देश में हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। यह दिन हिंदी भाषा के महत्व, विकास और उसके सम्मान को समर्पित है। हिंदी दिवस के अवसर पर देशभर के स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी संस्थानों और विभिन्न संगठनों में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों के जरिए लोगों को हिंदी भाषा के इतिहास और महत्व के बारे में जानकारी दी जाती है।
1949 में हिंदी को मिली राजभाषा की मान्यता
हिंदी दिवस मनाने की शुरुआत 14 सितंबर 1949 से जुड़ी है। इसी दिन संविधान सभा ने हिंदी को देवनागरी लिपि में संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। इसके बाद हिंदी के प्रयोग और प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने के लिए 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। हिंदी भारत की प्रमुख भाषाओं में से एक है और देश के बड़े हिस्से में इसका व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है।
स्कूल-कॉलेजों में आयोजित होते हैं कार्यक्रम
हिंदी दिवस के मौके पर स्कूल और कॉलेजों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। विद्यार्थियों के लिए भाषण, निबंध लेखन, कविता पाठ, वाद-विवाद और हिंदी लेखन प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। शिक्षक विद्यार्थियों को हिंदी भाषा के महत्व और उसके समृद्ध साहित्य के बारे में बताते हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी भाषा से जोड़ना है।
हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा
हिंदी भाषा का साहित्य काफी समृद्ध माना जाता है। हिंदी साहित्य में कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक और निबंध जैसी कई विधाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। कबीर, तुलसीदास, प्रेमचंद, महादेवी वर्मा और रामधारी सिंह दिनकर जैसे साहित्यकारों ने हिंदी साहित्य को व्यापक पहचान दिलाई। हिंदी दिवस पर साहित्य और भाषा के क्षेत्र में योगदान देने वाले लोगों को याद किया जाता है।
डिजिटल दौर में हिंदी का बढ़ता इस्तेमाल
इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में हिंदी का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। मोबाइल फोन, वेबसाइट, डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में लोग हिंदी में सामग्री पढ़ते और साझा करते हैं। तकनीक के विकास के साथ हिंदी में डिजिटल सामग्री की उपलब्धता भी बढ़ी है। इससे हिंदी को नई पीढ़ी तक पहुंचने का एक नया माध्यम मिला है।
हिंदी के सम्मान और प्रचार पर जोर
हिंदी दिवस केवल एक भाषा को याद करने का दिन नहीं है, बल्कि यह अपनी भाषाई विरासत और संस्कृति को समझने का अवसर भी देता है। इस दिन हिंदी के अधिक से अधिक प्रयोग, प्रचार और विकास पर जोर दिया जाता है। सरकारी कार्यालयों और संस्थानों में भी हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए विशेष गतिविधियां आयोजित की जाती हैं।
नई पीढ़ी को भाषा से जोड़ने की कोशिश
हिंदी दिवस के जरिए बच्चों और युवाओं को हिंदी पढ़ने, लिखने और बोलने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। बदलते डिजिटल दौर में हिंदी का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। ऐसे में हिंदी भाषा को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ते हुए उसके विकास और विस्तार पर लगातार काम किया जा रहा है।
Lucknow Desk: बिहार के मोकामा से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ चुनाव प्रचार के दौरान हमला किया गया। इस घटना में जानी-मानी हस्ती दुलारचंद यादव की हत्या हो गई है और आरोप लगाया गया है कि इस घटना में पूर्व विधायक अनंत सिंह के समर्थकों की भूमिका है। यह घटना आगामी विधानसभा चुनाव के बीच हुई है, जिससे राज्य में कानून-व्यवस्था और चुनावी हिंसा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अनंत सिंह समेत 5 नामजद मोकामा में दुलारचंद यादव की हत्या मामले में JDU प्रत्याशी बाहुबली अनंत सिंह समेत पांच लोगों पर केस दर्ज कर ली गई है। मृत दुलारचंद यादव के पोते के दिए गए बयान पर अनंत सिंह, दो भतीजों रणवीर सिंह, कर्मवीर सिंह, करीबी छोटन सिंह और कंजय सिंह पर नामजद और कई अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है। यानी दुलारचंद यादव के परिजनों और जन सुराज पार्टी के समर्थकों ने सीधे तौर पर JDU उम्मीदवार और बाहुबली नेता अनंत सिंह के समर्थकों पर हत्या का आरोप लगाया है। अनंत सिंह ने आरोपों को