बिहार के साहेबगंज विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने वर्ष 2018 के चर्चित हर्ष फायरिंग मामले में 4 साल की सजा सुनाई है। अदालत ने उन्हें गैर-इरादतन हत्या (IPC की धारा 304 भाग-II) और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी मानते हुए यह फैसला सुनाया। इसके साथ ही कोर्ट ने पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया। यह फैसला शनिवार, 4 जुलाई 2026 को सुनाया गया।
क्या है पूरा मामला?
यह घटना 31 दिसंबर 2018 और 1 जनवरी 2019 की रात दिल्ली के फतेहपुर बेरी स्थित एक फार्महाउस में आयोजित न्यू ईयर पार्टी की है। आरोप के अनुसार, पार्टी के दौरान राजू कुमार सिंह ने अपनी लाइसेंसी पिस्तौल से हर्ष फायरिंग की। फायरिंग के दौरान चली एक गोली पार्टी में मौजूद डॉ. अर्चना गुप्ता को लग गई। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
कब दोषी ठहराया गया?
करीब आठ साल तक चली सुनवाई के बाद 6 जून 2026 को राउज एवेन्यू कोर्ट ने राजू कुमार सिंह को दोषी करार दिया। अदालत ने माना कि भीड़भाड़ वाले कार्यक्रम में हथियार से फायरिंग करना बेहद खतरनाक था और आरोपी को यह जानकारी होनी चाहिए थी कि इस तरह की हरकत किसी की जान ले सकती है। दोषी ठहराए जाने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
3 जुलाई को पूरी हुई बहस, 4 जुलाई को सुनाई गई सजा
3 जुलाई 2026 को सजा तय करने को लेकर अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें पूरी हुईं। बचाव पक्ष ने अदालत से नरमी बरतने और प्रोबेशन पर रिहा करने की मांग की। वहीं अभियोजन पक्ष ने कहा कि हर्ष फायरिंग जैसे मामलों में सख्त सजा जरूरी है ताकि समाज में गलत संदेश न जाए। बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके अगले दिन 4 जुलाई 2026 को कोर्ट ने राजू कुमार सिंह को 4 साल की साधारण कारावास (Simple Imprisonment) की सजा सुनाई। साथ ही आर्म्स एक्ट के तहत 2 महीने की अतिरिक्त सजा भी सुनाई गई, जो साथ-साथ चलेगी।
अदालत ने क्या कहा?
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि हर्ष फायरिंग समाज के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि भीड़ के बीच हथियार से फायरिंग करना एक खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना कृत्य है। कोर्ट ने माना कि आरोपी के इस कृत्य से एक निर्दोष महिला की जान गई, इसलिए सख्त सजा आवश्यक है।
राजनीतिक असर भी संभव
चार साल की सजा मिलने के बाद राजू कुमार सिंह की विधानसभा सदस्यता पर भी कानूनी प्रभाव पड़ सकता है। जनप्रतिनिधित्व कानून के अनुसार, दो वर्ष या उससे अधिक की सजा पाने वाले जनप्रतिनिधियों की सदस्यता समाप्त होने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है, हालांकि अंतिम निर्णय संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत होगा।
घटनाक्रम एक नजर में
यह फैसला एक बार फिर यह संदेश देता है कि जश्न के नाम पर हथियारों का इस्तेमाल किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून सभी के लिए समान है और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों पर कानून का पालन करने की जिम्मेदारी और अधिक होती है।
Lucknow Desk: बिहार के मोकामा से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ चुनाव प्रचार के दौरान हमला किया गया। इस घटना में जानी-मानी हस्ती दुलारचंद यादव की हत्या हो गई है और आरोप लगाया गया है कि इस घटना में पूर्व विधायक अनंत सिंह के समर्थकों की भूमिका है। यह घटना आगामी विधानसभा चुनाव के बीच हुई है, जिससे राज्य में कानून-व्यवस्था और चुनावी हिंसा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अनंत सिंह समेत 5 नामजद मोकामा में दुलारचंद यादव की हत्या मामले में JDU प्रत्याशी बाहुबली