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अमेरिका के B-1, B-2 और B-52 बॉम्बर्स का ईरान पर हमला, एयर डिफेंस के सामने बड़ी चुनौती

TV 24 Network July 23, 2026 0
अमेरिका के B-1, B-2 और B-52 बॉम्बर ईरान पर हमला करते हुए
B-1, B-2 और B-52 बॉम्बर्स से ईरान पर अमेरिकी हमला

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव लगातार गंभीर होता जा रहा है। अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ अपने सबसे शक्तिशाली रणनीतिक बमवर्षक विमानों का इस्तेमाल किया है। रिपोर्टों के मुताबिक, B-1, B-2 और B-52 जैसे खतरनाक बॉम्बर्स को अलग-अलग सैन्य अभियानों में इस्तेमाल किया गया है। हालिया हमलों में B-1 बॉम्बर के जरिए ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई है।

 

ईरान के खिलाफ उतारा गया B-1 बॉम्बर

अमेरिकी सेना ने हालिया संघर्ष में पहली बार B-1 लॉन्ग-रेंज बॉम्बर का इस्तेमाल करते हुए ईरान में IRGC से जुड़े ठिकानों पर हमला किया। रिपोर्ट के अनुसार, यह मिशन ब्रिटेन के एक एयरबेस से शुरू हुआ था। B-1 अपनी तेज रफ्तार और बड़ी मात्रा में हथियार ले जाने की क्षमता के लिए जाना जाता है।

 

B-2 ने भी किए ईरान पर हमले

इससे पहले अमेरिका के B-2 Spirit स्टेल्थ बॉम्बर्स का भी ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में इस्तेमाल किया गया था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने मार्च 2026 में हुए हमलों में B-2 विमानों की भागीदारी की पुष्टि की थी। ये विमान लंबी दूरी तक उड़ान भरने और अत्यधिक सुरक्षित ठिकानों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किए गए हैं।

 

क्यों खास हैं अमेरिका के ये बॉम्बर्स?

B-1, B-2 और B-52 अमेरिकी वायुसेना की रणनीतिक बमवर्षक क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। B-1 तेज गति और भारी हथियार क्षमता के लिए जाना जाता है, जबकि B-2 की स्टेल्थ तकनीक उसे रडार से बचने में मदद करती है। वहीं B-52 लंबी दूरी तक बड़ी मात्रा में हथियार लेकर उड़ान भर सकता है।

ऐसे अलग-अलग क्षमताओं वाले विमानों के इस्तेमाल से अमेरिका को विभिन्न प्रकार के सैन्य ठिकानों पर हमला करने के कई विकल्प मिल जाते हैं।

 

ईरान के एयर डिफेंस पर बढ़ा दबाव

लगातार हवाई हमलों से ईरान की वायु रक्षा प्रणाली पर दबाव बढ़ा है। हालांकि यह कहना कि ईरान का पूरा एयर डिफेंस पूरी तरह बेबस हो गया है, उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर सही नहीं होगा। ईरान अभी भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों के खिलाफ हमले कर रहा है और रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अपने रुख पर कायम है।

 

फिर बढ़ा अमेरिका-ईरान संघर्ष

हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर हमलों का सिलसिला तेज हुआ है। जुलाई में ईरान से जुड़े हमलों के बाद अमेरिका ने भी ईरानी ठिकानों के खिलाफ नए सैन्य हमले किए। इससे पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है।

 

होर्मुज जलडमरूमध्य बना बड़ा मुद्दा

इस पूरे संघर्ष में होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक बना हुआ है। यह समुद्री रास्ता वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के साथ इस इलाके में सैन्य गतिविधियां भी बढ़ी हैं। बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिशें भी जारी हैं।

 

अमेरिका की ओर से शक्तिशाली बॉम्बर्स के इस्तेमाल से साफ है कि संघर्ष में सैन्य दबाव बढ़ाया जा रहा है। दूसरी तरफ ईरान भी पीछे हटता नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में सैन्य कार्रवाई और कूटनीतिक बातचीत, दोनों पर दुनिया की नजर रहेगी।

फिलहाल स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और किसी भी नए हमले से पश्चिम एशिया में तनाव और अधिक बढ़ सकता है।

