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क्या है G7, ग्लोबल साउथ का नेतृत्व करेंगे PM मोदी, फ्रांस के बाद अब कौन करेगा अध्यक्षता?

TV 24 Network June 14, 2026 0
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G7 Summit 2026: PM मोदी बनेंगे ग्लोबल साउथ की आवाज, फ्रांस के बाद कौन संभालेगा G7 की कमान?

Lucknow Desk: दुनिया की सबसे प्रभावशाली आर्थिक और राजनीतिक संस्थाओं में से एक G7 (ग्रुप ऑफ सेवन) इन दिनों फिर चर्चा में है। पीएम मोदी 16-17 जून को G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. G7 के सदस्य देश भारत को अहम पार्टनर के तौर पर आमंत्रित करते आए हैं.

 

वैश्विक अर्थव्यवस्था, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा, भू-राजनीतिक तनाव और विकासशील देशों के मुद्दों पर चर्चा के लिए आयोजित होने वाले G7 शिखर सम्मेलन में भारत की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। इसी बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि फ्रांस के बाद G7 की अध्यक्षता कौन करेगा और इस मंच पर भारत तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की क्या भूमिका होगी।

 

क्या है G7?

G7 दुनिया की सात विकसित और औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। इसमें शामिल देश हैं:

  • अमेरिका
  • ब्रिटेन
  • कनाडा
  • फ्रांस
  • जर्मनी
  • इटली
  • जापान

 

इसके अलावा, यूरोपीय संघ (EU) भी इस समूह की बैठकों में भाग लेता है। G7 का गठन वर्ष 1975 में वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर चर्चा और सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया था। समय के साथ इसका दायरा केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सुरक्षा, जलवायु, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय राजनीति जैसे विषय भी इसमें शामिल हो गए।

 

फ्रांस के बाद कौन करेगा अध्यक्षता?

G7 की अध्यक्षता हर वर्ष सदस्य देशों के बीच रोटेशन के आधार पर बदलती रहती है। प्रत्येक देश अपनी अध्यक्षता के दौरान शिखर सम्मेलन की मेजबानी करता है और बैठक के प्रमुख एजेंडे तय करता है। आने वाले वर्षों में सदस्य देश बारी-बारी से इसकी अध्यक्षता संभालेंगे और वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा का नेतृत्व करेंगे।

 

हालांकि भारत G7 का स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन पिछले कई वर्षों से भारत को विशेष आमंत्रित देश के रूप में लगातार बुलाया जा रहा है। इससे स्पष्ट होता है कि वैश्विक मंचों पर भारत का महत्व तेजी से बढ़ रहा है।

 

ग्लोबल साउथ की आवाज बन रहा भारत

"ग्लोबल साउथ" उन विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों को कहा जाता है जो एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में स्थित हैं। इन देशों की प्रमुख चिंताएं गरीबी, विकास, खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और वित्तीय सहयोग से जुड़ी हैं।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले कुछ वर्षों में ग्लोबल साउथ के मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रमुखता से उठाया है। भारत ने कई बार यह कहा है कि वैश्विक निर्णय लेने वाली संस्थाओं में विकासशील देशों को अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

 

भारत की अध्यक्षता में आयोजित G20 शिखर सम्मेलन के दौरान भी ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूती से रखा गया था। इसके परिणामस्वरूप अफ्रीकी संघ को G20 की स्थायी सदस्यता मिली, जिसे भारत की बड़ी कूटनीतिक सफलता माना गया।

 

G7 में क्यों महत्वपूर्ण है भारत?

आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। इसके साथ ही भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, डिजिटल तकनीक, हरित ऊर्जा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

 

G7 देशों के लिए भारत एक महत्वपूर्ण साझेदार बन चुका है। रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व संकट और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर भारत का संतुलित दृष्टिकोण उसे विशेष महत्व दिलाता है।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही भारत G7 का सदस्य न हो, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी इस मंच पर ग्लोबल साउथ के करोड़ों लोगों की आवाज को प्रतिनिधित्व देती है। यही कारण है कि भारत को लगातार G7 बैठकों में आमंत्रित किया जाता है।

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PM-Modi G7-Summit G7-Summit-2026 Global-South India-AtG7 Narendra-Modi International-Relations Global-Leadership Global-Economy
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