किया खारिज वहीं इस बयान पर JDU उम्मीदवार अनंत सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे RJD उम्मीदवार वीणा देवी के पति बाहुबली सूरजभान सिंह की साजिश बताया है। अनंत सिंह ने कहा कि उनके काफिले पर विरोधियों ने हमला किया और यह सारा खेल सूरजभान सिंह करवा रहे हैं। कौन थे दुलारचंद यादव ? मोकामा के रहने वाले दुलारचंद यादव को ‘टाल का बादशाह’ कहा जाता था। दुलारचंद पहलवानी के साथ-साथ गाना गाने के भी शौकीन थे। उन्होंने जन सुराज के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के लिए एक गाना भी रिकॉर्ड करवाया था। माना जा रहा है कि मोकामा की चुनावी जंग अब व्यक्तिगत रंजिश और हिंसक टकराव की तरफ मुड़ गई है।
बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन एक बार फिर दादा होने का गर्व महसूस कर रहे हैं। दरअसल, उनके नाती अगस्त्य नंदा की अपकमिंग फिल्म ‘इक्कीस’ का ट्रेलर हाल ही में रिलीज़ हुआ है। ट्रेलर देखकर बिग बी इतने इमोशनल हो गए कि उन्होंने सोशल मीडिया पर एक दिल छू लेने वाला पोस्ट शेयर किया। अमिताभ ने अपने पोस्ट में लिखा, “ये तो बस शुरुआत है... गर्व है तुम्हारे इस सफर पर, मेरे बच्चे।” उनकी इस पोस्ट पर फैन्स और फिल्म इंडस्ट्री के सितारों ने जमकर प्यार लुटाया। ‘इक्कीस’ मेगास्टार मेघना गुलज़ार के निर्देशन में बनी है और इसमें अगस्त्य नंदा एक अहम किरदार निभा रहे हैं। फिल्म 1971 के युद्ध के हीरो अरुण खेत्रपाल की कहानी पर आधारित है, जो देश के सबसे युवा परमवीर चक्र विजेता थे। फिल्म के ट्रेलर में अगस्त्य का जोश और समर्पण देखकर फैन्स कह रहे हैं—“दादा की तरह नाती भी लाजवाब!” तो देखना दिलचस्प होगा कि क्या अगस्त्य अपनी पहली ही फिल्म से दादा अमिताभ की विरासत को आगे बढ़ा पाएंगे।
Lucknow Desk: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज बुधवार को भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान राफेल में उड़ान भरकर इतिहास रच दिया है। इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सुखोई-3 MKI लड़ाकू विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। राष्ट्रपति की इस उड़ान ने आज भारतीय वायुसेना के साथ-साथ पूरे देश को गौरव से भर दिया है। बता दें, भारत का राष्ट्रपति तीनों सेनाओं की कमांडर होता है और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर मौजूद हैं। अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज सुबह अंबाला एयरबेस पहुंचीं, जहां वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह और वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। बता दें, राष्ट्रपति का यह उड़ान न केवल साहसिक नेतृत्व शैली का प्रतीक है, बल्कि भारत की बढ़ती रक्षा क्षमता और 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को वैश्विक पटल पर मजबूती से प्रदर्शित करना भी है। फाइटर जेट में उड़ान भरने वाली दूसरी महिला राष्ट्रपति मुर्मू राष्ट्रपति मुर्मू ने फाइटर जेट की सवारी ये पहली बार नहीं की हैं। उन्होंने इससे पहले 8 अप्रैल 2023 को असम के तेजपुर एयरफोर्स स्टेशन से सुखोई-30 MKI फाइटर विमान में भी उड़ान भर चुकी हैं। वह फाइटर जेट उड़ाने वाली तीसरी राष्ट्रपति और दूसरी महिला राष्ट्राध्यक्ष बनी थीं। राष्ट्रपति मुर्मू ने से पहले पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और प्रतिभा पाटिल ने भी सुखोई-30 MKI में उड़ान भरी थी। राफेल लड़ाकू विमान का क्या है इतिहास? बता दें, राफेल लड़ाकू विमान फ्रांसीसी कंपनी दसॉ एविएशन द्वारा निर्मित किया गया है। सितंबर 2020 में अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर भारतीय वायुसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था। अंबाला एयरबेस राफेल स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरोज' का मुख्य केंद्र है। इन विमानों का इस्तेमाल हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान किया गया था, इसके माध्यम से आतंकवादी ठिकानों पर हमले कर अपनी ताकत को सैनियों ने दिखाया था।