अनंत सिंह समेत पांच लोगों पर केस दर्ज कर ली गई है। मृत दुलारचंद यादव के पोते के दिए गए बयान पर अनंत सिंह, दो भतीजों रणवीर सिंह, कर्मवीर सिंह, करीबी छोटन सिंह और कंजय सिंह पर नामजद और कई अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। यानी दुलारचंद यादव के परिजनों और जन सुराज पार्टी के समर्थकों ने सीधे तौर पर JDU उम्मीदवार और बाहुबली नेता अनंत सिंह के समर्थकों पर हत्या का आरोप लगाया है। अनंत सिंह ने आरोपों को किया खारिज वहीं इस बयान पर JDU उम्मीदवार अनंत सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे RJD उम्मीदवार वीणा देवी के पति बाहुबली सूरजभान सिंह की साजिश बताया है। अनंत सिंह ने कहा कि उनके काफिले पर विरोधियों ने हमला किया और यह सारा खेल सूरजभान सिंह करवा रहे हैं। कौन थे दुलारचंद यादव ? मोकामा के रहने वाले दुलारचंद यादव को ‘टाल का बादशाह’ कहा जाता था। दुलारचंद पहलवानी के साथ-साथ गाना गाने के भी शौकीन थे। उन्होंने जन सुराज के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के लिए एक गाना भी रिकॉर्ड करवाया था। माना जा रहा है कि मोकामा की चुनावी जंग अब व्यक्तिगत रंजिश और हिंसक टकराव की तरफ मुड़ गई है।
बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन एक बार फिर दादा होने का गर्व महसूस कर रहे हैं। दरअसल, उनके नाती अगस्त्य नंदा की अपकमिंग फिल्म ‘इक्कीस’ का ट्रेलर हाल ही में रिलीज़ हुआ है। ट्रेलर देखकर बिग बी इतने इमोशनल हो गए कि उन्होंने सोशल मीडिया पर एक दिल छू लेने वाला पोस्ट शेयर किया। अमिताभ ने अपने पोस्ट में लिखा, “ये तो बस शुरुआत है... गर्व है तुम्हारे इस सफर पर, मेरे बच्चे।” उनकी इस पोस्ट पर फैन्स और फिल्म इंडस्ट्री के सितारों ने जमकर प्यार लुटाया। ‘इक्कीस’ मेगास्टार मेघना गुलज़ार के निर्देशन में बनी है और इसमें अगस्त्य नंदा एक अहम किरदार निभा रहे हैं। फिल्म 1971 के युद्ध के हीरो अरुण खेत्रपाल की कहानी पर आधारित है, जो देश के सबसे युवा परमवीर चक्र विजेता थे। फिल्म के ट्रेलर में अगस्त्य का जोश और समर्पण देखकर फैन्स कह रहे हैं—“दादा की तरह नाती भी लाजवाब!” तो देखना दिलचस्प होगा कि क्या अगस्त्य अपनी पहली ही फिल्म से दादा अमिताभ की विरासत को आगे बढ़ा पाएंगे।
Lucknow Desk: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज बुधवार को भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान राफेल में उड़ान भरकर इतिहास रच दिया है। इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुखोई-3 MKI लड़ाकू विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। राष्ट्रपति की इस उड़ान ने आज भारतीय वायुसेना के साथ-साथ पूरे देश को गौरव से भर दिया है। बता दें, भारत का राष्ट्रपति तीनों सेनाओं की कमांडर होता है और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर मौजूद हैं। अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज सुबह अंबाला एयरबेस पहुंचीं, जहां वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह और वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। बता दें, राष्ट्रपति का यह उड़ान न केवल साहसिक नेतृत्व शैली का प्रतीक है, बल्कि भारत की बढ़ती रक्षा क्षमता और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को वैश्विक पटल पर मजबूती से प्रदर्शित करना भी है। फाइटर जेट में उड़ान भरने वाली दूसरी महिला राष्ट्रपति मुर्मू राष्ट्रपति मुर्मू ने फाइटर जेट की सवारी ये पहली बार नहीं की हैं। उन्होंने इससे पहले 8 अप्रैल 2023 को असम के तेजपुर एयरफोर्स स्टेशन से सुखोई-30 MKI फाइटर विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। वह फाइटर जेट उड़ाने वाली तीसरी राष्ट्रपति और दूसरी महिला राष्ट्राध्यक्ष