Lucknow Desk: उत्तर प्रदेश में डिजिटल क्रांति को नई रफ्तार देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना 'प्रोजेक्ट गंगा' की शुरुआत की है। राजधानी लखनऊ में लॉन्च की गई यह परियोजना राज्य के ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों को हाई-स्पीड इंटरनेट से जोड़ने का बड़ा अभियान है। सरकार का मानना है कि आने वाला समय पूरी तरह डिजिटल अर्थव्यवस्था का होगा और ऐसे में गांवों को तकनीक से जोड़ना बेहद जरूरी है।
'प्रोजेक्ट गंगा' का सबसे बड़ा लक्ष्य प्रदेश के 20 लाख से ज्यादा घरों तक हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड इंटरनेट पहुंचाना है। हालांकि यह योजना सिर्फ इंटरनेट उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए गांवों में आधुनिक डिजिटल सुविधाओं का पूरा नेटवर्क तैयार किया जाएगा। सरकार चाहती है कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी शहरों की तरह डिजिटल सेवाओं का लाभ उठा सकें और तकनीक की मुख्यधारा से जुड़ सकें।
इस परियोजना के तहत गांवों में एक मजबूत डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर नेटवर्क विकसित किया जाएगा। इसके माध्यम से लोगों को हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड, सार्वजनिक वाई-फाई, आईपीटीवी और ओटीटी जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यानी अब ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी बेहतर इंटरनेट और मनोरंजन सुविधाएं मिल सकेंगी। इसके अलावा सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी आधारित निगरानी व्यवस्था और साइबर सिक्योरिटी सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे गांवों में डिजिटल सुरक्षा को मजबूत बनाया जा सके।
प्रोजेक्ट गंगा का एक और अहम पहलू रोजगार और स्वरोजगार से जुड़ा हुआ है। सरकार का लक्ष्य है कि न्याय पंचायत स्तर पर करीब 8 से 10 हजार युवाओं को डिजिटल सेवा प्रदाता के रूप में तैयार किया जाए। ये युवा अपने क्षेत्रों में इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने का काम करेंगे। खास बात यह है कि इस पहल में महिलाओं की 50 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया है, जिससे महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिलेगा।
सरकार का मानना है कि डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ने से ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। अब गांवों में रहने वाले युवा फ्रीलांसिंग, रिमोट वर्क और ऑनलाइन ट्रेनिंग जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। इससे उन्हें रोजगार के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन करने की जरूरत कम होगी और वे अपने घर-परिवार के साथ रहकर ही आय के बेहतर अवसर हासिल कर सकेंगे।
युवाओं को डिजिटल उद्यमिता के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। यदि कोई युवा अपना डिजिटल कारोबार शुरू करना चाहता है, तो उसे पांच लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इस योजना के जरिए प्रदेश में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से एक लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन और हिंदुजा ग्रुप की सहयोगी कंपनी वनओटीटी एंटरटेनमेंट लिमिटेड के बीच 9 मार्च को एक समझौता ज्ञापन यानी एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह साझेदारी गांवों तक आधुनिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
योगी सरकार का कहना है कि डिजिटल कनेक्टिविटी केवल सुविधा नहीं, बल्कि भविष्य की आवश्यकता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, व्यापार और सरकारी सेवाओं तक आसान पहुंच के लिए इंटरनेट आज सबसे अहम माध्यम बन चुका है। ऐसे में प्रोजेक्ट गंगा ग्रामीण क्षेत्रों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, प्रोजेक्ट गंगा सिर्फ एक इंटरनेट परियोजना नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश के गांवों को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने का एक व्यापक अभियान है। यदि यह योजना अपने तय लक्ष्यों को हासिल करने में सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों की जिंदगी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। यही वजह है कि इसे यूपी को डिजिटल रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी पहल माना जा रहा है।
