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होर्मुज से भारत के लिए बड़ी राहत: यूरिया और डीएपी से लदे 15 जहाज पहुंचे, किसानों को मिलेगी समय पर खाद

TV 24 Network July 6, 2026 0
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होर्मुज से भारत के लिए बड़ी राहत: यूरिया और डीएपी से लदे 15 जहाज पहुंचे, किसानों को मिलेगी समय पर खाद

भारत के कृषि क्षेत्र के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से यूरिया, डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) और सल्फर लेकर आ रहे 15 मालवाहक जहाज सुरक्षित रूप से भारत की ओर बढ़ चुके हैं। यह जानकारी केंद्र सरकार ने दी है। हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और समुद्री मार्गों पर सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण इन जहाजों की आवाजाही को लेकर आशंका बनी हुई थी। अब इन जहाजों के सुरक्षित आगे बढ़ने से देश में उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर राहत मिली है।

 

किसानों के लिए राहत की खबर

यूरिया और डीएपी खरीफ फसलों के लिए सबसे महत्वपूर्ण उर्वरकों में गिने जाते हैं। ऐसे समय में जब कई राज्यों में खेती का कार्य तेज़ी से चल रहा है, इन जहाजों के भारत पहुंचने से किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। सरकार का कहना है कि इससे उर्वरकों की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी और बाजार में किसी प्रकार की कमी की आशंका भी कम होगी।

 

घरेलू उत्पादन भी लक्ष्य से अधिक

सरकार ने यह भी बताया है कि अप्रैल से जून 2026 के दौरान देश में यूरिया का घरेलू उत्पादन निर्धारित लक्ष्य से अधिक रहा है। इस अवधि में लगभग 71.6 लाख टन यूरिया का उत्पादन हुआ, जबकि लक्ष्य 67.9 लाख टन था। लगातार तीन महीनों तक लक्ष्य से अधिक उत्पादन होने से देश की उर्वरक उपलब्धता और मजबूत हुई है।

 

वैश्विक तनाव के बीच मजबूत तैयारी

पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे माहौल में भारत सरकार ने आयात के साथ-साथ घरेलू उत्पादन पर भी विशेष ध्यान दिया, जिससे संभावित संकट का असर किसानों तक न पहुंचे।

 

जल्द भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचेगा माल

सरकार के अनुसार, ये जहाज भारत के विभिन्न बंदरगाहों पर पहुंचने के बाद यूरिया, डीएपी और सल्फर की खेप उतारेंगे। इसके बाद संबंधित राज्यों में उर्वरकों की आपूर्ति तेज़ी से की जाएगी। इससे खरीफ सीजन में किसानों की जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिलेगी और कृषि कार्य प्रभावित नहीं होंगे।

होर्मुज जलडमरूमध्य से 15 उर्वरक जहाजों का सुरक्षित भारत की ओर बढ़ना देश के कृषि क्षेत्र के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है। एक ओर घरेलू उत्पादन लक्ष्य से अधिक रहा है, वहीं दूसरी ओर आयातित उर्वरकों की नियमित आपूर्ति से देश में खाद की उपलब्धता मजबूत बनी रहेगी। सरकार का कहना है कि किसानों को समय पर आवश्यक उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे खेती और खाद्य सुरक्षा पर किसी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

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Hormuz-Strait Urea DAP Fertilizer Agriculture
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Brijbhushan Sharan Singh के हेलीकॉप्टर की खेत में इमरजेंसी लैंडिंग! इस वजह से बिगड़ा संतुलन

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Shahrukh Khan ने मनाया 60वां जन्मदिन, विदेशों से भी जुटे फैंस