बनी थीं। राष्ट्रपति मुर्मू ने से पहले पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और प्रतिभा पाटिल ने भी सुखोई-30 MKI में उड़ान भरी थी। राफेल लड़ाकू विमान का क्या है इतिहास? बता दें, राफेल लड़ाकू विमान फ्रांसीसी कंपनी दसॉ एविएशन द्वारा निर्मित किया गया है। सितंबर 2020 में अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर भारतीय वायुसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था। अंबाला एयरबेस राफेल स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरोज' का मुख्य केंद्र है। इन विमानों का इस्तेमाल हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान किया गया था, इसके माध्यम से आतंकवादी ठिकानों पर हमले कर अपनी ताकत को सैनियों ने दिखाया था।
Lucknow Desk: कैसरगंज के बीजेपी नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के हेलीकॉप्टर को धान के खेत में अचानक उतारना पड़ा। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि तकनीकी खराबी आने के बाद पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतारा, जहां हेलीकॉप्टर देखने के लिए ग्रामीण भी जुट गए। मिली जानकारी के मुताबिक, बृजभूषण शरण सिंह एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। उड़ान के कुछ ही मिनट बाद हेलीकॉप्टर में तकनीकी दिक्कत आने लगी। स्थिति को समझते हुए पायलट ने तुरंत इमरजेंसी लैंडिंग का फैसला लिया और नज़दीकी धान के खेत में हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतार दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। हेलीकॉप्टर की जांच के लिए टेक्निकल टीम बुलाई गई है। फिलहाल राहत की बात यह है कि बृजभूषण शरण सिंह और हेलीकॉप्टर में मौजूद सभी लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं। जांच के बाद ही तकनीकी खराबी की असली वजह पता चल पाएगी। इसी बीच पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर संदेश दिया। उन्होंने कहा, आज मेरा बिहार प्रदेश के अंदर संदेश व दिनारा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सभा का कार्यक्रम था। संदेश विधानसभा का कार्यक्रम करके मैं दिनारा विधानसभा के लिए हेलीकाप्टर से निकला था। अचानक मौसम खराब होने के कारण हेलीकाप्टर की सुरक्षित लैंडिंग एक खेत में करानी पड़ी। पायलट ने बड़ी सूझबूझ से लैंडिंग कराई। मैं, इस समय गाड़ी से पटना जा रहा हूं। किसी अफवाह में आने की जरूरत नहीं है। किसी प्रकार की कोई हानि नहीं हुई है। हम सभी पूर्णतया सुरक्षित हैं। हेलीकाप्टर की सुरक्षा का प्रबंध कर दिया गया है। प्रशासन व जनता का बहुत सहयोग रहा...धन्यवाद
Lucknow Desk: आज 02 नवंबर 2025 को बॉलीवुड के बादशाह Shahrukh Khan ने अपने 60वें जन्मदिन का जश्न मनाया। इस मौके पर उन्होंने अपने परिवार, करीबियों और फिल्म इंडस्ट्री के दोस्तों के साथ खुशियाँ बाँटी। उन्होंने अपने आलीशान घर के बजाय इस बार सार्वजनिक रूप से Mannat से बाहर नहीं दिखने का फैसला किया क्योंकि वहाँ फिलहाल निर्माण का काम चल रहा है। वहीँ, जश्न के लिए उन्होंने Alibaug में स्थित निजी स्थान चुना। एक विशेष फैन-मीट कार्यक्रम Balgandharva Rangmandir, बांद्रा में आयोजित किया गया था, जहाँ सीमित प्रवेश पास के माध्यम से प्रशंसक सीधे शामिल हुए। सोशल मीडिया पर सितारों ने बधाइयाँ दीं। जिसमें Farah Khan ने लिखा, “Happy birthday KING … rule for another 100 years”। बता दें कि Shahrukh Khan के जन्मदिन के मौके पर सिर्फ भारत भर से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी फैंस जुटे। शाहरुख खान के फैन क्लबों ने जन्मदिन सप्ताह के रूप में मनाया, चैरिटी ड्राइव, विशेष बैनर आदि के माध्यम से ख़ास अंदाज़ से जश्न मनाया।