Lucknow Desk: बिहार के मोकामा से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ चुनाव प्रचार के दौरान हमला किया गया। इस घटना में जानी-मानी हस्ती दुलारचंद यादव की हत्या हो गई है और आरोप लगाया गया है कि इस घटना में पूर्व विधायक अनंत सिंह के समर्थकों की भूमिका है। यह घटना आगामी विधानसभा चुनाव के बीच हुई है, जिससे राज्य में कानून-व्यवस्था और चुनावी हिंसा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अनंत सिंह समेत 5 नामजद मोकामा में दुलारचंद यादव की हत्या मामले में JDU प्रत्याशी बाहुबली अनंत सिंह समेत पांच लोगों पर केस दर्ज कर ली गई है। मृत दुलारचंद यादव के पोते के दिए गए बयान पर अनंत सिंह, दो भतीजों रणवीर सिंह, कर्मवीर सिंह, करीबी छोटन सिंह और कंजय सिंह पर नामजद और कई अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। यानी दुलारचंद यादव के परिजनों और जन सुराज पार्टी के समर्थकों ने सीधे तौर पर JDU उम्मीदवार और बाहुबली नेता अनंत सिंह के समर्थकों पर हत्या का आरोप लगाया है। अनंत सिंह ने आरोपों को किया खारिज वहीं इस बयान पर JDU उम्मीदवार अनंत सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे RJD उम्मीदवार वीणा देवी के पति बाहुबली सूरजभान सिंह की साजिश बताया है। अनंत सिंह ने कहा कि उनके काफिले पर विरोधियों ने हमला किया और यह सारा खेल सूरजभान सिंह करवा रहे हैं। कौन थे दुलारचंद यादव ? मोकामा के रहने वाले दुलारचंद यादव को ‘टाल का बादशाह’ कहा जाता था। दुलारचंद पहलवानी के साथ-साथ गाना गाने के भी शौकीन थे। उन्होंने जन सुराज के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के लिए एक गाना भी रिकॉर्ड करवाया था। माना जा रहा है कि मोकामा की चुनावी जंग अब व्यक्तिगत रंजिश और हिंसक टकराव की तरफ मुड़ गई है।
बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन एक बार फिर दादा होने का गर्व महसूस कर रहे हैं। दरअसल, उनके नाती अगस्त्य नंदा की अपकमिंग फिल्म ‘इक्कीस’ का ट्रेलर हाल ही में रिलीज़ हुआ है। ट्रेलर देखकर बिग बी इतने इमोशनल हो गए कि उन्होंने सोशल मीडिया पर एक दिल छू लेने वाला पोस्ट शेयर किया। अमिताभ ने अपने पोस्ट में लिखा, “ये तो बस शुरुआत है... गर्व है तुम्हारे इस सफर पर, मेरे बच्चे।” उनकी इस पोस्ट पर फैन्स और फिल्म इंडस्ट्री के सितारों ने जमकर प्यार लुटाया। ‘इक्कीस’ मेगास्टार मेघना गुलज़ार के निर्देशन में बनी है और इसमें अगस्त्य नंदा एक अहम किरदार निभा रहे हैं। फिल्म 1971 के युद्ध के हीरो अरुण खेत्रपाल की कहानी पर आधारित है, जो देश के सबसे युवा परमवीर चक्र विजेता थे। फिल्म के ट्रेलर में अगस्त्य का जोश और समर्पण देखकर फैन्स कह रहे हैं—“दादा की तरह नाती भी लाजवाब!” तो देखना दिलचस्प होगा कि क्या अगस्त्य अपनी पहली ही फिल्म से दादा अमिताभ की विरासत को आगे बढ़ा पाएंगे।
Lucknow Desk: कैसरगंज के बीजेपी नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के हेलीकॉप्टर को धान के खेत में अचानक उतारना पड़ा। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि तकनीकी खराबी आने के बाद पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतारा, जहां हेलीकॉप्टर देखने के लिए ग्रामीण भी जुट गए। मिली जानकारी के मुताबिक, बृजभूषण शरण सिंह एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। उड़ान के कुछ ही मिनट बाद हेलीकॉप्टर में तकनीकी दिक्कत आने लगी। स्थिति को समझते हुए पायलट ने तुरंत इमरजेंसी लैंडिंग का फैसला लिया और नज़दीकी धान के खेत में हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतार दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। हेलीकॉप्टर की जांच के लिए टेक्निकल टीम बुलाई गई है। फिलहाल राहत की बात यह है कि बृजभूषण शरण सिंह और हेलीकॉप्टर में मौजूद सभी लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं। जांच के बाद ही तकनीकी खराबी की असली वजह पता चल पाएगी। इसी बीच पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर संदेश दिया। उन्होंने कहा, आज मेरा बिहार प्रदेश के अंदर संदेश व दिनारा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सभा का कार्यक्रम था। संदेश विधानसभा का कार्यक्रम करके मैं दिनारा विधानसभा के लिए हेलीकाप्टर से निकला था। अचानक मौसम खराब होने के कारण हेलीकाप्टर की सुरक्षित लैंडिंग एक खेत में करानी पड़ी। पायलट ने बड़ी सूझबूझ से लैंडिंग कराई। मैं, इस समय गाड़ी से पटना जा रहा हूं। किसी अफवाह में आने की जरूरत नहीं है। किसी प्रकार की कोई हानि नहीं हुई है। हम सभी पूर्णतया सुरक्षित हैं। हेलीकाप्टर की सुरक्षा का प्रबंध कर दिया गया है। प्रशासन व जनता का बहुत सहयोग रहा...धन्यवाद
Lucknow Desk: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज बुधवार को भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान राफेल में उड़ान भरकर इतिहास रच दिया है। इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुखोई-3 MKI लड़ाकू विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। राष्ट्रपति की इस उड़ान ने आज भारतीय वायुसेना के साथ-साथ पूरे देश को गौरव से भर दिया है। बता दें, भारत का राष्ट्रपति तीनों सेनाओं की कमांडर होता है और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर मौजूद हैं। अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज सुबह अंबाला एयरबेस पहुंचीं, जहां वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह और वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। बता दें, राष्ट्रपति का यह उड़ान न केवल साहसिक नेतृत्व शैली का प्रतीक है, बल्कि भारत की बढ़ती रक्षा क्षमता और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को वैश्विक पटल पर मजबूती से प्रदर्शित करना भी है। फाइटर जेट में उड़ान भरने वाली दूसरी महिला राष्ट्रपति मुर्मू राष्ट्रपति मुर्मू ने फाइटर जेट की सवारी ये पहली बार नहीं की हैं। उन्होंने इससे पहले 8 अप्रैल 2023 को असम के तेजपुर एयरफोर्स स्टेशन से सुखोई-30 MKI फाइटर विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। वह फाइटर जेट उड़ाने वाली तीसरी राष्ट्रपति और दूसरी महिला राष्ट्राध्यक्ष बनी थीं। राष्ट्रपति मुर्मू ने से पहले पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और प्रतिभा पाटिल ने भी सुखोई-30 MKI में उड़ान भरी थी। राफेल लड़ाकू विमान का क्या है इतिहास? बता दें, राफेल लड़ाकू विमान फ्रांसीसी कंपनी दसॉ एविएशन द्वारा निर्मित किया गया है। सितंबर 2020 में अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर भारतीय वायुसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था। अंबाला एयरबेस राफेल स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरोज' का मुख्य केंद्र है। इन विमानों का इस्तेमाल हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान किया गया था, इसके माध्यम से आतंकवादी ठिकानों पर हमले कर अपनी ताकत को सैनियों ने दिखाया था।