Lucknow Desk: आज 02 नवंबर 2025 को बॉलीवुड के बादशाह Shahrukh Khan ने अपने 60वें जन्मदिन का जश्न मनाया। इस मौके पर उन्होंने अपने परिवार, करीबियों और फिल्म इंडस्ट्री के दोस्तों के साथ खुशियाँ बाँटी। उन्होंने अपने आलीशान घर के बजाय इस बार सार्वजनिक रूप से Mannat से बाहर नहीं दिखने का फैसला किया क्योंकि वहाँ फिलहाल निर्माण का काम चल रहा है। वहीँ, जश्न के लिए उन्होंने Alibaug में स्थित निजी स्थान चुना। एक विशेष फैन-मीट कार्यक्रम Balgandharva Rangmandir, बांद्रा में आयोजित किया गया था, जहाँ सीमित प्रवेश पास के माध्यम से प्रशंसक सीधे शामिल हुए। सोशल मीडिया पर सितारों ने बधाइयाँ दीं। जिसमें Farah Khan ने लिखा, “Happy birthday KING … rule for another 100 years”। बता दें कि Shahrukh Khan के जन्मदिन के मौके पर सिर्फ भारत भर से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी फैंस जुटे। शाहरुख खान के फैन क्लबों ने जन्मदिन सप्ताह के रूप में मनाया, चैरिटी ड्राइव, विशेष बैनर आदि के माध्यम से ख़ास अंदाज़ से जश्न मनाया।

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उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार और ताइवान के रक्षा बजट में बढ़ोतरी
उत्तर कोरिया के पास हो सकते हैं 120 परमाणु हथियार, ताइवान ने बढ़ाया रक्षा बजट

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच दक्षिण कोरिया और ताइवान से दो महत्वपूर्ण खबरें सामने आई हैं। दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री ने अनुमान जताया है कि उत्तर कोरिया के पास 80 से 120 तक परमाणु हथियार हो सकते हैं। दूसरी ओर, ताइवान सरकार ने वर्ष 2027 के रक्षा बजट में 18 प्रतिशत बढ़ोतरी करने का प्रस्ताव रखा है। इन दोनों घटनाक्रमों को क्षेत्र में बदलते सुरक्षा समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है।   उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों पर बड़ा अनुमान दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री आन ग्यू-बैक के अनुसार, उत्तर कोरिया के पास लगभग 80 से 120 परमाणु हथियार हो सकते हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अनुमान निजी अनुसंधान संस्थाओं के आंकड़ों पर आधारित है। दक्षिण कोरियाई सेना के पास उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों की सटीक संख्या की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करने की क्षमता नहीं है।   दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया को आधिकारिक रूप से परमाणु हथियार संपन्न देश मानने से भी इनकार किया है। सियोल का कहना है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका की विस्तारित परमाणु सुरक्षा व्यवस्था पर निर्भर रहेगा। दक्षिण कोरिया ने अपने देश में अमेरिकी सामरिक परमाणु हथियारों की तैनाती का भी समर्थन नहीं किया है।   उत्तर कोरिया पिछले कई वर्षों से अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम का लगातार विस्तार कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और कूटनीतिक दबाव के बावजूद प्योंगयांग ने कई मिसाइल परीक्षण किए हैं। इससे दक्षिण कोरिया, जापान और अमेरिका सहित अनेक देशों की चिंता बढ़ी हुई है।   ताइवान का रक्षा बजट रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचेगा इस बीच ताइवान सरकार ने वर्ष 2027 के रक्षा बजट में 18 प्रतिशत बढ़ोतरी करने का औपचारिक प्रस्ताव रखा है। प्रस्तावित बजट लगभग 1.1225 ट्रिलियन ताइवानी डॉलर यानी करीब 31.41 अरब अमेरिकी डॉलर होगा। पहली बार ताइवान का रक्षा बजट एक ट्रिलियन ताइवानी डॉलर से ऊपर पहुंच सकता है। यह राशि ताइवान के सकल घरेलू उत्पाद के तीन प्रतिशत से अधिक होगी।   इस बजट का उपयोग ड्रोन, मिसाइल, स्वदेशी पनडुब्बियों तथा अन्य आधुनिक सैन्य उपकरणों पर किए जाने की संभावना है। ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने बढ़ते रक्षा खर्च को शांति और राष्ट्रीय सुरक्षा में किया गया निवेश बताया है।   ताइवान ने यह कदम ऐसे समय उठाया है, जब चीन की ओर से उस पर सैन्य और राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। चीन ताइवान को अपना क्षेत्र मानता है और आवश्यकता पड़ने पर बल प्रयोग की संभावना से इनकार नहीं करता। वहीं, ताइवान का कहना है कि उसके भविष्य का निर्णय केवल वहां की जनता को करना चाहिए।   एशिया में बढ़ती हथियारों की प्रतिस्पर्धा उत्तर कोरिया के संभावित परमाणु हथियारों और ताइवान के रिकॉर्ड रक्षा बजट से संकेत मिलता है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सैन्य प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है। उत्तर कोरिया की परमाणु क्षमता कोरियाई प्रायद्वीप के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है, जबकि चीन और ताइवान के बीच तनाव पूरे क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।   दोनों घटनाक्रम 20 अगस्त 2026 को सामने आए हैं। आने वाले समय में अमेरिका, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया की नीतियां इस क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