बिहार के साहेबगंज विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने वर्ष 2018 के चर्चित हर्ष फायरिंग मामले में 4 साल की सजा सुनाई है। अदालत ने उन्हें गैर-इरादतन हत्या (IPC की धारा 304 भाग-II) और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी मानते हुए यह फैसला सुनाया। इसके साथ ही कोर्ट ने पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया। यह फैसला शनिवार, 4 जुलाई 2026 को सुनाया गया। क्या है पूरा मामला? यह घटना 31 दिसंबर 2018 और 1 जनवरी 2019 की रात दिल्ली के फतेहपुर बेरी स्थित एक फार्महाउस में आयोजित न्यू ईयर पार्टी की है। आरोप के अनुसार, पार्टी के दौरान राजू कुमार सिंह ने अपनी लाइसेंसी पिस्तौल से हर्ष फायरिंग की। फायरिंग के दौरान चली एक गोली पार्टी में मौजूद डॉ. अर्चना गुप्ता को लग गई। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। कब दोषी ठहराया गया? करीब आठ साल तक चली सुनवाई के बाद 6 जून 2026 को राउज एवेन्यू कोर्ट ने राजू कुमार सिंह को दोषी करार दिया। अदालत ने माना कि भीड़भाड़ वाले कार्यक्रम में हथियार से फायरिंग करना बेहद खतरनाक था और आरोपी को यह जानकारी होनी चाहिए थी कि इस तरह की हरकत किसी की जान ले सकती है। दोषी ठहराए जाने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। 3 जुलाई को पूरी हुई बहस, 4 जुलाई को सुनाई गई सजा 3 जुलाई 2026 को सजा तय करने को लेकर अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें पूरी हुईं। बचाव पक्ष ने अदालत से नरमी बरतने और प्रोबेशन पर रिहा करने की मांग की। वहीं अभियोजन पक्ष ने कहा कि हर्ष फायरिंग जैसे मामलों में सख्त सजा जरूरी है ताकि समाज में गलत संदेश न जाए। बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके अगले दिन 4 जुलाई 2026 को कोर्ट ने राजू कुमार सिंह को 4 साल की साधारण कारावास (Simple Imprisonment) की सजा सुनाई। साथ ही आर्म्स एक्ट के तहत 2 महीने की अतिरिक्त सजा भी सुनाई गई, जो साथ-साथ चलेगी। अदालत ने क्या कहा? विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि हर्ष फायरिंग समाज के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि भीड़ के बीच हथियार से फायरिंग करना एक खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना कृत्य है। कोर्ट ने माना कि आरोपी के इस कृत्य से एक निर्दोष महिला की जान गई, इसलिए सख्त सजा आवश्यक है। राजनीतिक असर भी संभव चार साल की सजा मिलने के बाद राजू कुमार सिंह की विधानसभा सदस्यता पर भी कानूनी प्रभाव पड़ सकता है। जनप्रतिनिधित्व कानून के अनुसार, दो वर्ष या उससे अधिक की सजा पाने वाले जनप्रतिनिधियों की सदस्यता समाप्त होने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है, हालांकि अंतिम निर्णय संबंधित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत होगा। घटनाक्रम एक नजर में 31 दिसंबर 2018 / 1 जनवरी 2019: न्यू ईयर पार्टी में हर्ष फायरिंग, डॉ. अर्चना गुप्ता की मौत। 6 जून 2026: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने राजू कुमार सिंह को दोषी करार दिया और न्यायिक हिरासत में भेजा। 3 जुलाई 2026: सजा पर दोनों पक्षों की बहस पूरी, फैसला सुरक्षित रखा गया। 4 जुलाई 2026: कोर्ट ने 4 साल की जेल और 25 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश सुनाया। यह फैसला एक बार फिर यह संदेश देता है कि जश्न के नाम पर हथियारों का इस्तेमाल किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून सभी के लिए समान है और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों पर कानून का पालन करने की जिम्मेदारी और अधिक होती है।
