाई 2026 से शुरू हो गया है। सत्र की शुरुआत के साथ ही देश का राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है। इस बार कई महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है। विपक्ष कई राष्ट्रीय, आर्थिक और सामाजिक मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है, जबकि सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने पर ध्यान दे रही है। इन मुद्दों पर हो सकती है चर्चा बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं, मानसून सत्र के दौरान महंगाई, शिक्षा व्यवस्था, और विदेश नीति जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं। इसके अलावा हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों और राज्यों से जुड़े मामलों पर भी संसद में बहस हो सकती है। कई महत्वपूर्ण विधेयक हो सकते हैं पेश सरकार की ओर से मानसून सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाने की संभावना है। सरकार का प्रयास रहेगा कि जरूरी बिलों पर चर्चा कर उन्हें पारित कराया जाए। वहीं विपक्ष की मांग रहेगी कि राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर पर्याप्त समय देकर विस्तार से चर्चा कराई जाए। लोकसभा और राज्यसभा में बढ़ी सक्रियता संसद के दोनों सदनों, लोकसभा और राज्यसभा, में सत्र की शुरुआत के साथ ही राजनीतिक सक्रियता बढ़ गई है। विभिन्न दलों ने अपने सांसदों को सदन में उपस्थित रहने और पार्टी की रणनीति के अनुसार मुद्दे उठाने के निर्देश दिए हैं। विपक्षी दल भी सरकार को घेरने के लिए आपसी तालमेल के साथ रणनीति बना सकते हैं। सरकार और विपक्ष की अलग-अलग रणनीति सरकार की कोशिश रहेगी कि वह अपने विकास कार्यों, योजनाओं और नीतियों को मजबूती से सदन में रखे। दूसरी ओर विपक्ष जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश करेगा। इससे कई मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति बन सकती है। क्यों महत्वपूर्ण है यह मानसून सत्र यह मानसून सत्र राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में कई राज्यों में राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। ऐसे में संसद के अंदर होने वाली बहस का असर देश की राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है। सभी की नजर संसद की कार्यवाही पर अब सभी की नजर इस बात पर होगी कि मानसून सत्र कितना सुचारू रूप से चलता है और कितने महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्थक चर्चा हो पाती है। अगर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सहयोग बना रहता है, तो यह सत्र कई अहम फैसलों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।