Lucknow Desk: कैसरगंज के बीजेपी नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के हेलीकॉप्टर को धान के खेत में अचानक उतारना पड़ा। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि तकनीकी खराबी आने के बाद पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतारा, जहां हेलीकॉप्टर देखने के लिए ग्रामीण भी जुट गए। मिली जानकारी के मुताबिक, बृजभूषण शरण सिंह एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। उड़ान के कुछ ही मिनट बाद हेलीकॉप्टर में तकनीकी दिक्कत आने लगी। स्थिति को समझते हुए पायलट ने तुरंत इमरजेंसी लैंडिंग का फैसला लिया और नज़दीकी धान के खेत में हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतार दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। हेलीकॉप्टर की जांच के लिए टेक्निकल टीम बुलाई गई है। फिलहाल राहत की बात यह है कि बृजभूषण शरण सिंह और हेलीकॉप्टर में मौजूद सभी लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं। जांच के बाद ही तकनीकी खराबी की असली वजह पता चल पाएगी। इसी बीच पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर संदेश दिया। उन्होंने कहा, आज मेरा बिहार प्रदेश के अंदर संदेश व दिनारा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सभा का कार्यक्रम था। संदेश विधानसभा का कार्यक्रम करके मैं दिनारा विधानसभा के लिए हेलीकाप्टर से निकला था। अचानक मौसम खराब होने के कारण हेलीकाप्टर की सुरक्षित लैंडिंग एक खेत में करानी पड़ी। पायलट ने बड़ी सूझबूझ से लैंडिंग कराई। मैं, इस समय गाड़ी से पटना जा रहा हूं। किसी अफवाह में आने की जरूरत नहीं है। किसी प्रकार की कोई हानि नहीं हुई है। हम सभी पूर्णतया सुरक्षित हैं। हेलीकाप्टर की सुरक्षा का प्रबंध कर दिया गया है। प्रशासन व जनता का बहुत सहयोग रहा...धन्यवाद
Lucknow Desk: आज 02 नवंबर 2025 को बॉलीवुड के बादशाह Shahrukh Khan ने अपने 60वें जन्मदिन का जश्न मनाया। इस मौके पर उन्होंने अपने परिवार, करीबियों और फिल्म इंडस्ट्री के दोस्तों के साथ खुशियाँ बाँटी। उन्होंने अपने आलीशान घर के बजाय इस बार सार्वजनिक रूप से Mannat से बाहर नहीं दिखने का फैसला किया क्योंकि वहाँ फिलहाल निर्माण का काम चल रहा है। वहीँ, जश्न के लिए उन्होंने Alibaug में स्थित निजी स्थान चुना। एक विशेष फैन-मीट कार्यक्रम Balgandharva Rangmandir, बांद्रा में आयोजित किया गया था, जहाँ सीमित प्रवेश पास के माध्यम से प्रशंसक सीधे शामिल हुए। सोशल मीडिया पर सितारों ने बधाइयाँ दीं। जिसमें Farah Khan ने लिखा, “Happy birthday KING … rule for another 100 years”। बता दें कि Shahrukh Khan के जन्मदिन के मौके पर सिर्फ भारत भर से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी फैंस जुटे। शाहरुख खान के फैन क्लबों ने जन्मदिन सप्ताह के रूप में मनाया, चैरिटी ड्राइव, विशेष बैनर आदि के माध्यम से ख़ास अंदाज़ से जश्न मनाया।
देश में हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। यह दिन हिंदी भाषा के महत्व, विकास और उसके सम्मान को समर्पित है। हिंदी दिवस के अवसर पर देशभर के स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी संस्थानों और विभिन्न संगठनों में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों के जरिए लोगों को हिंदी भाषा के इतिहास और महत्व के बारे में जानकारी दी जाती है। 1949 में हिंदी को मिली राजभाषा की मान्यता हिंदी दिवस मनाने की शुरुआत 14 सितंबर 1949 से जुड़ी है। इसी दिन संविधान सभा ने हिंदी को देवनागरी लिपि में संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। इसके बाद हिंदी के प्रयोग और प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने के लिए 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। हिंदी भारत की प्रमुख भाषाओं में से एक है और देश के बड़े हिस्से में इसका व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। स्कूल-कॉलेजों में आयोजित होते हैं कार्यक्रम हिंदी दिवस के मौके पर स्कूल और कॉलेजों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। विद्यार्थियों के लिए भाषण, निबंध लेखन, कविता पाठ, वाद-विवाद और हिंदी लेखन प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। शिक्षक विद्यार्थियों को हिंदी भाषा के महत्व और उसके समृद्ध साहित्य के बारे में बताते हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी भाषा से जोड़ना है। हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा हिंदी भाषा का साहित्य काफी समृद्ध माना जाता है। हिंदी साहित्य में कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक और निबंध जैसी कई विधाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। कबीर, तुलसीदास, प्रेमचंद, महादेवी वर्मा और रामधारी सिंह दिनकर जैसे साहित्यकारों ने हिंदी साहित्य को व्यापक पहचान दिलाई। हिंदी दिवस पर साहित्य और भाषा के क्षेत्र में योगदान देने वाले लोगों