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अमेरिका ने भारत समेत 60 देशों को सुरक्षा सम्मेलन में बुलाया, आतंकवाद पर बनेगी नई वैश्विक रणनीति

TV 24 Network July 10, 2026 0
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत समेत 60 देशों के सुरक्षा सम्मेलन की घोषणा करते हुए
अमेरिका ने भारत समेत 60 देशों को सुरक्षा सम्मेलन में बुलाया, आतंकवाद पर बनेगी नई वैश्विक रणनीति

अमेरिका ने वैश्विक सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए भारत सहित 60 से अधिक देशों को अगले सप्ताह आयोजित होने वाले विशेष सुरक्षा सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। इस सम्मेलन की मेजबानी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो करेंगे। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते राजनीतिक और आतंकवादी खतरों पर चर्चा करना तथा सदस्य देशों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।

 

आतंकवाद के बदलते स्वरूप पर होगी चर्चा

अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, सम्मेलन में उन चुनौतियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जिन्हें अमेरिका अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक हिंसा और सीमापार आतंकवाद के रूप में देख रहा है। बैठक में विभिन्न देशों के वरिष्ठ मंत्री और सुरक्षा अधिकारी शामिल होंगे तथा आतंकवादी गतिविधियों से निपटने के लिए साझा रणनीति तैयार करने पर विचार करेंगे।

 

भारत की भागीदारी क्यों है अहम?

भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद और चरमपंथ का सामना करता रहा है। ऐसे में इस सम्मेलन में भारत की भागीदारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत पहले भी आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग, खुफिया जानकारी साझा करने और आतंकियों के वित्तीय नेटवर्क पर कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर देता रहा है।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपने अनुभवों के आधार पर सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण सुझाव रख सकता है, जिनसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद विरोधी प्रयासों को मजबूती मिल सकती है।

 

कई देशों के बीच बढ़ेगा सुरक्षा सहयोग

सम्मेलन में एशिया, यूरोप, अमेरिका और अन्य क्षेत्रों के 60 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। बैठक के दौरान निम्नलिखित विषयों पर चर्चा हो सकती है—

  • आतंकवादी संगठनों की नई रणनीतियां।
  • देशों के बीच खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान।
  • ऑनलाइन कट्टरपंथ और डिजिटल प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग को रोकना।
  • आतंकवाद के लिए होने वाली फंडिंग पर रोक।
  • वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय।

 

ट्रंप प्रशासन की नई सुरक्षा प्राथमिकता

यह सम्मेलन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की नई आतंकवाद-रोधी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि बदलते वैश्विक हालात में राजनीतिक हिंसा और आतंकवाद के नए स्वरूपों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग पहले से अधिक आवश्यक हो गया है। इसी उद्देश्य से यह उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की जा रही है।

 

कुछ सहयोगी देशों ने जताई अलग राय

हालांकि, इस पहल को लेकर सभी देशों की राय एक जैसी नहीं है। कुछ यूरोपीय अधिकारियों और स्वतंत्र सुरक्षा विशेषज्ञों ने सम्मेलन के मुख्य फोकस और खतरे के आकलन पर अलग दृष्टिकोण व्यक्त किया है। उनका मानना है कि विभिन्न क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियों की प्रकृति अलग-अलग है और उन्हें व्यापक संदर्भ में देखने की आवश्यकता है।

 

वैश्विक सुरक्षा के लिए अहम बैठक

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में आतंकवाद और राजनीतिक हिंसा जैसी चुनौतियां किसी एक देश तक सीमित नहीं हैं। ऐसे में बहुपक्षीय सहयोग, सूचना साझा करना और संयुक्त रणनीति बनाना समय की आवश्यकता है। भारत की भागीदारी इस सम्मेलन को और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है, क्योंकि वह लंबे समय से वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ सख्त और समन्वित कार्रवाई की वकालत करता रहा है। आने वाले दिनों में इस सम्मेलन से जुड़े फैसलों पर दुनिया की नजर रहेगी।

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अमेरिका भारत मार्को-रुबियो सुरक्षा-सम्मेलन आतंकवाद
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यूरोप में भीषण गर्मी का कहर, फ्रांस में 1000 लोगों की मौत

Lucknow Desk: यूरोप इस समय खतरनाक हीटवेव की चपेट में है। फ्रांस में तेज गर्मी के कारण लगभग 1000 लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे ज्यादा प्रभावित बुजुर्ग, बच्चे और बीमार लोग हैं। सरकार ने कई शहरों में रेड अलर्ट जारी कर दिया है। अस्पतालों में हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।   16 देशों में रिकॉर्डतोड़ तापमान France, Germany, Spain, United Kingdom और इटली समेत 16 यूरोपीय देशों में तापमान ने पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। कई इलाकों में पारा 45 से 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह गर्मी पिछले कई दशकों में सबसे खतरनाक मानी जा रही है।   सड़कें पिघलीं, यातायात प्रभावित जर्मनी और ब्रिटेन में गर्मी का असर सड़क और रेल सेवाओं पर भी दिखाई दिया। कई जगहों पर डामर पिघलने लगा, जिससे ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित हुई। रेलवे ट्रैक गर्म होने के कारण ट्रेनों की गति कम करनी पड़ी। एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।   स्कूल बंद, लोगों को घर में रहने की सलाह फ्रांस की राजधानी Paris सहित कई शहरों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं। सरकार ने लोगों को दोपहर के समय घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है। सार्वजनिक स्थानों पर ठंडे पानी और मेडिकल सहायता केंद्र बनाए गए हैं ताकि लोगों को राहत मिल सके।   जंगलों में भीषण आग स्पेन, ग्रीस और पुर्तगाल में भीषण गर्मी के कारण जंगलों में आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। हजारों हेक्टेयर जंगल जलकर राख हो चुके हैं। आग बुझाने के लिए सेना और दमकल विभाग की टीमें लगातार काम कर रही हैं। कई गांवों को खाली कराया गया है।   पर्यटन और जनजीवन पर असर इटली और ग्रीस में गर्मी का असर पर्यटन पर भी पड़ा है। कई ऐतिहासिक स्थलों पर पर्यटकों की संख्या सीमित कर दी गई है। बाजारों और सड़कों पर लोगों की आवाजाही कम हो गई है। गर्म हवाओं के कारण बिजली की मांग भी अचानक बढ़ गई है।   जलवायु परिवर्तन बना बड़ी वजह विशेषज्ञों का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के कारण यूरोप में हीटवेव की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि यदि कार्बन उत्सर्जन पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में ऐसी भीषण गर्मी आम हो सकती है।   राहत मिलने की उम्मीद कम मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक यूरोप के कई हिस्सों में गर्मी से राहत मिलने की संभावना कम है। प्रशासन लोगों से सावधानी बरतने और जरूरी होने पर ही बाहर निकलने की अपील कर रहा है।

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