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भारत पर 100 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ का खतरा और US Senate Russia sanctions bill
भारत पर 100% अमेरिकी टैरिफ का खतरा, US Senate ने रूस प्रतिबंध बिल किया पास

अमेरिका में रूस के खिलाफ एक बड़े प्रतिबंध विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद भारत के लिए व्यापारिक चिंता बढ़ गई है। अमेरिकी सीनेट ने शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 को Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 को 86–11 वोटों से पास कर दिया। इस विधेयक में उन देशों के खिलाफ कड़े आर्थिक कदम उठाने का प्रावधान है जो रूस से बड़ी मात्रा में तेल और गैस खरीदते हैं। भारत और चीन भी इस दायरे में आ सकते हैं।   100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार इस विधेयक के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया जा सकता है, जो रूसी ऊर्जा पर अधिक निर्भर हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि भारत पर अभी 100 प्रतिशत टैरिफ लागू हो गया है।   विधेयक राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि जरूरत पड़ने पर ऐसे देशों के खिलाफ टैरिफ लगाया जा सके। भारत के अलावा चीन, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया जैसे देशों का भी उल्लेख किया गया है।   भारत क्यों आया निशाने पर? यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की खरीद की है। पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद रूस ने कई देशों को रियायती दरों पर कच्चा तेल बेचना शुरू किया था।   भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरत और राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए रूस से तेल खरीद जारी रखी। इससे भारतीय रिफाइनरियों को अपेक्षाकृत सस्ता कच्चा तेल मिला और देश की ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने में मदद मिली।   अमेरिकी सांसदों का तर्क है कि रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों के कारण मॉस्को को आर्थिक आय मिलती रहती है, जिसका इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में किया जा सकता है।   क्या भारत पर तुरंत लगेगा 100% टैरिफ? फिलहाल ऐसा नहीं है। अमेरिकी सीनेट से बिल पास होना केवल एक महत्वपूर्ण चरण है। अब इस विधेयक को House of Representatives में भी मंजूरी लेनी होगी। इसके बाद ही इसे कानून बनने की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है।   रिपोर्ट के अनुसार, हाउस में इस विधेयक को लेकर कुछ सांसदों की चिंताएं भी हैं। उनका कहना है कि अत्यधिक टैरिफ से अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ फिलहाल केवल एक संभावित खतरा है, लागू फैसला नहीं।   भारत-अमेरिका व्यापार पर पड़ सकता है असर अगर भविष्य में भारत पर इतना बड़ा टैरिफ लगाया जाता है, तो अमेरिका को होने वाला भारतीय निर्यात महंगा हो सकता है। कपड़ा, इंजीनियरिंग सामान, ऑटो पार्ट्स, केमिकल और अन्य भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है।   इसका प्रभाव दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों पर भी पड़ सकता है। भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच व्यापार लगातार बढ़ा है।   अब सभी की नजर अमेरिकी House of Representatives पर रहेगी। अगर वहां भी विधेयक मंजूर हो जाता है, तो आगे राष्ट्रपति की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।   फिलहाल भारत पर 100 प्रतिशत नया टैरिफ लागू नहीं हुआ है। इसलिए खबर को “भारत पर 100% टैरिफ लागू” कहने के बजाय “भारत पर 100% अमेरिकी टैरिफ का खतरा” कहना अधिक सही होगा।

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कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंची
Crude Oil Price: कच्चा तेल 100 डॉलर के पार, भारत में पेट्रोल-डीजल और महंगाई पर पड़ सकता है असर

