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US Tariff on India: अमेरिका ने भारतीय सामान पर लगाया 10% नया शुल्क, निर्यातकों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

TV 24 Network July 24, 2026 0
अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए 10 प्रतिशत नए टैरिफ का प्रतीकात्मक चित्र
अमेरिका ने भारतीय सामान पर लगाया 10 प्रतिशत टैरिफ

अमेरिका ने भारत से आयात होने वाली वस्तुओं पर 10 प्रतिशत का नया टैरिफ लागू कर दिया है। यह फैसला जबरन मजदूरी यानी ‘फोर्स्ड लेबर’ से तैयार वस्तुओं की वैश्विक सप्लाई चेन को रोकने के उद्देश्य से लिया गया है। अमेरिका का कहना है कि जिन देशों ने जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात को रोकने के लिए कानून या प्रभावी व्यवस्था बनाई है, उन पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है। वहीं, पर्याप्त कदम नहीं उठाने वाले कुछ देशों पर 12.5 प्रतिशत तक शुल्क लागू किया गया है।

 

क्या होता है टैरिफ?

टैरिफ एक प्रकार का आयात शुल्क होता है, जिसे किसी दूसरे देश से आने वाले सामान पर लगाया जाता है। इसके लागू होने के बाद आयातित वस्तु अमेरिकी बाजार में महंगी हो सकती है। आमतौर पर टैरिफ की रकम अमेरिका में सामान आयात करने वाली कंपनी को चुकानी होती है, लेकिन बाद में इसका बोझ कीमत बढ़ाकर ग्राहकों या निर्यातकों पर डाला जा सकता है।

 

नई व्यवस्था के अंतर्गत भारत के साथ पाकिस्तान, बांग्लादेश और कई अन्य देशों से आने वाले सामान पर भी 10 प्रतिशत की दर लागू की गई है। अमेरिका ने कुल लगभग 60 अर्थव्यवस्थाओं को इस कार्रवाई के दायरे में रखा है।

 

अमेरिका ने यह फैसला क्यों लिया?

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने अमेरिकी ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत कई देशों की नीतियों की जांच की थी। जांच का विषय यह था कि संबंधित देश जबरन मजदूरी से तैयार वस्तुओं के आयात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठा रहे हैं या नहीं।

 

शुरुआत में भारत पर 12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव सामने आया था। हालांकि, भारत द्वारा जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर रोक लगाने के बाद अंतिम दर को 10 प्रतिशत रखा गया। भारत ने जुलाई 2026 में ऐसे सामान के आयात को प्रतिबंधित करने की घोषणा की थी।

 

भारतीय निर्यात पर क्या असर पड़ेगा?

इस फैसले का असर कपड़ा, परिधान, चमड़ा, इंजीनियरिंग उत्पाद, मशीनरी, रत्न एवं आभूषण तथा अन्य निर्यात क्षेत्रों पर पड़ सकता है। अमेरिका भारतीय उत्पादों के लिए एक बड़ा बाजार है। टैरिफ बढ़ने से भारतीय वस्तुएं अमेरिकी बाजार में पहले की तुलना में महंगी हो सकती हैं।

 

यदि किसी भारतीय उत्पाद की कीमत 100 डॉलर है, तो उस पर 10 प्रतिशत शुल्क लगने से आयातक की लागत करीब 110 डॉलर हो सकती है। ऐसे में अमेरिकी खरीदार भारत के बजाय किसी अन्य देश से सस्ता सामान खरीदने पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, दूसरे कई देशों पर भी समान या अधिक टैरिफ लगाए जाने के कारण भारतीय निर्यातकों को मिलने वाली प्रतिस्पर्धा पूरी तरह समाप्त नहीं होगी।

 

व्यापार समझौते पर भी पड़ सकता है प्रभाव

भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है। दोनों पक्ष बाजार तक पहुंच बढ़ाने और व्यापारिक बाधाओं को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिकी अधिकारी के अनुसार समझौता लगभग तैयार है, लेकिन धारा 301 से जुड़ी जांचों के कारण इसमें देरी हुई है। यह समझौता अगले तीन से चार महीनों में पूरा हो सकता है।