Lucknow Desk: आज 02 नवंबर 2025 को बॉलीवुड के बादशाह Shahrukh Khan ने अपने 60वें जन्मदिन का जश्न मनाया। इस मौके पर उन्होंने अपने परिवार, करीबियों और फिल्म इंडस्ट्री के दोस्तों के साथ खुशियाँ बाँटी। उन्होंने अपने आलीशान घर के बजाय इस बार सार्वजनिक रूप से Mannat से बाहर नहीं दिखने का फैसला किया क्योंकि वहाँ फिलहाल निर्माण का काम चल रहा है। वहीँ, जश्न के लिए उन्होंने Alibaug में स्थित निजी स्थान चुना। एक विशेष फैन-मीट कार्यक्रम Balgandharva Rangmandir, बांद्रा में आयोजित किया गया था, जहाँ सीमित प्रवेश पास के माध्यम से प्रशंसक सीधे शामिल हुए। सोशल मीडिया पर सितारों ने बधाइयाँ दीं। जिसमें Farah Khan ने लिखा, “Happy birthday KING … rule for another 100 years”। बता दें कि Shahrukh Khan के जन्मदिन के मौके पर सिर्फ भारत भर से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी फैंस जुटे। शाहरुख खान के फैन क्लबों ने जन्मदिन सप्ताह के रूप में मनाया, चैरिटी ड्राइव, विशेष बैनर आदि के माध्यम से ख़ास अंदाज़ से जश्न मनाया।
Lucknow Desk: उत्तर प्रदेश में डिजिटल क्रांति को नई रफ्तार देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना 'प्रोजेक्ट गंगा' की शुरुआत की है। राजधानी लखनऊ में लॉन्च की गई यह परियोजना राज्य के ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों को हाई-स्पीड इंटरनेट से जोड़ने का बड़ा अभियान है। सरकार का मानना है कि आने वाला समय पूरी तरह डिजिटल अर्थव्यवस्था का होगा और ऐसे में गांवों को तकनीक से जोड़ना बेहद जरूरी है। 'प्रोजेक्ट गंगा' का सबसे बड़ा लक्ष्य प्रदेश के 20 लाख से ज्यादा घरों तक हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड इंटरनेट पहुंचाना है। हालांकि यह योजना सिर्फ इंटरनेट उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए गांवों में आधुनिक डिजिटल सुविधाओं का पूरा नेटवर्क तैयार किया जाएगा। सरकार चाहती है कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी शहरों की तरह डिजिटल सेवाओं का लाभ उठा सकें और तकनीक की मुख्यधारा से जुड़ सकें। इस परियोजना के तहत गांवों में एक मजबूत डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर नेटवर्क विकसित किया जाएगा। इसके माध्यम से लोगों को हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड, सार्वजनिक वाई-फाई, आईपीटीवी और ओटीटी जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यानी अब ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी बेहतर इंटरनेट और मनोरंजन सुविधाएं मिल सकेंगी। इसके अलावा सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी आधारित निगरानी व्यवस्था और साइबर सिक्योरिटी सेवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे गांवों में डिजिटल सुरक्षा को मजबूत बनाया जा सके। प्रोजेक्ट गंगा का एक और अहम पहलू रोजगार और स्वरोजगार से जुड़ा हुआ है। सरकार का लक्ष्य है कि न्याय पंचायत स्तर पर करीब 8 से 10 हजार युवाओं को डिजिटल सेवा प्रदाता के रूप में तैयार किया जाए। ये युवा अपने क्षेत्रों में इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने का काम करेंगे। खास बात यह है कि इस पहल में महिलाओं की 50 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया है, जिससे महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार का मानना है कि डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ने से ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। अब गांवों में रहने वाले युवा फ्रीलांसिंग, रिमोट वर्क और ऑनलाइन ट्रेनिंग जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। इससे उन्हें रोजगार के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन करने की जरूरत कम होगी और वे अपने घर-परिवार के साथ रहकर ही आय के बेहतर अवसर हासिल कर सकेंगे। युवाओं को डिजिटल उद्यमिता के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। यदि कोई युवा अपना डिजिटल कारोबार शुरू करना चाहता है, तो उसे पांच लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इस योजना के जरिए प्रदेश में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से एक लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन और हिंदुजा ग्रुप की सहयोगी कंपनी वनओटीटी एंटरटेनमेंट लिमिटेड के बीच 9 मार्च को एक समझौता ज्ञापन यानी एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह साझेदारी गांवों तक आधुनिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। योगी सरकार का कहना है कि डिजिटल कनेक्टिविटी केवल सुविधा नहीं, बल्कि भविष्य की आवश्यकता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, व्यापार और सरकारी सेवाओं तक आसान पहुंच के लिए इंटरनेट आज सबसे अहम माध्यम बन चुका है। ऐसे में प्रोजेक्ट गंगा ग्रामीण क्षेत्रों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। कुल मिलाकर, प्रोजेक्ट गंगा सिर्फ एक इंटरनेट परियोजना नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश के गांवों को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने का एक व्यापक अभियान है। यदि यह योजना अपने तय लक्ष्यों को हासिल करने में सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों की जिंदगी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। यही वजह है कि इसे यूपी को डिजिटल रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी पहल माना जा रहा है।
Lucknow Desk: उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास परियोजनाओं की गुणवत्ता को लेकर योगी सरकार ने एक बड़ा और अहम कदम उठाया है। सरकार ने यह फैसला किया है कि अब राज्य में चल रहे औद्योगिक विकास कार्यों की निगरानी और उनकी गुणवत्ता की जांच को और ज्यादा मजबूत किया जाएगा। इसके लिए थर्ड पार्टी जांच यानी स्वतंत्र एजेंसी से ऑडिट कराने की व्यवस्था को प्रभावी बनाया जा रहा है, ताकि काम में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। इस नई व्यवस्था के तहत अब औद्योगिक क्षेत्रों में हो रहे निर्माण कार्यों के सैंपल लिए जाएंगे और उनकी जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाएगी। खास बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उद्यमी संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे, जिससे किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना न रहे और सिस्टम पर भरोसा और मजबूत हो। यूपीसीडा को दी गई बड़ी जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी यूपीसीडा ने इस पूरी गुणवत्ता जांच की जिम्मेदारी भारत सरकार के उपक्रम RITES Limited को सौंपी है। इसका मकसद यह है कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता किसी निष्पक्ष और विशेषज्ञ एजेंसी द्वारा परखी जा सके। इस कदम से सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि जो भी औद्योगिक ढांचा तैयार हो रहा है, वह लंबे समय तक टिकाऊ हो और मानकों के अनुसार हो। गाजियाबाद में हुआ औद्योगिक क्षेत्रों का निरीक्षण हाल ही में यूपीसीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने गाजियाबाद के कई प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों का दौरा किया और वहां चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा की। इस निरीक्षण में कविनगर, स्वदेशी औद्योगिक क्षेत्र, बुलंदशहर रोड औद्योगिक क्षेत्र, साउथ साइड जीटी रोड, लोहामंडी, मेरठ रोड साइट-3 और साहिबाबाद जैसे इलाके शामिल थे। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुसार किसी भी स्तर पर गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए। लंबित परियोजनाओं को समय पर पूरा करने पर जोर सरकार ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि जो भी विकास परियोजनाएं लंबित हैं, उन्हें तय समय सीमा के अंदर हर हाल में पूरा किया जाए। इसके साथ ही औद्योगिक क्षेत्रों में सड़क, नाली, पार्किंग और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया है। इसका सीधा उद्देश्य यह है कि उद्योगों को बेहतर और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर मिल सके, जिससे उनका काम आसान हो और निवेश का माहौल मजबूत बने। भ्रष्टाचार पर सख्त रुख और जीरो टॉलरेंस नीति उद्यमियों के साथ हुई एक बैठक में ट्रक पार्किंग, पार्क विकास, टेस्ट लैब, स्किल डेवलपमेंट सेंटर और एक्सपो सेंटर जैसी सुविधाओं के विस्तार पर भी चर्चा हुई। सरकार ने इस दौरान