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Brijbhushan Sharan Singh के हेलीकॉप्टर की खेत में इमरजेंसी लैंडिंग! इस वजह से बिगड़ा संतुलन

Lucknow Desk: कैसरगंज के बीजेपी नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के हेलीकॉप्टर को धान के खेत में अचानक उतारना पड़ा। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि तकनीकी खराबी आने के बाद पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतारा, जहां हेलीकॉप्टर देखने के लिए ग्रामीण भी जुट गए। मिली जानकारी के मुताबिक, बृजभूषण शरण सिंह एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। उड़ान के कुछ ही मिनट बाद हेलीकॉप्टर में तकनीकी दिक्कत आने लगी। स्थिति को समझते हुए पायलट ने तुरंत इमरजेंसी लैंडिंग का फैसला लिया और नज़दीकी धान के खेत में हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतार दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। हेलीकॉप्टर की जांच के लिए टेक्निकल टीम बुलाई गई है। फिलहाल राहत की बात यह है कि बृजभूषण शरण सिंह और हेलीकॉप्टर में मौजूद सभी लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं। जांच के बाद ही तकनीकी खराबी की असली वजह पता चल पाएगी। इसी बीच पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर संदेश दिया। उन्होंने कहा, आज मेरा बिहार प्रदेश के अंदर संदेश व दिनारा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सभा का कार्यक्रम था। संदेश विधानसभा का कार्यक्रम करके मैं दिनारा विधानसभा के लिए हेलीकाप्टर से निकला था। अचानक मौसम खराब होने के कारण हेलीकाप्टर की सुरक्षित लैंडिंग एक खेत में करानी पड़ी। पायलट ने बड़ी सूझबूझ से लैंडिंग कराई। मैं, इस समय गाड़ी से पटना जा रहा हूं। किसी अफवाह में आने की जरूरत नहीं है। किसी प्रकार की कोई हानि नहीं हुई है। हम सभी पूर्णतया सुरक्षित हैं। हेलीकाप्टर की सुरक्षा का प्रबंध कर दिया गया है। प्रशासन व जनता का बहुत सहयोग रहा...धन्यवाद

Shahrukh Khan ने मनाया 60वां जन्मदिन, विदेशों से भी जुटे फैंस

Lucknow Desk: आज 02 नवंबर 2025 को बॉलीवुड के बादशाह Shahrukh Khan ने अपने 60वें जन्मदिन का जश्न मनाया। इस मौके पर उन्होंने अपने परिवार, करीबियों और फिल्म इंडस्ट्री के दोस्तों के साथ खुशियाँ बाँटी। उन्होंने अपने आलीशान घर के बजाय इस बार सार्वजनिक रूप से Mannat से बाहर नहीं दिखने का फैसला किया क्योंकि वहाँ फिलहाल निर्माण का काम चल रहा है। वहीँ, जश्न के लिए उन्होंने Alibaug में स्थित निजी स्थान चुना। एक विशेष फैन-मीट कार्यक्रम Balgandharva Rangmandir, बांद्रा में आयोजित किया गया था, जहाँ सीमित प्रवेश पास के माध्यम से प्रशंसक सीधे शामिल हुए। सोशल मीडिया पर सितारों ने बधाइयाँ दीं। जिसमें Farah Khan ने लिखा, “Happy birthday KING … rule for another 100 years”। बता दें कि Shahrukh Khan के जन्मदिन के मौके पर सिर्फ भारत भर से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी फैंस जुटे। शाहरुख खान के फैन क्लबों ने जन्मदिन सप्ताह के रूप में मनाया, चैरिटी ड्राइव, विशेष बैनर आदि के माध्यम से ख़ास अंदाज़ से जश्न मनाया।