को याद किया जाता है। डिजिटल दौर में हिंदी का बढ़ता इस्तेमाल इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में हिंदी का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। मोबाइल फोन, वेबसाइट, डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में लोग हिंदी में सामग्री पढ़ते और साझा करते हैं। तकनीक के विकास के साथ हिंदी में डिजिटल सामग्री की उपलब्धता भी बढ़ी है। इससे हिंदी को नई पीढ़ी तक पहुंचने का एक नया माध्यम मिला है। हिंदी के सम्मान और प्रचार पर जोर हिंदी दिवस केवल एक भाषा को याद करने का दिन नहीं है, बल्कि यह अपनी भाषाई विरासत और संस्कृति को समझने का अवसर भी देता है। इस दिन हिंदी के अधिक से अधिक प्रयोग, प्रचार और विकास पर जोर दिया जाता है। सरकारी कार्यालयों और संस्थानों में भी हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए विशेष गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। नई पीढ़ी को भाषा से जोड़ने की कोशिश हिंदी दिवस के जरिए बच्चों और युवाओं को हिंदी पढ़ने, लिखने और बोलने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। बदलते डिजिटल दौर में हिंदी का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। ऐसे में हिंदी भाषा को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ते हुए उसके विकास और विस्तार पर लगातार काम किया जा रहा है।
झारखंड में लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने पर सहमति जताई है। इस फैसले के बाद छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने 16 दिनों से जारी अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। यह घटनाक्रम 17 अगस्त 2026 की देर रात सामने आया, जबकि इससे जुड़ी रिपोर्टें 18 अगस्त 2026 को प्रमुख मीडिया संस्थानों द्वारा प्रकाशित और अपडेट की गईं। JSSC-CGL परीक्षा को लेकर लंबे समय से था विरोध झारखंड में JSSC-CGL परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया को लेकर काफी समय से अभ्यर्थियों और छात्र संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा था। छात्रों का आरोप था कि परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। आंदोलनकारी छात्र परीक्षा रद्द करने के साथ-साथ भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे थे। इसी मांग को लेकर छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो सहित कई छात्र आंदोलन पर बैठे थे। आंदोलन को और तेज करने के लिए देवेंद्र नाथ महतो ने भूख हड़ताल शुरू की थी, जो लगातार 16 दिनों तक चली। लंबे अनशन के कारण उनकी तबीयत भी बिगड़ने लगी थी और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा। सरकार ने छात्रों की प्रमुख मांगें मानी आंदोलन के बढ़ते दबाव के बीच झारखंड सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा के साथ TDPL द्वारा आयोजित संबंधित परीक्षाओं और परिणामों को रद्द करने का फैसला किया। सरकार के प्रतिनिधियों ने आंदोलनकारी छात्रों से बातचीत की और उनकी प्रमुख मांगों पर सहमति जताई। इसके बाद छात्र नेताओं ने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार के मंत्री दीपिका पांडे सिंह और इरफान अंसारी अस्पताल पहुंचे और आंदोलनकारी छात्र नेताओं से बातचीत की। इसके बाद मंत्री इरफान अंसारी ने जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया। 24 दिनों से चल रहा था छात्र आंदोलन JSSC-CGL को लेकर छात्रों का आंदोलन लगभग 24 दिनों से जारी था। छात्र परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच और भर्ती व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे थे। सरकार के फैसले के बाद आंदोलनकारी छात्रों में खुशी देखने को मिली और उन्होंने इसे अपने संघर्ष की बड़ी जीत बताया। देवेंद्र नाथ महतो ने भी सरकार द्वारा मांगें स्वीकार किए जाने को झारखंड के छात्रों की बड़ी जीत बताया। हालांकि, आंदोलनकारी छात्रों की कुछ मांगें आगे भी चर्चा का विषय बनी रह सकती हैं। चयनित अभ्यर्थियों में नाराजगी सरकार के इस फैसले से एक तरफ आंदोलनकारी छात्र खुश हैं, वहीं दूसरी ओर पहले से चयनित अभ्यर्थियों में चिंता और नाराजगी भी देखी जा रही है। परीक्षा रद्द होने से उन उम्मीदवारों के भविष्य पर भी असर पड़ सकता है, जिन्होंने परीक्षा पास कर सरकारी नौकरी हासिल की थी। अब झारखंड सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती भर्ती प्रक्रिया को दोबारा पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से आयोजित करने की होगी। साथ ही यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा कि परीक्षा रद्द होने से प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए सरकार आगे क्या व्यवस्था करती है। फिलहाल JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने का फैसला झारखंड की भर्ती व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में सरकार की नई भर्ती प्रक्रिया और जांच से जुड़े फैसलों पर सभी अभ्यर्थियों की नजर बनी रहेगी।
नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छात्र आंदोलन को बड़ी सफलता मिली है। हालांकि, Cockroach Janta Party यानी CJP ने स्पष्ट किया है कि उसका प्रदर्शन अभी समाप्त नहीं होगा। संगठन का कहना है कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा उसकी प्रमुख मांगों में शामिल था, लेकिन आंदोलन से जुड़ी बाकी मांगों पर फैसला होना अभी बाकी है। धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा भेजा। यह फैसला NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में अनियमितताओं को लेकर हुए बड़े छात्र आंदोलन के बीच सामने आया। इस्तीफे की खबर के बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रगान गाकर और मिठाइयां बांटकर खुशी जताई। छात्र आंदोलन के दबाव में आया बड़ा फैसला NEET से जुड़े विवाद के बाद देशभर के छात्रों में नाराजगी बढ़ रही थी। प्रदर्शनकारी परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रभावित विद्यार्थियों को न्याय देने की मांग कर रहे थे। CJP के नेतृत्व में दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई दिनों तक धरना दिया गया। संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कम कोई फैसला स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकार और प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत भी हुई, लेकिन शुरुआत में इस्तीफे की मांग पर सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद विरोध-प्रदर्शन जारी रहा और सरकार पर दबाव बढ़ता गया। इस्तीफे को बताया आंदोलन की जीत धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP नेताओं और प्रदर्शनकारियों ने इसे शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन की जीत बताया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लंबे समय से उठाई जा रही उनकी एक महत्वपूर्ण मांग आखिरकार पूरी हुई है। यह इस्तीफा ऐसे समय आया, जब प्रदर्शन दिल्ली से निकलकर देश के अन्य शहरों तक पहुंच चुका था। अलग-अलग राज्यों में छात्रों और युवाओं ने CJP तथा जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों के समर्थन में कार्यक्रम आयोजित किए थे। इस्तीफे के बाद भी धरना जारी CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा है कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन संगठन की बाकी मांगें अभी पूरी नहीं हुई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सभी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से नहीं हटेंगे। संगठन परीक्षा व्यवस्था में सुधार, प्रभावित छात्रों को न्याय और प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़े मुद्दों पर सरकार से ठोस कदम चाहता है। इसलिए मंत्री के इस्तीफे के बावजूद आंदोलन जारी रखने का फैसला किया गया है। कैंडल मार्च से बढ़ेगा आंदोलन CJP ने अपने आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए देशव्यापी शांतिपूर्ण कैंडल मार्च का भी आह्वान किया है। इस कार्यक्रम के जरिए संगठन प्रदर्शनकारी छात्रों और कथित पुलिस कार्रवाई से प्रभावित लोगों के प्रति एकजुटता दिखाना चाहता है। संगठन ने समर्थकों से मार्च के दौरान शांति बनाए रखने और कानून का पालन करने की अपील की है। अलग-अलग शहरों में स्थानीय परिस्थितियों और प्रशासन की अनुमति के अनुसार कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं। अब सरकार के अगले कदम पर नजर अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार नया शिक्षा मंत्री किसे बनाती है और पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या सुधार लागू करती है। इसके साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि CJP की बाकी मांगों पर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच कोई समझौता हो पाता है या नहीं। फिलहाल, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी है और CJP ने सभी मांगें पूरी होने तक पीछे नहीं हटने का संकेत दिया है।