अपनी जीरो टॉलरेंस नीति को दोहराते हुए साफ कहा कि अगर किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ उद्यमियों से गलत मांग या उत्पीड़न की शिकायत मिलती है तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। निवेश और विकास पर सरकार का फोकस राज्य सरकार का कहना है कि उसका मुख्य लक्ष्य उत्तर प्रदेश को निवेश के लिए सबसे बेहतर राज्य बनाना है। इसके लिए जरूरी है कि न केवल नई परियोजनाएं लाई जाएं, बल्कि उनका क्रियान्वयन भी उच्च गुणवत्ता के साथ हो। इसी दिशा में यूपीसीडा को अधिक जवाबदेह बनाया जा रहा है और औद्योगिक ढांचे को विश्वस्तरीय मानकों तक ले जाने की कोशिश की जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि उत्तर प्रदेश को ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाया जाए और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को और मजबूत किया जाए।
Lucknow Desk: उत्तर प्रदेश में लंबे समय से स्थायी पुलिस महानिदेशक यानी DGP की नियुक्ति को लेकर चल रही चर्चाओं पर अब जल्द ही विराम लग सकता है। प्रशासनिक हलकों में यह माना जा रहा है कि सरकार ने इस अहम पद के लिए प्रक्रिया को तेज कर दिया है और जल्द ही किसी एक नाम पर अंतिम मुहर लग सकती है। दरअसल, राज्य में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले इस शीर्ष पद को लेकर लगातार मंथन चल रहा है। केंद्र सरकार और UPSC के दिशा-निर्देशों के तहत वरिष्ठता, सेवा रिकॉर्ड, अनुभव और कार्यकुशलता को आधार बनाकर एक पैनल तैयार किया गया है। इसी प्रक्रिया के तहत तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में सामने आए हैं। इनमें 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण का नाम प्रमुख रूप से चर्चा में है। राजीव कृष्ण वर्तमान में प्रदेश पुलिस में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। उन्हें एक तेजतर्रार और मजबूत प्रशासनिक पकड़ वाले अधिकारी के रूप में जाना जाता है। कई अहम मामलों में उनकी भूमिका और निर्णय लेने की क्षमता को काफी प्रभावी माना जाता है। कानून-व्यवस्था को लेकर उनके अनुभव को सरकार के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट माना जा रहा है। दूसरी दावेदार के रूप में रेणुका मिश्रा का नाम भी लगातार सुर्खियों में है। रेणुका मिश्रा लंबे समय से पुलिस विभाग में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुकी हैं। खासकर महिला सुरक्षा, सामाजिक अपराधों पर नियंत्रण और प्रशासनिक कामकाज में उनकी पकड़ काफी मजबूत मानी जाती है। अगर उन्हें इस पद के लिए चुना जाता है तो वह उत्तर प्रदेश की पहली महिला स्थायी DGP बनने का इतिहास भी रच सकती हैं। यही वजह है कि उनका नाम भी इस रेस में बेहद अहम माना जा रहा है। तीसरे प्रमुख दावेदार पीयूष आनंद हैं। पीयूष आनंद भी वरिष्ठ और अनुभवी आईपीएस अधिकारियों में गिने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में कई जिलों और महत्वपूर्ण विभागों में जिम्मेदारियां संभाली हैं। उनकी कार्यशैली को लेकर शासन स्तर पर सकारात्मक राय बताई जा रही है। उन्हें एक संतुलित और व्यवहारिक अधिकारी के रूप में देखा जाता है, जो कानून-व्यवस्था और प्रशासन दोनों को बेहतर तरीके से संभाल सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार जल्द ही इन तीनों नामों का पैनल यूपीएससी को भेज सकती है। इसके बाद यूपीएससी की मंजूरी और औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद उत्तर प्रदेश को नया स्थायी DGP मिल जाएगा। माना जा रहा है कि आने वाले समय में होने वाले पंचायत चुनाव, कानून-व्यवस्था की चुनौतियां और बड़े प्रशासनिक फैसलों को देखते हुए सरकार इस नियुक्ति को जल्द पूरा करना चाहती है। फिलहाल, पूरे प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में इस नियुक्ति को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ किस अधिकारी पर भरोसा जताते हैं और उत्तर प्रदेश पुलिस की कमान आखिर किसके हाथों में सौंपी जाती है।