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अमेरिका के B-1, B-2 और B-52 बॉम्बर ईरान पर हमला करते हुए
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अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव लगातार गंभीर होता जा रहा है। अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ अपने सबसे शक्तिशाली रणनीतिक बमवर्षक विमानों का इस्तेमाल किया है। रिपोर्टों के मुताबिक, B-1, B-2 और B-52 जैसे खतरनाक बॉम्बर्स को अलग-अलग सैन्य अभियानों में इस्तेमाल किया गया है। हालिया हमलों में B-1 बॉम्बर के जरिए ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई है।   ईरान के खिलाफ उतारा गया B-1 बॉम्बर अमेरिकी सेना ने हालिया संघर्ष में पहली बार B-1 लॉन्ग-रेंज बॉम्बर का इस्तेमाल करते हुए ईरान में IRGC से जुड़े ठिकानों पर हमला किया। रिपोर्ट के अनुसार, यह मिशन ब्रिटेन के एक एयरबेस से शुरू हुआ था। B-1 अपनी तेज रफ्तार और बड़ी मात्रा में हथियार ले जाने की क्षमता के लिए जाना जाता है।   B-2 ने भी किए ईरान पर हमले इससे पहले अमेरिका के B-2 Spirit स्टेल्थ बॉम्बर्स का भी ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में इस्तेमाल किया गया था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने मार्च 2026 में हुए हमलों में B-2 विमानों की भागीदारी की पुष्टि की थी। ये विमान लंबी दूरी तक उड़ान भरने और अत्यधिक सुरक्षित ठिकानों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किए गए हैं।   क्यों खास हैं अमेरिका के ये बॉम्बर्स? B-1, B-2 और B-52 अमेरिकी वायुसेना की रणनीतिक बमवर्षक क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। B-1 तेज गति और भारी हथियार क्षमता के लिए जाना जाता है, जबकि B-2 की स्टेल्थ तकनीक उसे रडार से बचने में मदद करती है। वहीं B-52 लंबी दूरी तक बड़ी मात्रा में हथियार लेकर उड़ान भर सकता है। ऐसे अलग-अलग क्षमताओं वाले विमानों के इस्तेमाल से अमेरिका को विभिन्न प्रकार के सैन्य ठिकानों पर हमला करने के कई विकल्प मिल जाते हैं।   ईरान के एयर डिफेंस पर बढ़ा दबाव लगातार हवाई हमलों से ईरान की वायु रक्षा प्रणाली पर दबाव बढ़ा है। हालांकि यह कहना कि ईरान का पूरा एयर डिफेंस पूरी तरह बेबस हो गया है, उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर सही नहीं होगा। ईरान अभी भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों के खिलाफ हमले कर रहा है और रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अपने रुख पर कायम है।   फिर बढ़ा अमेरिका-ईरान संघर्ष हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर हमलों का सिलसिला तेज हुआ है। जुलाई में ईरान से जुड़े हमलों के बाद अमेरिका ने भी ईरानी ठिकानों के खिलाफ नए सैन्य हमले किए। इससे पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है।   होर्मुज जलडमरूमध्य बना बड़ा मुद्दा इस पूरे संघर्ष में होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक बना हुआ है। यह समुद्री रास्ता वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के साथ इस इलाके में सैन्य गतिविधियां भी बढ़ी हैं। बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिशें भी जारी हैं।   अमेरिका की ओर से शक्तिशाली बॉम्बर्स के इस्तेमाल से साफ है कि संघर्ष में सैन्य दबाव बढ़ाया जा रहा है। दूसरी तरफ ईरान भी पीछे हटता नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में सैन्य कार्रवाई और कूटनीतिक बातचीत, दोनों पर दुनिया की नजर रहेगी। फिलहाल स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और किसी भी नए हमले से पश्चिम एशिया में तनाव और अधिक बढ़ सकता है।