दुनियाभर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमत में तेज उछाल देखने को मिला है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत कुछ समय के लिए 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। हालांकि, 24 जुलाई 2026 को शुरुआती कारोबार में कीमत थोड़ी नीचे भी आई, लेकिन यह अब भी लगभग 99 से 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है। अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI का भाव लगभग 91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया।   तेल की कीमत में यह बढ़ोतरी केवल मांग बढ़ने के कारण नहीं हुई है। इसके पीछे पश्चिम एशिया में जारी तनाव और समुद्री मार्गों से तेल की सप्लाई बाधित होने का डर प्रमुख कारण बताया जा रहा है।   लाल सागर में तेल टैंकरों पर हमले रिपोर्टों के अनुसार, लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमले के बाद वैश्विक बाजार में चिंता बढ़ गई है। इन हमलों के कारण व्यापारियों को डर है कि तेल ले जाने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।   लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते हैं। यदि इन मार्गों पर खतरा बढ़ता है, तो तेल टैंकरों को अफ्रीका के चारों ओर से लंबा रास्ता अपनाना पड़ सकता है। इससे यात्रा का समय, बीमा खर्च और माल ढुलाई की लागत काफी बढ़ जाएगी। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।   होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी चिंता तेल बाजार पहले से ही होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान की आशंका का सामना कर रहा है। यह मार्ग पश्चिम एशिया से दुनिया के विभिन्न हिस्सों में कच्चा तेल पहुंचाने के सबसे महत्वपूर्ण रास्तों में शामिल है।   अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। अब लाल सागर के रास्ते पर भी खतरा बढ़ने से बाजार को दो महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर सप्लाई बाधित होने का डर सता रहा है। इसी आशंका ने ब्रेंट क्रूड को दो महीने में पहली बार 100 डॉलर के स्तर के ऊपर पहुंचा दिया।   भारत पर क्या होगा असर? भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने से भारत का आयात खर्च बढ़ सकता है। तेल खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर खर्च होने पर देश के व्यापार घाटे और रुपये पर भी दबाव पड़ सकता है।   यदि कच्चे तेल की ऊंची कीमत लंबे समय तक बनी रहती है, तो पेट्रोलियम कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। इसका प्रभाव पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और विमान ईंधन की कीमतों पर दिखाई दे सकता है। हालांकि, पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें बढ़ेंगी या नहीं, इसका फैसला सरकार, तेल कंपनियों, टैक्स और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।   महंगाई बढ़ने का खतरा डीजल की कीमत बढ़ने पर ट्रक और अन्य मालवाहक वाहनों का खर्च बढ़ जाता है। इससे सब्जियों, फलों, दूध, अनाज और रोजमर्रा के सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना महंगा हो सकता है। कंपनियां बढ़ा हुआ परिवहन खर्च ग्राहकों से वसूल सकती हैं, जिससे बाजार में वस्तुओं की कीमत बढ़ने का खतरा रहता है।   महंगा कच्चा तेल एयरलाइंस, प्लास्टिक, पेंट, केमिकल, सीमेंट और लॉजिस्टिक्स जैसे उद्योगों की लागत भी बढ़ा सकता है। वैश्विक स्तर पर तेल के 100 डॉलर तक पहुंचने से महंगाई दोबारा बढ़ने और आर्थिक विकास की गति धीमी होने की चिंता पैदा हो गई है।   क्या कीमत 120 डॉलर तक जा सकती है? कुछ बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समुद्री रास्तों पर हमले जारी रहते हैं और तेल की सप्लाई में वास्तविक कमी आती है, तो ब्रेंट क्रूड की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। हालांकि, यह केवल एक संभावना है। तनाव कम होने, समुद्री रास्ते सुरक्षित होने या अन्य देशों द्वारा उत्पादन बढ़ाने पर कीमतों में गिरावट भी आ सकती है।   फिलहाल पूरी दुनिया की नजर पश्चिम एशिया की स्थिति और तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही पर बनी हुई है। आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों की दिशा इन्हीं घटनाओं पर निर्भर करेगी।

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