 

कुल मिलाकर, अमेरिका का नया 10 प्रतिशत टैरिफ भारतीय निर्यातकों के लिए लागत और प्रतिस्पर्धा की चुनौती बढ़ा सकता है। हालांकि, भारत को कई अन्य देशों की तुलना में कम दर वाले समूह में रखा गया है। अब भारतीय कंपनियों को उत्पादन लागत कम करने, श्रम नियमों में पारदर्शिता बढ़ाने और नए निर्यात बाजार तलाशने पर ध्यान देना होगा।

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Shahrukh Khan ने मनाया 60वां जन्मदिन, विदेशों से भी जुटे फैंस

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देश के निजी क्षेत्र के प्रमुख बैंकों में शामिल कोटक महिंद्रा बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में बेहतर वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है। सितंबर 2026 में समाप्त हुई तिमाही के दौरान बैंक का स्टैंडअलोन शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 29 प्रतिशत बढ़कर 4,212 करोड़ रुपये हो गया। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में बैंक ने इससे कम शुद्ध लाभ दर्ज किया था। बैंक के ताजा नतीजों को वित्तीय क्षेत्र में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।   बैंक के मुनाफे में कैसे हुई बढ़ोतरी? बैंक के वित्तीय प्रदर्शन में सुधार के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। इनमें ऋण की मांग, ब्याज से होने वाली आय और संभावित खराब कर्ज के लिए किए जाने वाले प्रावधान शामिल हैं। बैंकिंग क्षेत्र में ऋण की मांग बढ़ने से बैंकों को ब्याज के माध्यम से आय बढ़ाने का अवसर मिलता है।   इसके अलावा, खराब कर्ज यानी एनपीए से जुड़े संभावित नुकसान के लिए कम राशि का प्रावधान करने से भी बैंक के मुनाफे पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, किसी बैंक की वित्तीय स्थिति का आकलन करने के लिए केवल शुद्ध मुनाफे को देखना पर्याप्त नहीं होता। इसके लिए शुद्ध ब्याज आय, जमा राशि, ऋण वितरण और परिसंपत्तियों की गुणवत्ता जैसे दूसरे आंकड़ों को भी समझना जरूरी है।   ग्राहकों और निवेशकों के लिए क्या मायने हैं बैंक के मुनाफे में बढ़ोतरी से निवेशकों का ध्यान उसके वित्तीय प्रदर्शन की ओर आकर्षित हो सकता है। हालांकि, शेयर बाजार में किसी बैंक के शेयर की कीमत केवल तिमाही मुनाफे के आधार पर तय नहीं होती। बाजार की परिस्थितियां, भविष्य में कारोबार बढ़ने की संभावनाएं और बैंक की वित्तीय स्थिति भी शेयर के प्रदर्शन को प्रभावित करती हैं।   बैंक के ग्राहक भी उसके कारोबार और सेवाओं से जुड़ी घोषणाओं पर नजर रखते हैं। मजबूत वित्तीय नतीजे बैंक की कारोबारी स्थिति का एक संकेत हो सकते हैं, लेकिन इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि ग्राहकों के लिए ब्याज दरों या अन्य शुल्कों में बदलाव होगा।   बैंकिंग क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा भारत के बैंकिंग क्षेत्र में निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के बीच ग्राहकों, जमा राशि और ऋण कारोबार को लेकर प्रतिस्पर्धा बनी हुई है। ऐसे माहौल में बैंक अपनी सेवाओं का विस्तार करने, डिजिटल बैंकिंग को बेहतर बनाने और जोखिम प्रबंधन पर ध्यान देते हैं।   कोटक महिंद्रा बैंक के सितंबर तिमाही के नतीजे उसके वित्तीय प्रदर्शन की जानकारी देते हैं। आने वाली तिमाहियों में बैंक की आय, ऋण वृद्धि और खराब कर्ज के आंकड़े यह समझने में मदद करेंगे कि उसका प्रदर्शन किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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