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मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका द्वारा ईरान समर्थित ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद दुनिया की नजरें अब होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिक गई हैं। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है और यदि यहां किसी भी प्रकार का सैन्य टकराव या अवरोध पैदा होता है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय समुदाय ईरान की अगली रणनीति को लेकर चिंतित है।   क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज जलडमरूमध्य? होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। इसके अलावा तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की बड़ी मात्रा भी इसी मार्ग से वैश्विक बाजारों तक पहुंचती है। ऐसे में यदि यह रास्ता बाधित होता है, तो तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जिसका असर भारत सहित कई देशों पर पड़ेगा।   अमेरिकी हमले के बाद ईरान के सामने विकल्प विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान के सामने कई रणनीतिक विकल्प मौजूद हैं। ईरान सीधे युद्ध में उतरने के बजाय अपने नौसैनिक बलों की गतिविधियां बढ़ा सकता है, क्षेत्र में सैन्य अभ्यास कर सकता है या फिर अपने सहयोगी समूहों के माध्यम से दबाव बनाने की कोशिश कर सकता है।   हालांकि ईरान लंबे समय से यह कहता रहा है कि यदि उसके राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचाया गया तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही को प्रभावित करने जैसे कदम उठा सकता है। फिर भी ऐसा कोई भी कदम उसके लिए भी आर्थिक और कूटनीतिक जोखिम लेकर आएगा, क्योंकि उसके अपने निर्यात पर भी इसका असर पड़ सकता है।   वैश्विक बाजारों की बढ़ी चिंता तनाव बढ़ने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया है। निवेशकों को आशंका है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है तो ऊर्जा आपूर्ति बाधित हो सकती है। कई देशों ने अपने रणनीतिक तेल भंडार और वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों की समीक्षा शुरू कर दी है। समुद्री सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियां भी इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं। कई शिपिंग कंपनियां अपने जहाजों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाने पर विचार कर रही हैं।   भारत पर क्या हो सकता है असर? भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है, जिससे पेट्रोल-डीजल, परिवहन लागत और महंगाई पर असर पड़ सकता है। साथ ही भारतीय व्यापारिक जहाजों और इस क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है।   क्या टल सकता है बड़ा संकट? अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल सभी पक्ष पूर्ण युद्ध से बचना चाहते हैं। अमेरिका और उसके सहयोगी क्षेत्र में सुरक्षा बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि कई देश कूटनीतिक समाधान पर जोर दे रहे हैं। यदि बातचीत के रास्ते खुले रहते हैं तो बड़े सैन्य संघर्ष की संभावना कम हो सकती है।   होर्मुज जलडमरूमध्य केवल एक समुद्री मार्ग नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने इसे फिर से अंतरराष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बना दिया है। आने वाले दिनों में ईरान की रणनीति, अमेरिकी प्रतिक्रिया और कूटनीतिक प्रयास तय करेंगे कि यह क्षेत्र केवल तनाव का केंद्र बना रहेगा या वास्तव में नया रणक्षेत्र बन जाएगा। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इसी संवेदनशील जलमार्ग पर टिकी हुई हैं।

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जापान की प्रधानमंत्री का भारत दौरा, कई बड़े समझौतों की उम्मीद

जापान की प्रधानमंत्री का भारत दौरा दोनों देशों के रिश्तों के लिए काफी अहम माना जा रहा है। इस दौरे के दौरान भारत और जापान के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, तकनीक और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत होगी।   प्रधानमंत्री मोदी से होगी मुलाकात भारत दौरे के दौरान जापान की प्रधानमंत्री भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगी। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा होगी। इसके अलावा दोनों देश भविष्य की साझेदारी को लेकर नई योजनाओं पर भी बात कर सकते हैं।   व्यापार और निवेश पर रहेगा जोर भारत और जापान के बीच आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। जापान भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीकी क्षेत्र में बड़ा निवेश कर रहा है। इस दौरे में निवेश बढ़ाने और नई परियोजनाओं को गति देने पर चर्चा हो सकती है।   रक्षा सहयोग पर भी होगी बातचीत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और सुरक्षा दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा है। भारत और जापान रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर बातचीत कर सकते हैं।   बुलेट ट्रेन परियोजना पर नजर मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में जापान की बड़ी भूमिका है। इस दौरे में इस परियोजना की प्रगति और भविष्य की इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं पर भी चर्चा हो सकती है।   तकनीक और सेमीकंडक्टर में सहयोग भारत और जापान सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल टेक्नोलॉजी और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा सकते हैं। इससे भारत में रोजगार और तकनीकी विकास को बढ़ावा मिलेगा।   क्षेत्रीय सुरक्षा पर साझा रणनीति भारत और जापान दोनों क्वाड के सदस्य हैं। ऐसे में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक चुनौतियों पर भी दोनों देशों के बीच बातचीत होने की संभावना है।

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