बिहार सरकार ने राज्य की कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 12 वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला कर दिया है। गृह विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार कई महत्वपूर्ण पदों पर नए अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। इस प्रशासनिक फेरबदल को राज्य की पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने और विभिन्न विभागों के कार्यों में तेजी लाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की पहल सरकार समय-समय पर प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुसार अधिकारियों के दायित्वों में बदलाव करती रहती है। इस बार भी कई जिलों और महत्वपूर्ण इकाइयों में कार्यरत आईपीएस अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। सरकार का मानना है कि अनुभवी अधिकारियों की नई तैनाती से कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण से जुड़े कार्यों में सुधार होगा। कई वरिष्ठ अधिकारियों को मिली नई जिम्मेदारी तबादला सूची में शामिल अधिकारियों को पुलिस मुख्यालय, विशेष इकाइयों, प्रशिक्षण संस्थानों और विभिन्न जिलों में नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। कुछ अधिकारियों को उनके अनुभव के आधार पर महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया गया है, जबकि कुछ को प्रशासनिक जरूरतों के अनुरूप स्थानांतरित किया गया है। इस बदलाव के बाद संबंधित अधिकारियों ने नए पदों पर कार्यभार संभालने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। कानून-व्यवस्था पर रहेगा विशेष फोकस राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि पुलिस प्रशासन को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और आधुनिक बनाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। नए पदस्थापित अधिकारियों से अपेक्षा की गई है कि वे अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा, साइबर अपराध की रोकथाम, यातायात प्रबंधन और जनसुनवाई जैसी व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाएंगे। इसके साथ ही पुलिस और आम जनता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। प्रशासनिक फेरबदल को माना जा रहा महत्वपूर्ण कदम विशेषज्ञों का मानना है कि वरिष्ठ अधिकारियों के अनुभव का बेहतर उपयोग करने के लिए समय-समय पर इस तरह के तबादले आवश्यक होते हैं। इससे प्रशासनिक कार्यों में नई ऊर्जा आती है और विभिन्न इकाइयों में कार्यकुशलता बढ़ती है। बिहार सरकार का यह फैसला भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आगे क्या होगा? नई जिम्मेदारियां संभालने के बाद अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में प्राथमिकताओं के अनुसार कार्ययोजना तैयार करेंगे। आने वाले दिनों में पुलिस विभाग की कार्यशैली, अपराध नियंत्रण अभियान और सुरक्षा व्यवस्था में इन बदलावों का प्रभाव देखने को मिल सकता है। सरकार ने उम्मीद जताई है कि यह प्रशासनिक फेरबदल राज्य में बेहतर पुलिसिंग और सुशासन को और मजबूती प्रदान करेगा।
Lucknow Desk: Hyderabad में Donald Trump के नाम पर सड़क का नाम रखने की खबर चर्चा में है। इसे भारत और अमेरिका के रिश्तों के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप ने जताया आभार डोनाल्ड ट्रंप ने इस पहल के लिए धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने भारत और हैदराबाद के लोगों के प्रति आभार जताते हुए इसे सम्मान की बात बताया। भारत-अमेरिका संबंधों का संदेश इस फैसले को दोनों देशों के मजबूत संबंधों और आपसी सहयोग का संकेत माना जा रहा है। राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी इस खबर को लेकर चर्चा तेज है। सोशल मीडिया पर चर्चा सड़क के नामकरण की खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया, जबकि कुछ ने इस पर सवाल भी उठाए।